सैनिक छावनी की भूमि से अब हटेगा अवैध कब्जा,हाईकोर्ट नें मामले का किया निराकरण

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सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद – स्लीमनाबाद के ग्राम हरदुआ मे 6 एकड़ से अधिक सैनिक छावनी की भूमि जिस पर अवैध कब्जा विशेष सामुदाय के द्वारा किया गया उससे अब सैनिक छावनी की भूमि कब्जा मुक्त हो जायेगी!
हाईकोर्ट नें मुस्लिम समुदाय की ओर निसार बेग सहित अन्य जनों की ओर से लगाई गईं रिट याचिका को ख़ारिज कर दिया है!साथ ही 10 हजार रूपये की कास्ट भी लगाई है!
यह रकम राज्य सरकार के पास जुर्माना ओर जब्ती(विविध शुल्क )के तहत जमा की जायेगी!हाईकोर्ट नें अपने आदेश मे कहा कि याचिकाकर्ताओं ने स्लीमनाबाद, जिला कटनी में खसरा नंबर 53 (क्षेत्रफल 0.400 हेक्टेयर) पर स्थित कब्रिस्तान/दफन स्थल की सुरक्षा के लिए यह याचिका दायर की है।याचिकाकर्ता स्लीमनाबाद के तहसीलदार द्वारा 12 दिसंबर 2025 को जारी उस नोटिस को चुनौती दे रहे हैं जिसमें उन्हें बेदखल करने और जगह खाली कराने की बात कही गई है। तहसीलदार के आदेश के माध्यम से खसरा नंबर 54 (क्षेत्रफल 2.72 हेक्टेयर) से अतिक्रमण हटाने के लिए पांच सदस्यों की एक समिति गठित की है; यह जमीन ‘सैनिक छावनी’, राज्य के नाम पर दर्ज है।याचिकाकर्ताओं के अनुसार, खसरा नंबर 53 पर 1875 से कब्रिस्तान है, लेकिन समुदाय में शवों को दफ़नाने के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं है। इसलिए, उससे सटी 2.72 हेक्टेयर वाली खसरा नंबर 54 की ज़मीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान के तौर पर किया जा रहा है। पटवारी की रिपोर्ट से भी पता चलता है कि ज़मीन का इस्तेमाल ‘कब्रिस्तान’ के तौर पर हो रहा है। स्थानीय नेताओं और उप-सरपंच ने पिछले 200 सालों से बताई गई ज़मीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान के तौर पर करने की सिफ़ारिश की है। इसलिए, प्रतिवादी बिना वजह याचिकाकर्ताओं को बेदखल कर रहे हैं।याचिकाकर्ताओं ने बताया है कि वे पहले ही सिविल कोर्ट जा चुके हैं और सीपीसी के ऑर्डर 39 नियम 1 और 2 के तहत आवेदन भी दायर कर चुके हैं।10 नवंबर 2025 के अंतरिम आदेश के ज़रिए, धारा 151 के तहत आवेदन को मंज़ूरी दी गई और प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया कि वे सीपीसी के ऑर्डर 39 नियम 1 और 2 के तहत आवेदन पर अपना जवाब दाखिल करने तक यथास्थिति बनाए रखें। जवाब दाखिल होने के बाद, सिविल जज ने मामले को
19 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया।हालाँकि, याचिकाकर्ताओं ने 16 दिसंबर 2025 को यह रिट याचिका दायर करके जल्दबाज़ी में इस कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। कोर्ट स्लिप प्राप्त की गई और याचिका पर सुनवाई 19 दिसंबर 2025 को हुई। लेकिन, उससे पहले ही, 16 दिसंबर 2025 को, सिंगल जज ने सीपीसी के ऑर्डर 39 नियम 1 और 2 के तहत आवेदन को उसके गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया।इसलिए, यह याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के अलावा और कुछ नहीं है। याचिकाकर्ताओं को दो उपाय आज़माने की अनुमति नहीं दी जा सकतीसिविल कोर्ट और हाईकोर्ट कोर्ट, दोनों के सामने। आज तक, याचिकाकर्ताओं ने सिविल केस वापस नहीं लिया है। सीपीसी के ऑर्डर 39 नियम 1 और 2 के तहत एप्लीकेशन को खारिज करने वाला आदेश अभी भी लागू है।
इसलिय निसार बेग व अन्य जनों की ओर से लगाई गईं रिट याचिका ख़ारिज की गईं!गौरतलब है स्लीमनाबाद के ग्राम हरदुआ मै 6 एकड़ से अधिक सैनिक छावनी की भूमि जिसपर विशेष समुदाय के द्वारा अवैध कब्जा किया गया था!
जिस पर ग्राम पंचायत, विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल ने अवैध रूप से किये गये कब्जे को हटाने के आगे आकर आवाज बुलंद की थी ओर कब्जा हटाने तहसीलदार, एसडीएम ओर कलेक्टर को शिकायत की थी!तहसीलदार स्लीमनाबाद के द्वारा अतिक्रमण की हुई भूमि खसरा नंबर 54 रकबा 2.72 हैक्टेयर की बारीकी से जाँच कराई!जाँच के लिए विधिवित दो -दो अलग अलग दल बनाकर भूमि का सीमांकन
15 अक्टूबर 2025 को कराया गया!जाँच दल ने सीमांकन मै पाया कि उक्त भूमि जो सैनिक छावनी के नाम दर्ज है उस पर अवैध कब्जा होना पाया!जाँच दल जाँच प्रतिवेदन बनाकर तहसीलदार को सौपा!स्लीमनाबाद तहसीलदार ने 27 अक्टूबर को मुस्लिम समुदाय को उक्त भूमि से कब्जा हटाने का आदेश पारित किया!जिसके बाद मुस्लिम समुदाय ने तहसीलदार के आदेश को एसडीएम कोर्ट मै अपील की!
एसडीएम कोर्ट ने भी मुस्लिम समुदाय के द्वारा की गईं अपील को ख़ारिज करते स्लीमनाबाद तहसीलदार के आदेश को यथावत रखा!जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के द्वारा
सिविल कोर्ट ओर हाईकोर्ट की शरण ली गईं!जहाँ से उनको तगड़ा झटका लगा है!हाईकोर्ट के द्वारा मुस्लिम समुदाय की रिट याचिका ख़ारिज होने के बाद हिन्दू समुदाय के लोगो नें इसे न्याय की जीत बतलाई!

 

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