संत श्री आशाराम जी बापू के प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

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छिंदवाड़ा ब्यूरो: सामाजिक कार्यकर्ता भगवानदीन साहू के नेतृत्व में बहुत से धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने 4 जून 2026 को जिला कलेक्टर के माध्यम से माननीय सुप्रीम कोर्ट के नाम ज्ञापन दिया था । बाद में 19 जून 2026 को स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर विधि अनुरूप याचिका प्रस्तुत की। जिसका विषय है संविधान के खिलाफ आदेश करने वाले पर कठोर कार्यवाही की जाए । जिस पर माननीय उच्चत्तम न्यायालय नई दिल्ली ने संज्ञान लिया है । जिसका प्रकरण क्रमांक 60025 /SCI /PIL /2026 है । जिसकी विधिवत सूचना याचिका कर्ता को मोबाइल सन्देश के माध्यम से दी गई । प्रार्थना पत्र में बताया कि 27 मई 2026 को सनातन संस्कृति के रक्षक परम पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू के खिलाफ जोधपुर उच्च न्यायालय का जो फैसला आया हैरान करने वाला है । जिसमें केवल एक संत को टारगेट किया गया ।इसके बावजूद कि उनके निर्दोषता के ठोस प्रमाण मौजूद हैं। यह 100 करोड़ हिंदुओ के मुंह पर तमाचा है ।सोशल मीडिया का दौर है किसी से कोई बात छुपती नही है । आशाराम जी बापू पर आरोप था कि उन्होंने उनके गुरुकुल की छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न किया । पॉक्सो एक्ट में प्रकरण दर्ज हुआ और गैंग रेप की धाराए लगाई 4 अन्य लोगों को सह आरोपी बनाया गया । जोधपुर पुलिस के अनुसार गुरुकुल के संचालक शरद पोटाला और छात्रावास वार्डन शिल्पी गुप्ता ने उक्त छात्रा को शिवा और प्रकाश के माध्यम से बापूजी के पास भेजा । वहां उस छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ । 5 वर्ष सेशन कोर्ट जोधपुर में केस चला वहाँ कोर्ट ने माना कि शिवा और प्रकाश जोधपुर में थे ही नही । उन्हें बाइज्जत बरी किया गया । बापू जी ,शरद पोटाला और शिल्पी गुप्ता को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई । लगभग 7 वर्ष बाद जोधपुर उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए सह आरोपी शरद पोटाला और शिल्पी गुप्ता को बाइज्जत बरी कर दिया । पूज्य बापूजी को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई । सन 2013 में जब यह प्रकरण पंजीबद्ध हुआ था तब मात्र छेड़छाड़ का मामला था । बाद में यह मीडिया के या अन्य दबाव में यौन उत्पीड़न का बन गया । कुछ अनचाहे सवाल हैं जो आम लोगों के जहन में है जब पीड़िता के जन्म के चार पांच दस्तावेज है । तो जोधपुर पुलिस ने पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों नहीं कराया ? बजाव पक्ष के वकील ने सेशन कोर्ट में भी पॉलीग्राफ टेस्ट की माँग की जिसे न्यायालय ने क्यों ठुकरा दिया ? बहुत से जन्म प्रमाण पत्र में उक्त लड़की बालिग है उस को क्यो नही माना ? बलात्कार के प्रकरण में मेडिकल रिपोर्ट सबसे अहम सबूत माना जाता है। मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नही हुई । रिपोर्ट एकदम नॉर्मल थी। तथा कथित घटना के वक्त उक्त लड़की उसके पुरुष मित्र के साथ 90 मिनट मोबाइल में व्यस्त थी । बचाव पक्ष ने कॉलडिटेल पेश की । तथाकथित घटना के समय बापू जी एक मंगनी के कार्यक्रम में व्यस्त थे । इन सभी सबूतों को न्यायालय ने क्यों नही देखा । शायद यह जानबूझकर किया गया। क्या वजह थी कि उच्च न्यायालय सिर्फ लड़की की बात पर विश्वास कर रहा है । इस केस में सबसे बड़ा हास्यास्पद तथ्य यह है कि उक्त लड़की के जन्म दिन को अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के दिन से जोड़ा गया है । यह बात समझ से परे है । न्याय सिद्धांत कहता है कि दोनों पक्षों के गवाह और सबूतों के आधार पर न्यायालय को निर्णय करना है पर यहां ऐसा नही हुआ । इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सज्ञान में ली है । सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से 44 करोड़ साधकों में न्याय की उम्मीद फिर से जगी है।

 

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