अयोध्या मैं भगवान श्रीराम की अभिजीत मुहूर्त मैं हुई प्राण-प्रतिष्ठा

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कटनी/स्लीमनाबाद(सुग्रीव यादव ): राम आएंगे तो अंगना सजायेंगे ,दीप जलाकर दिवाली मनाएंगे।मेरी कुटिया के भाग अब जाग जाएंगे राम आएंगे।जय-जय श्रीराम के जयकारे ,राम के शौर्य,शुचिता और राम की महिमा की प्रस्तुतियां दी गई तो समूचा कौड़िया धनवाही स्थित श्रीराम जानकी मंदिर रामभक्ति मैं डूब गया।

विधानसभा स्तरीय कार्यक्रम कौड़िया धनवाही स्थित श्रीराम जानकी मंदिर मैं आयोजित हुआ।
उक्त विशाल कार्यक्रम विधायक प्रणय पांडेय की ओर रखा गया था।मंदिर मे सबसे पहले दोपहर 12 बजे भगवान श्रीराम जानकी ,हनुमान का पूजन -अर्चन किया गया।इसके बाद आर्केस्ट्रा के कलाकारों के द्वारा संगीतमय भजनो की प्रस्तुति दी गई।साथ ही अहीरों की टोलियों ने भी दिवारी नृत्य की छठा बिखेरी।कार्यक्रम के दौरान संत बनवारी दास महाराज का आगमन हुआ।जहां सकल सनातन धर्मावलंबियों ने भव्य अगवानी की।इसके बाद संत बनवारी दास जी महाराज का तुलादान किया गया।इसके बाद विशाल भंडारा शुरू हुआ जो देर शाम तक चला।उक्त कार्यक्रम मे भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ा।अनेक गाँवो से निकली शोभायात्रा भी मंदिर पहुँची।इस दौरान विधायक प्रणय पांडेय ने कहा कि आज 500 साल की प्रतीक्षा खत्म हो गई और भगवान श्रीराम अपने विशाल ओर दिव्य घर मे प्रवेश किये।यह क्षण हर भारतीय,हर हिंदू के लिए अविस्मरणीय है।यह हमारा सौभाग्य है कि हम इस पल के साक्षी बन रहे है।पूरा कार्यक्रम स्थल जय श्रीराम की जयजयघोष से गूंज उठा।यहां बड़ी स्क्रीन पर अयोध्या से प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का सीधा प्रसारण दिखाया गया।कौड़िया धनवाही मैं इतना बड़ा भव्य कार्यक्रम आयोजन पर जनता जनार्दन ने विधायक का आभार जताया।
इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सुनीता मेहरा,जिला पंचायत सीईओ शिशिर गेमावत,जिला पंचायत सदस्य पंडित प्रदीप त्रिपाठी,जन भागीदारी समिति अध्यक्ष राधेश्याम गोलू तिवारी,एसडीओपी अखिलेश गौर,थाना प्रभारी अखिलेश दाहिया ,भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपू शुक्ला,सरपंच सुनील गुप्ता सहित बड़ी संख्या मे भक्तों की उपस्थिति रही।इसके साथ ही विकासखण्ड अंतर्गत रुपनाथ धाम,खडरा स्थित शारदा मंदिर,मरही माता मंदिर मे हवन -पूजन हुआ व शोभायात्रा निकाली गई।बहोरीबन्द मैं शारदा मंदिर से मरही माता मंदिर तक विशाल शोभायात्रा निकाली गई।श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर गली-मोहल्लों तक भव्य सजावट की गई।विकासखण्ड में छोटे-बड़े मंदिरों पर सजावट के साथ पूजा-अर्चना और भंडारों का आयोजन किया गया।

 


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