संविधान के खिलाफ आदेश करने वालों पर कठोर कार्यवाही की मांग

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छिंदवाड़ा ब्यूरो. सामाजिक कार्यकर्ता भगवानदीन साहू के नेतृत्व में बहुत से धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति ,मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ,विधि मंत्रालय के नाम ज्ञापन देकर सविधान के खिलाफ आदेश करने वाले पर कड़ी कार्यवाही की मांग की ज्ञापन में बताया कि -सनातन संस्कृति के रक्षक परम पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू के खिलाफ 27 मई 2026 को जोधपुर उच्च न्यायालय का जो फैसला आया हैरान करने वाला है । जो 100 करोड़ हिंदुओ के मुंह पर तमाचा है । सनातन संस्कृति पर कुठराघात है । सोशल मीडिया का दौर है किसी से कोई बात छुपती नहीं है । आम जनमानस के दिमाग में न्यायपालिका को लेकर कई सवाल उठ रहें हैं । आशाराम जी बापू पर आरोप था कि उन्होंने उनके गुरुकुल की छात्रा से योन उत्पीड़न किया ! पॉक्सो एक्ट में प्रकरण दर्ज हुआ और गैंग रैप की कई धाराएं लगाई गई । 4 अन्य लोगों को सहआरोपी बनाया गया । जोधपुर पुलिस के अनुसार गुरुकुल के संचालक शरद पोटाला और छात्रावास वार्डन शिल्पी गुप्ता ने एक छात्रा को सेवादार शिवा और प्रकाश के माध्यम से बापूजी के पास भेजा । वहां उक्त छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ । लगभग 5 वर्ष जोधपुर सेशन कोर्ट में सुनवाई हुई । जहां कोर्ट ने आदेश किया कि शिवा और प्रकाश जोधपुर में थे ही नहीं उन्हें बरी कर दिया गया और बापू जी के खिलाफ कोई ठोस गवाह और सबूत भी नही है । पर बेनिफिट ऑफ डाउट ( संदेह ) के आधार पर शेष तीनों आरोपी को उम्र कैद की सजा सुनाई । मामला जोधपुर उच्च न्यायालय गया । वहाँ भी न्यायालय ने आदेश में बताया कि शरद पोटाला और शिल्पी गुप्ता पर कोई आरोप नहीं बनता और गैंग रेप नहीं हुआ । दोनों सह आरोपी को बरी किया गया । अब प्रश्न इस बात का उठता है कि 4 सहआरोपी बरी तो मुख्य आरोपी गुनहगार कैसे ? जोधपुर पुलिस की जांच की कड़ी केस की कहानी से मेल ही नहीं खा रही है । उक्त प्रकरण में आरोपी के वकील ने बार बार सेशन कोर्ट में लड़की के पॉलीग्राफ टेस्ट की मांग की जिससे न्यायालय ने ठुकरा दिया और जोधपुर पुलिस ने तो यह टेस्ट जानबूझकर किया ही नही । लड़की के 4 जन्म प्रणाम पत्र हैं जिसमें वो बालिग है । उसे भी न्यायालय ने क्यों नहीं माना , तथा कथित घटना के वक्त आरोप लगाने वाली लड़की उसके पुरुष मित्र के साथ 90 मिनट फोन पर व्यस्त थी जिसकी कॉल डिटेल कोर्ट में पेश की गई । तथाकथित धटना के वक्त पूज्य बापूजी जोधपुर में ही एक मंगनी के कार्यक्रम में व्यस्त थे ।जिसके फोटो ग्राफ्स और गवाह कोर्ट में पेश किए गए । पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में किसी प्रकार के यौन उत्पीड़न की पुष्टि नहीं हुई । रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल थी। ऐसे अनगिनित सवाल आम आदमी के जहन में हैं। एक सर्वे अनुसार बापू जी को फंसाने के लिए विदेशों से बड़ी फंडिंग हुई है । जिसमे देश के राज नेता , मीडिया और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग शामिल हैं। इसकी भी जांच की जाए । क्योंकि विदेशों से आर्थिक सहायता प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इस तथाकथित घटना को 4 वर्षो तक लगभग रोजाना दिखाया । न्यायालय द्वारा सबूतों की जानबूझकर अनदेखी किया जाना षड्यंत्र उजागर करता है । यह देश का ऐसा पहला केस है जहां बेनिफिट ऑफ डाउट हमेशा आरोपी के पक्ष में जाता हैं पर यहाँ उल्टा हुआ । न्याय है कि मजाक समझ नही आ रहा है। जब सन 2012 में पास्को एक्ट बना तब अधिकतम 10 वर्षों की सजा थी । पूज्य बापूजी पर अत्याचार करने के लिए इसे बढ़ाकर उम्र कैद तंक की गई । यही सविधान के नियमों का दरुपयोग है । इसकी विस्तृत जांच की माँग की गई । ज्ञापन देते समय आधुनिक चिंतक हरशूल रघुवंशी ,राष्ट्रीय बजरंग दल के नितेश साहू ,समिति के अध्यक्ष मदन मोहन परसाई ,कुंबी समाज के मार्गदर्शक सुभाष इंगले ,कलार समाज के प्रमुख बबलू सूरज प्रसाद माहोरे ,कुंबी समाज के युवा नेता अंकित ठाकरे ,साहू समाज के ओमी साहू ,बौद्ध महासभा के विनोद भगत , पशु प्रेमी अक्षत परसाई,आई टी शेल के प्रभारी भूपेश पहाड़े ,रामेश्वर करमेले ,ओमप्रकाश डहेरिया ,अश्विन पटेल ,गौरीशंकर धारे ,महिला समिति से विमल शेरके , डॉ मीरा पराडकर , योगिता पराडकर , शकुंतला कराडे ,करुणेश पाल , रुपाली इंगले ,सुधा ताम्रकार ,कृष्णी राठौड़ ,निर्मिला पटेल आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे ।

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