अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट पर विशेष जोर

जबलपुर :कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आज जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी और अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक आयोजित की गई। जिसमें अस्पतालों में सुरक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक निर्देश दिये गये। दिल्ली में हुई एसी विस्फोट का जिक्र करते हुए इलेक्ट्रिकल ऑडिट रिपोर्ट की गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर श्री सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बढ़ते तापमान को देखते हुए सभी अस्पताल अपने विद्युत उपकरणों और वायरिंग की जांच गंभीरता से कराएं ताकि शॉर्ट सर्किट जैसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सके।
बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री संपत उपाध्याय ने पीएम राहत योजना के विस्तार पर चर्चा करते हुए कहा कि अधिक से अधिक अस्पतालों को इस योजना से जुड़ना चाहिए ताकि जरूरतमंद मरीजों को इसका सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने इस प्रक्रिया में पुलिस विभाग की ओर से हर संभव सहयोग करने के लिए कहा। इसी क्रम में यातायात पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंजना ने वर्तमान में योजना से जुड़े अस्पतालों की सीमित संख्या संबंध में कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों इसमें पंजीयन कराना सुनिश्चित करें। सुरक्षा तकनीकी पहलुओं पर जानकारी देते हुए विद्युत विभाग के अधिकारी ने सर्विस लाइन के रखरखाव, गुणवत्तापूर्ण वायरिंग और सही क्षमता के एमसीबी के उपयोग के महत्व को समझाया। उन्होंने विशेष रूप से लू और गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती खपत के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया।अग्नि सुरक्षा के विषय पर नगर निगम की फायर सेफ्टी अधिकारी ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि 04 मई से 10 मई तक आयोजित होने वाले ‘फायर सेफ्टी वीक’ के दौरान सभी अस्पतालों को अनिवार्य रूप से फायर मॉक ड्रिल आयोजित करनी होगी। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि किसी भी अस्पताल में इमरजेंसी एग्जिट यानी आपातकालीन निकास द्वारों पर कोई सामग्री नहीं रखी जानी चाहिए और उन्हें हर समय बाधा रहित रखा जाए। नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श बिश्नोई ने अस्पतालों में ‘कोड रेड’ जैसी आपातकालीन स्थितियों की घोषणा और फायर साइनेज की सही स्थापना के बारे में तकनीकी जानकारी साझा की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि मरीजों के जीवन की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में शहर के निजी चिकित्सालयों, नर्सिंग होम संचालकों, मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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