निराला जी बहुमुखी प्रतिभा के थे धनी, हिंदी साहित्य के थे छायावाद

सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद – स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय स्लीमनाबाद मै सुर्यकान्त त्रिपाठी निराला की जयंती बसंत पंचमी के अवसर पर मनाई गईं!
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की पूजा अर्चना व सूर्य कांत त्रिपाठी निराला के छाया चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया!कार्यक्रम को संबोधित करते हुये प्राचार्या डॉ सरिता पांडेय ने कहा कि सूर्य कांत त्रिपाठी निराला हिंदी साहित्य में छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक, विद्रोही और क्रांतिकारी कवि, उपन्यासकार व निबंधकार थे।निराला ने छंद मुक्त कविता की शुरुआत की। उनका जीवन भीषण संघर्षों और दुखों से भरा रहा, जो उनकी रचनाओं में करुणा और विद्रोह बनकर उभरा। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म वसंत पंचमी के दिन महिषादल, बंगाल में हुआ था। उन्होंने महिषादल हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की, लेकिन पारंपरिक शिक्षा पद्धति में उनकी रुचि नहीं थी। बाद में उन्होंने बंगाली माध्यम से शिक्षा प्राप्त की।निराला जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे एक विद्रोही कवि माने जाते हैं, जिन्होंने सामाजिक अन्याय और शोषण के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने हिंदी कविता को बंगाली के प्रभाव से मुक्त कर उसे नया आयाम दिया। उनकी भाषा तत्सम प्रधान (हिंदी) से लेकर आम बोलचाल (भिक्षुक) तक विस्तृत थी। निराला जी की प्रमुख काव्य कृतियाँ -परिमल, गीतिका, अनामिका, तुलसीदास, कुकुर मुत्ता,बेला, अर्चना, आराधना, गीताकुंज आदि ।निराला ने कविता के अतिरिक्त कहानियाँ और उपन्यास भी लिखे। उनके उपन्यासों में बिल्लेसुर बकरिहा विशेष चर्चित हुआ। उनका संपूर्ण साहित्य निराला रचनावली के आठ खंडों में प्रकाशित हो चुका है।इस दौरान डॉ किरण खरादी,डॉ प्रीत नेगी, डॉ प्रीति यादव, डॉ भारती यादव सहित महाविद्यालय स्टॉफ व छात्र -छात्राओं की उपस्थिति रही!
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