शासन की एमएसएमई प्रोत्साहन योजना से बदली तस्वीर

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जबलपुर,कोरोना काल… एक ऐसा दौर, जब कारोबारियों के सामने बाजार बचाने से लेकर रोजगार बचाने तक की चुनौती खड़ी हो गई थी। सप्लाई चेन टूट गई थी, दुकानें बंद थीं और बाहर से आने वाला सामान समय पर नहीं पहुंच रहा था। ऐसे मुश्किल समय में जहां कई कारोबारियों को अपना काम बंद करना पड़ा, वहीं जबलपुर की सनमित कौर लाम्बा ने संकट में ही अवसर तलाश लिया।कोरोना से पहले तक सनमित इंदौर और भोपाल से बेकरी प्रोडक्ट मंगाकर जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में बेचती थीं। कारोबार ठीक चल रहा था। बाजार में ग्राहकों और दुकानदारों के बीच उनके प्रोडक्ट की मांग थी, लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना और लॉकडाउन ने पूरा समीकरण बदल दिया। बाहर से माल आना मुश्किल हो गया। कंपनियां समय पर स्टॉक उपलब्ध नहीं करा पा रही थीं। दुकानदार माल मांग रहे थे, लेकिन सप्लाई नहीं हो पा रही थी।कारोबार के सामने ऐसा संकट खड़ा हुआ, जिसका तत्काल कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। इसी दौरान सनमित ने सोचा- जब बाहर से माल नहीं आ रहा तो अपना माल क्यों न बनाया जाए? यही सोच उनके कारोबार की नई शुरुआत बनी।

52 लाख के प्रोजेक्ट से शुरू किया सफर 

अपना प्रोडक्ट बनाने का फैसला आसान नहीं था। इसके लिए पूंजी, प्लांट, मशीनरी, उत्पादन और बाजार—सब कुछ नए सिरे से खड़ा करना था। इसके बावजूद सनमित ने कदम पीछे नहीं खींचे। वर्ष 2021 में करोंदा में बेकरी प्रोडक्ट्स का अपना प्लांट शुरू किया। करीब 52 लाख रुपए के प्रोजेक्ट से कारोबार की शुरुआत हुई।जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से केन्‍द्र शासन की माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) प्रोत्साहन योजना के तहत यूनियन बैंक रांझी से 52 लाख रुपए का ऋण लिया। इसमें शासन से करीब 19 लाख रुपए की सब्सिडी मिली। छोटे प्लांट में सीमित उत्पादन से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। प्रोडक्ट की मांग बढ़ी तो उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत महसूस हुई।बाजार में अपने ब्रांड की स्वीकार्यता बढ़ने के साथ सनमित ने फैक्ट्री के विस्तार की योजना बनाई। वर्ष 2025 में फैक्ट्री के विस्तार के लिए करीब 62 लाख रुपए का अतिरिक्त ऋण इसी योजना के तहत यूनियन बैंक रांझी से लिया गया। इस चरण में शासन से करीब 30 लाख रुपए की सब्सिडी स्वीकृत हुई, जिसकी पहली किस्त खाते में हस्तांतरित हो चुकी है। दोनों चरणों को मिलाकर सनमित ने करीब सवा करोड़ रुपए के ऋण के माध्यम से अपने कारोबार को विस्तार दिया।

टोस्ट से शुरू हुई कहानी, अब पूरी बेकरी रेंज

सनमित ने अपने कारोबार की शुरुआत टोस्ट से की। जिस बाजार में वे कभी दूसरी कंपनियों के बेकरी प्रोडक्ट बेचती थीं, उसी बाजार में अब उन्हें अपना ब्रांड लेकर उतरना था। बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट्स को देखकर उन्होंने अपने ब्रांड ‘लाम्बा फूड एंड प्रोडक्ट्स’ को तैयार किया। उनका उद्देश्य था कि ग्राहकों को ऐसी कीमत पर बेकरी प्रोडक्ट उपलब्ध कराए जाएं, जो उनकी पहुंच में हों और गुणवत्ता के मामले में बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट्स से प्रतिस्पर्धा कर सकें।टोस्ट के बाद उन्होंने बच्चों के लिए फ्रायम्स, केक, कुकीज और अन्य बेकरी प्रोडक्ट्स बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे एक प्रोडक्ट से शुरू हुआ सफर बेकरी की पूरी रेंज तक पहुंच गया। आज उनके प्रोडक्ट सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं हैं। मध्यप्रदेश के कई जिलों में उनकी सप्लाई पहुंच रही है। करीब 200 से 250 किलोमीटर के दायरे में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार हो चुका है। भोपाल की ओर भी प्रोडक्ट भेजे जा रहे हैं, जबकि छतरपुर तक उनके माल की सप्लाई हो रही है।

दुकानदारों ने कहा-आपकी कंपनी का माल नहीं लेंगे

नया ब्रांड बनाना एक चुनौती थी, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती थी उसे बाजार में जगह दिलाना। सनमित जिन दुकानदारों के माध्यम से पहले बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट बेचती थीं, उनमें से कई ने शुरुआत में उनके अपने ब्रांड का माल रखने से इनकार कर दिया। दुकानदारों का कहना था कि वे पहले से स्थापित कंपनियों के प्रोडक्ट बेच रहे हैं और नया माल रखने का जोखिम नहीं लेना चाहते।यह किसी भी नए उद्यमी के लिए निराश करने वाला पल हो सकता था, लेकिन सनमित ने इसे चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने हार मानने के बजाय दुकानदारों और ग्राहकों का भरोसा जीतने पर ध्यान दिया। प्रोडक्ट की गुणवत्ता और कीमत के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे बाजार में अपनी जगह बनानी शुरू की। कुछ दुकानदारों ने माल रखना शुरू किया। ग्राहकों ने प्रोडक्ट इस्तेमाल किया और पसंद किया। इसके बाद एक दुकान से दूसरी दुकान और एक डिस्ट्रीब्यूटर से दूसरे डिस्ट्रीब्यूटर तक नेटवर्क बढ़ता गया। जिस बाजार में शुरुआत में उनके प्रोडक्ट को जगह देने में दुकानदार हिचक रहे थे, उसी बाजार में आज उनके ब्रांड की पहचान बन चुकी है।

पति ने संभाली मार्केटिंग, सनमित ने उत्पादन

सनमित अपनी सफलता का श्रेय अकेले खुद को नहीं देतीं। वे बताती हैं कि इस सफर में उनके पति रविंद्र लाम्बा का सबसे बड़ा योगदान रहा। फैक्ट्री में उत्पादन की जिम्मेदारी सनमित संभालती हैं, जबकि रविंद्र मार्केटिंग और बाजार में प्रोडक्ट की पहुंच बढ़ाने का काम देखते हैं। दोनों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां बांटकर कारोबार को आगे बढ़ाया। एक तरफ फैक्ट्री में उत्पादन बढ़ता गया तो दूसरी ओर बाजार में नए दुकानदार और डिस्ट्रीब्यूटर जुड़ते गए। पति-पत्नी की साझी मेहनत ने छोटे से शुरू हुए कारोबार को लगातार विस्तार दिया।

अपने लिए रोजगार बनाया, 35 परिवारों के घर भी रोशन किए

सनमित की कहानी केवल एक महिला के सफल उद्यमी बनने की कहानी नहीं है। इसके साथ रोजगार की कहानी भी जुड़ी है। करोंदा स्थित उनके प्लांट में आसपास के गांवों के करीब 35 महिला और पुरुषों को रोजगार मिला है। उत्पादन से लेकर अन्य कामों में स्थानीय लोगों को काम मिला। इसके अलावा डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री से जुड़े लोगों के लिए भी यह कारोबार आय का जरिया बना है। सनमित मानती हैं कि कारोबार की असली सफलता सिर्फ टर्नओवर बढ़ने में नहीं है। सफलता तब ज्यादा मायने रखती है, जब उससे दूसरे परिवारों की जिंदगी भी बेहतर हो और लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके।

52 लाख से शुरुआत, अब 3 करोड़ का सालाना टर्नओवर

वर्ष 2021 में करीब 52 लाख रुपए के प्रोजेक्ट से शुरू हुआ कारोबार आज करीब 3 करोड़ रुपए के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में कारोबार लगभग 3 करोड़ रुपए रहा। कोरोना के संकट से शुरू हुई यह यात्रा आज एक ऐसे कारोबार में बदल चुकी है, जिसने सनमित के परिवार को आर्थिक मजबूती देने के साथ-साथ आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए हैं।सनमित कहती हैं कि अभी मंजिल बाकी है। बाजार में प्रोडक्ट की पहुंच लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को और विस्तार देने की योजना है।सनमित अपनी सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य की सरकार को देना भी नहीं भूलती। सनमित कहती हैं कि कोई भी पौधा लगाने के लिए पानी और ऑक्सीजन दोनों की जरूरत होती है… बीज हमने बोया… पानी देने का काम किया प्रधानमंत्री मोदी के वोकल फॉर लोकल के इंस्पिरेशन ने और ऑक्सीजन देने का काम हमारी मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है।

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