पंच-सरपंचों से मिले सुझावों को केंद्र और राज्य तक तक पहुंचाया जाएगा,श्रीमती वाल्मीकि

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जबलपुर,विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (वीबी-जी राम जी) योजना के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देने बुधवार को मानस भवन में जिला स्तरीय पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में राज्यसभा सदस्य  सुमित्रा वाल्मीकि, विधायक  अजय विश्नोई, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  विवेक पटेल, जिला पंचायत के सदस्य, ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं पंच तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक गहलोत उपस्थित रहे।सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यसभा सदस्य  सुमित्रा वाल्मीकि ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में पहले की तुलना काफी परिवर्तन आया है। पिछले लगभग 12 वर्षों में गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। गांवों के विकास में और गति आये इसके लिये केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना को लागू किया है। श्रीमती वाल्मीकि ने योजना के प्रावधानों की जानकारी देने पंच-सरपंच सम्मेलन के आयोजन को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि सम्मेलन में पंच-सरपंचों से मिले सुझावों को केंद्र और राज्य तक तक पहुंचाया जाएगा।राज्य सभा सदस्य ने कहा कि योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार के साथ-साथ जल संरक्षण, तालाब संरक्षण, सड़क तथा अन्य कार्यों में रोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना में रोजगार के दिनों में वृद्धि की गई है तथा मजदूरी का भुगतान सीधे हितग्राहियों के खातों में किए जाने पर जोर दिया गया है।विधायक  अजय विश्नोई ने कहा कि विकसित भारत तभी बनेगा, जब हमारी पंचायतें विकसित होंगी। इसी उद्देश्य को लेकर ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना लागू की गई है। उन्होंने पंच-सरपंच सम्मेलन में आये पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायत के विकास के लिए सभी को आज से ही काम शुरू करने की आवश्यकता है। श्री विश्नोई ने कहा कि पंचायत के सरपंच का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी गांव और पंचायत में ही रहना है। इसलिए पंचायत को स्वस्थ, स्वच्छ और खुशहाल बनाने तथा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की सोच के साथ कार्य करना चाहिए।श्री विश्नोई ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में लागू 10 कार्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि पंचायतों को अपनी आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों का चयन करना चाहिए। उन्होंने कंटूर ट्रेंच एवं बोल्डर चेक डैम, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, कूप जल भरण, बोरवेल एवं हैंडपंप के सामने सोक पिट, बगिया निर्माण, हरित परियोजना, वन विभाग की नर्सरी में कार्य, पशु शेड तथा सुगम संपर्कता एवं सड़क निर्माण से संबंधित प्रावधानों को समझाया। श्री विश्नोई ने रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग में पानी की निकासी और सोक पिट बनाते समय मच्छर एवं बीमारी की संभावना से बचाव का ध्यान रखने की बात कही।विधायक  विश्नोई ने बताया कि आजीविका मिशन से जुड़े ऐसे लोग, जिन्होंने पशुपालन के लिए समूह के रूप में ऋण लिया है, उनके लिए पशु शेड की व्यवस्था इस योजना में की जा सकती है। उन्होंने सुगम संपर्कता के संबंध में स्पष्ट किया कि 100 से अधिक आबादी वाले मोहल्ले या बसाहट को मुख्य सड़क से जोड़ने का कार्य किया जा सकता है। श्री विश्नोई ने केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश सरकार, जिला और ग्राम पंचायत सभी का उद्देश्य विकास, स्वच्छता, रोजगार, स्वास्थ्य और खुशहाली सुनिश्चित करना है। योजना का पंचायत स्तर पर बेहतर उपयोग किया जाए। उन्होंने आयोजन के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया।जिला पंचायत उपाध्यक्ष  पटेल ने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना में जल सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं और आजीविका से संबंधित कार्यों को शामिल किया गया है। श्री पटेल ने सरपंचों से अपनी-अपनी पंचायतों की आवश्यकताओं को चिन्हित कर योजना का लाभ लेने और पंचायतों के विकास के लिए कार्य करने का आग्रह किया।

125 दिन तक की जा सकती है रोजगार की अवधि

जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ में आए प्रमुख परिवर्तनों तथा मनरेगा से इसके अंतर के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण देना है । उन्होंने बताया कि योजना के तहत रोजगार की अवधि अधिकतम 125 दिन तक की जा सकती है। आईटी और एआई टूल्स के माध्यम से मनरेगा में आने वाली कमियों और लूपहोल्स को समाप्त करने का उद्देश्य रखा गया है।जिला पंचायत के सीईओ ने बताया कि भारत सरकार के परिपत्र के अनुसार कुल 318 प्रकार के कार्य हैं, जिन्हें चार अलग-अलग घटकों में शामिल किया गया है। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में 10 कार्यों की सूची को अनुमति दी गई है। योजना अब लक्ष्य-आधारित के स्थान पर डिमांड-ओरिएंटेड हो गई है। अर्थात जितनी मजदूरों की मांग होगी, उसके आधार पर ग्राम पंचायतें अपना प्लान तैयार करेंगी। साथ ही कृषि कार्यों के समय मजदूरों की आवश्यकता को देखते हुए मध्यप्रदेश में उन अवधियों के लिए मनरेगा के कार्यों को रोकने की व्यवस्था की गई है, ताकि कृषि कार्यों के लिए मजदूरों की कमी न हो।श्री गहलोत ने 16वें वित्त आयोग के परफॉर्मेंस ग्रांट के संबंध में बताया कि यदि किसी पंचायत को एक वर्ष में 1 लाख रुपये मिलना है, तो उसका 20 प्रतिशत यानी 20 हजार रुपये परफॉर्मेंस ग्रांट माना जाएगा। यह राशि पंचायत के आत्मनिर्भर होने पर मिलेगी। आत्मनिर्भरता के लिए पंचायत में रहने वाले समग्र परिवारों की संख्या के आधार पर प्रति परिवार न्यूनतम 1200 रुपये वार्षिक टैक्स कलेक्शन आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 100 परिवार होने पर एक वर्ष में कम से कम 1 लाख 20 हजार रुपये का टैक्सेशन करना होगा।जिला पंचायत के सीईओ ने कहा कि टैक्सेशन की रिपोर्ट तभी मान्य होगी, जब वह पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन टैक्सेशन के दायरे में आए। संपत्ति कर, जल कर, स्वच्छता कर, प्रकाश कर अथवा अन्य किसी भी प्रकार के टैक्स को पंचायत दर्पण पोर्टल के सिटीजन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन कलेक्ट करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं की आय के स्रोत विकसित करना आवश्यक हैश्री गहलोत ने कहा कि 73वें और 74वें संशोधन के बाद स्थानीय निकायों और पंचायतों को मजबूत करने का उद्देश्य है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार के रूप में पंचायतें भी शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने विकसित भारत-जी रामजी योजना, पंचायत दर्पण और ई-ग्राम स्वराज जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही।सम्मेलन की शुरुआत में राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईआरडी) के फैकल्टी मेंबर त्रिलोक सिंह ने पीपीटी के माध्यम से विकसित भारत जी-राम-जी योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मनरेगा के नए स्वरूप में लागू इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ कुशल श्रम, स्वरोजगार, ग्रामीण अधोसंरचना, महिलाओं की भागीदारी और सतत विकास को बढ़ावा देना है। योजना को पीएम गतिशक्ति से भी जोड़ा गया है।श्री सिंह ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से लागू इस योजना में ग्रामीण परिवारों को एक वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार किया जाएगा। योजना के कार्यों को जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका और आपदा प्रबंधन की चार श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 318 प्रकार के कार्य शामिल हैं। योजना में अधिकतम 60 दिनों का विराम, 15 दिवस में मजदूरी का भुगतान, तीन वर्ष के वैध रोजगार गारंटी कार्ड, बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल निगरानी, एआई तकनीक और डीबीटी से भुगतान का प्रावधान है। कार्यों का प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण होगा तथा शिकायतों के निराकरण के लिए लोकपाल की व्यवस्था रहेगी।सम्मेलन में सरपंचों एवं पंचों की योजना से संबंधित जिज्ञासा का समाधान किया गया। सम्मेलन का संचालन जिला समन्वयक अरुण सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी पी एल यादव ने किया।

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