सिहोरा में स्वच्छता अभियान को मुँह चिड़ा रही शौचालयों की गंदगी

जबलपुर/सिहोरा :शौचालयों की समय -समय पर सफाई न होने के कारण शौचालयों की गंदगी अब स्वच्छता अभियान को मुँह चिड़ा रही है,गौरतलब है कि पिछले एक दशक में स्वच्छ भारत मिशन जनांदोलन और विकास का प्रतीक बना है, लेकिन बस स्टैंड, सरकारी कार्यालयो, बाज़ारों, पार्कों और राजमार्गों के अधिकांश सरकारी शौचालय इस दावे की सबसे कड़वी सच्चाई हैं। वहाँ प्रवेश करते ही पहले नाक, फिर आँखें बंद करनी पड़ती हैं। यह केवल दुर्गंध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता है जिसने शौचालय बनाना उपलब्धि माना, पर उन्हें स्वच्छ रखना जिम्मेदारी नहीं समझा। स्वच्छ भारत अभियान की असली परीक्षा सार्वजनिक शौचालयों में होती है, और सबसे बड़ी विफलता भी वहीं दिखाई देती है।
दुर्दशा के शिकार सार्वजनिक शौचालय
नगर पालिका रोड पर स्थित पुराने बस स्टेंड के पास बने सार्वजनिक शौचालय की हालत इन दिनों बेहद खराब हो चुके है। शौचालय के अंदर चारों तरफ गंदगी फैली हुई है और कूड़ा-करकट जमा होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।शौचालय के अंदर की स्थिति ऐसी हो गई है कि वहां जाना भी मुश्किल हो गया है। जगह-जगह कूड़ा पड़ा है और साफ-सफाई का कोई इंतजाम दिखाई नहीं देता। इससे आसपास के लोगों और राहगीरों में नाराजगी देखी जा रही है।लोगों ने इसे गंदगी का डंपिग प्वाइंट बना कर रख दिया है। लोगों का कहना है कि नगर पालिका ने शौचालय के निर्माण पर लाखों रूपये खर्च किए गए थे लेकिन नगर पालिका का सफाई की तरफ कोई ध्यान नही है। जबकि बगल में नगर पालिका का गैरिज से चन्द कदम की दुरी पर नगर पालिका जनपद तहसील कार्यालय के अलावा पुराने बस स्टैंड के नजदीक है।
झाड़ियों में गुम तहसील कार्यालय का शौचालय
प्रतिदिन सरकारी काम के सिलसिले में सैकड़ों लोगों का तहसील के दुरदराज क्षेत्रो से तहसील कार्यालय आना होता है लेकिन तहसील कार्यालय का शौचालय झाड़ियों में गुम होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा नगर में संचालित तमाम शैक्षणिक संस्था के शौचालय भी स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोल रहे है
शौचालय बनाकर,भूल गया सिस्टम
शौचालय बनते हैं, फीते कटते हैं, तस्वीरें खिंचती हैं, रिपोर्टें बनती हैं और फिर रखरखाव के अभाव में वे धीरे-धीरे गंदगी के हवाले कर दिए जाते हैं। नगर के सार्वजनिक स्थलो के अधिकांश सार्वजनिक शौचालय भी पानी, नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कई जर्जर हो चुके हैं और प्रशासनिक उदासीनता के कारण सरकारी दफ्तरों के शोचालय भी उपयोग योग्य नहीं बचे।
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