किसानो को झमाझम बारिश का इंतजार,आसमान की ओर लगाए बैठे टकटकी

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सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद : आषाढ़ माह का आगाज हो गया है!लेकिन मानसून की दस्तक अब तक नही हुई है!
जिससे खेत वीरान पड़े हुए है!किसानों को झमाझम बारिश का इंतजार है ताकि खरीफ सीजन का कृषि कार्य शुरू कर सके!झमाझम बारिश हो इसके लिए किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हुए है!हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई के लिए पानी का साधन है उन किसानों के द्वारा धान की नर्सरी लगाई जा रही है!लेकिन जिन किसानों के पास सिंचाई का साधन नही है बारिश के पानी पर निर्भर है उनके खेत वीरान पड़े हुए है!लेकिन फिर भी किसान इस आस मे जुताई व बुवाई कार्य मे लगे है कि जल्द मानसून की दस्तक होगी ओर झमाझम बारिश होगी!क्योंकि मौसम विभाग द्वारा कुछ दिनों बाद बारिश की संभावना जताई जा रही है।विकासखण्ड क्षेत्र में खरीफ फसल का रकबा 25 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।जिसमें ज्यादा रकबा धान का 20 हजार हैक्टेयर है!जून माह समाप्ति की ओर लेकिन बारिश के आस मे कृषि कार्य मे किसान ज्यादा रूचि दिखा नही रहे है!सिर्फ खेतो मे जुताई करवाकर बोवनी के लिए बारिश का इंतजार कर रहे है!हालांकि इस वर्ष खरीफ सीजन के लिए सरकारी योजना के तहत मिलने वाला बीज पर्याप्त मात्रा मे कृषि विभाग को नही मिला।60 क्विंटल धान का बीज क्लस्टर प्रदर्शन के लिए मिला।जिस कारण किसानों को बाजार से खरीदना पड़ रहा है।जिस कारण कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्रमाणित बीज उपचार के बाद बोने की सलाह दी जा रही है।

बढ़ गई है लागत
किसान राकेश साहू, रामनारायण यादव,संतोष यादव,अनुग्रह यादव का कहना है कि डीजल, खाद, बीज के दाम बढऩे से खरीफ फसल की लागत बढ़ गई है। बीज निगम व सहकारी समितियों मैं धान के उन्नतशील बीज की किस्मो का अभाव रहता है।जिससे निजी दुकानों पर निर्भर होना पड़ता है।निजी दुकानों मैं मनमानी दर पर बीज विक्रय किया जाता है।निजी विक्रेताओं की मनमानी पर लगाम नही लगाई जा रही है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए निःशुल्क बीज वितरण की योजनाएं भी बंद हो चुकी है।अनुदान पर जो बीज मिलता है उसपर उत्पादन कम होता है।इससे छोटे व मध्यम किसानों को परेशानी हो रही है।

 


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