चुनाव,शादी और बच्चा पैदा करने के लिए लिए मिल जाती है जमानत तो फिर आसाराम बापू को इलाज और वृद्ध और बीमार पत्नी से मिलने के लिए राहत क्यों नहीं?

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More than 13 years in jail, serious illness, blood transfusion, wife in the intensive care unit of the hospital, yet Asaram Bapu is in jail today.

एक हिन्दू संत 13 साल से ज्यादा जेल में हैं जबकि उनको गंभीर बीमारी है इस दौरान उन्हें खून चढ़ाया गया आज उनकी पत्नी अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में हैं फिर भी आसाराम बापू आज जेल में हैं,आसाराम बापू के मामले में आज कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।बापू के समर्थकों का कहना है की उन्हें 20 दिन की पैरोल मिली, फिर भी आज तक जेल से बाहर नहीं आ पाए।समर्थकों के बीच सोशल मीडिया में एक बार फिर बहस छिड़ गई है, समर्थकों की मानें तो 3 अगस्त 2026 को राजस्थान उच्च न्यायालय ने आसाराम बापू को 20 दिन की पैरोल मंजूर की थी। उस समय वे 13 साल से ज्यादा समय से जेल में थे।अदालत ने उनकी उम्र, लंबे समय से जेल में रहने और पहले मिली राहत के दौरान उनके व्यवहार सहित कई बातों को ध्यान में रखा।लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजस्थान उच्च न्यायालय से पैरोल मंजूर होने के बावजूद आसाराम बापू जेल से बाहर नहीं आ पाए। वे आज भी जेल में हैं।अदालत ने यह भी कहा था कि 20 दिन की पैरोल उनकी वास्तविक रिहाई के दिन से शुरू होगी।फिर भी दूसरी जेल में चल रहे मामले और उससे जुड़ी कानूनी तथा प्रशासनिक अड़चनों के कारण उन्हें उस पैरोल का लाभ नहीं मिल सका।

यानी स्थिति यह रही

अदालत ने पैरोल मंजूर की → लेकिन आसाराम बापू बाहर नहीं आ पाए → और आज भी जेल में हैं।सवाल यह है कि जब उच्च न्यायालय ने पैरोल मंजूर कर दी थी, तो उसका वास्तविक लाभ एक वृद्ध व्यक्ति को क्यों नहीं मिल पाया?गंभीर बीमारी के बावजूद इलाज के लिए बाहर आने की राहत नहीं 2026 में आसाराम बापू की तबीयत को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी गंभीर बातें रखी गईं।उनके पक्ष से बताया गया कि उन्हें शरीर के अंदर रक्तस्राव हुआ, अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और खून चढ़ाना पड़ा।अदालत ने तत्काल जेल से बाहर इलाज कराने की अनुमति नहीं दी, लेकिन जेल में उनकी देखभाल के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति रखने की अनुमति दी।यह सही है कि अदालत ने उनकी चिकित्सा संबंधी जरूरतों पर विचार किया।लेकिन सवाल फिर भी है,क्या जेल में इलाज मिल जाना और एक बहुत वृद्ध व्यक्ति को कुछ समय के लिए बेहतर इलाज तथा मानवीय आधार पर बाहर आने देना एक ही बात है?

पत्नी गहन चिकित्सा कक्ष में, फिर भी 20 दिन की राहत नहीं

30 सितंबर 2026 को गुजरात उच्च न्यायालय में आसाराम बापू ने अपनी पत्नी से मिलने के लिए 20 दिन की अस्थायी जमानत मांगी।बचाव पक्ष ने बताया कि उनकी पत्नी अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं और उनके हृदय की स्थिति गंभीर है।सुनवाई की उपलब्ध रिकॉर्डिंग में एक टिप्पणी भी सुनाई देती है: “85 साल की उम्र में वे क्या बात करेंगे?”यह बात उस समय कही गई जब आसाराम बापू की पत्नी के अस्पताल में भर्ती होने और पति-पत्नी के मिलने की जरूरत पर चर्चा हो रही थी।अदालत ने अस्थायी जमानत नहीं दी और वीडियो के माध्यम से बात करने का विकल्प दिया।

अब दूसरे मामलों पर भी नजर डालिए,किसी को शादी में जाने के लिए जमानत

सितंबर 2026 में शरजील इमाम को अपने दो चचेरे भाइयों की शादी में शामिल होने के लिए 7 दिन की अस्थायी जमानत मिली।सवाल उठता है की जब शादी में शामिल होने के लिए कुछ दिनों की राहत दी जा सकती है, तो गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती पत्नी से मिलने के लिए मानवीय आधार पर राहत की सीमा क्या होनी चाहिए?

किसी को बच्चा पैदा होने के समय जमानत

निदा खान को गर्भावस्था के दौरान जमानत दी गई। अदालत ने गर्भ में पल रहे बच्चे के हित और जेल में बच्चे के जन्म से जुड़ी परेशानियों को ध्यान में रखा।सवाल फिर वही है अगर अजन्मे बच्चे के हित को मानवीय आधार माना जा सकता है, तो गंभीर रूप से बीमार पत्नी से मिलने की इच्छा को कितना महत्व मिलना चाहिए?

किसी को चुनाव लड़ने के लिए अस्थायी जमानत

सितंबर 2026 में नंदीग्राम से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चुनाव में भाग लेने के लिए कुछ समय की अस्थायी जमानत दी गई।अगर चुनाव लड़ने के लिए सीमित समय की राहत दी जा सकती है, तो गंभीर बीमारी और परिवार की आपात स्थिति में राहत की कसौटी कितनी कठोर होनी चाहिए?

जगतार सिंह जोहल को लंबी जेल के बाद जमानत

18 सितंबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने जगतार सिंह जोहल को सात मामलों में जमानत दी।वे 8 साल से ज्यादा समय से जेल में थे और मुकदमे की सुनवाई बहुत धीमी गति से चल रही थी। अदालत ने लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे में हो रही देरी को महत्वपूर्ण माना।

रामपाल को 11 साल से ज्यादा जेल के बाद जमानत

अप्रैल 2026 में रामपाल को 11 साल से ज्यादा समय जेल में रहने के बाद जमानत मिली।अदालत के सामने उनकी लंबी कैद, अधिक उम्र और मुकदमे में हुई देरी जैसे मुद्दे थे।

राम रहीम को भी कई बार अस्थायी रिहाई मिली

गुरमीत राम रहीम को 2026 में भी पैरोल और जेल से कुछ समय की रिहाई मिली।उनकी रिहाई के नियम और मामला अलग हैं।लेकिन आम लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है,जब दूसरे दोषसिद्ध लोगों को भी अलग-अलग परिस्थितियों में कुछ समय के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिल सकती है, तो आसाराम बापू की उम्र, बीमारी और पारिवारिक परिस्थिति को किस कसौटी पर देखा जा रहा है? आसाराम बापू का मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है यह बात बहुत महत्वपूर्ण है।

सह-आरोपी शरद और शिल्पी बरी 

राजस्थान उच्च न्यायालय ने मई 2026 में उनकी मुख्य बलात्कार की सजा और उम्रकैद को बरकरार रखा था।लेकिन उसी फैसले में उन्हें सामूहिक बलात्कार और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी किया गया। साथ ही सह-आरोपी शरद और शिल्पी को भी बरी किया गया।इसके बाद आसाराम बापू ने राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।जून 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार को नोटिस भी जारी किया।इसका मतलब है कि मामला अभी अंतिम रूप से खत्म नहीं हुआ है।अंतिम फैसला सर्वोच्च न्यायालय को करना है।क्या सजा बरकरार रहेगी?क्या गवाहियों और दूसरे सबूतों की दोबारा जांच के बाद कोई अलग निष्कर्ष आएगा?अभी इसका जवाब नहीं दिया जा सकता।

लड़की और उसके माता-पिता के बयानों में अंतर का सवाल

आसाराम बापू के समर्थकों की ओर से लंबे समय से कहा जाता रहा है कि लड़की और उसके माता-पिता के बयानों में कई जगह अंतर है।इन बयानों में जो भी अंतर बताए जा रहे हैं, उनका कानूनी महत्व क्या है, यह सर्वोच्च न्यायालय पूरे मामले के सबूत और रिकॉर्ड को देखकर तय करेगा।लेकिन यह सवाल जरूर उठता है क्या सर्वोच्च न्यायालय इन सभी कथित विरोधाभासों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए सवालों की पूरी तरह से दोबारा जांच करेगा?यदि सर्वोच्च न्यायालय को सबूतों में ऐसी कमी दिखाई देती है जो सजा को प्रभावित करती है, तो कानून के अनुसार वह सजा को बदल भी सकता है या समाप्त भी कर सकता है।इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले का अंतिम फैसला हो चुका है।

आसाराम बापू का अंतिम न्यायिक अध्याय अभी बाकी है।

आखिर सवाल क्या है? सवाल यह नहीं है कि किसी दोषसिद्ध व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के छोड़ दिया जाए।सवाल यह है कि 13 साल से ज्यादा की जेल बहुत अधिक उम्र,गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं,शरीर के अंदर रक्तस्राव और खून चढ़ाया जाना,गंभीर रूप से बीमार पत्नी का अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में होना,राजस्थान उच्च न्यायालय से 20 दिन की पैरोल मंजूर होना, लेकिन फिर भी जेल से बाहर न आ पाना और सर्वोच्च न्यायालय में मामला अभी लंबित होना इन सभी बातों को देखते हुए क्या इलाज और मानवीय आधार पर कुछ समय की राहत का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सकता? दूसरे मामलों में शादी, गर्भावस्था, चुनाव, लंबी जेल और दूसरी मानवीय परिस्थितियों में अदालतों ने अलग-अलग तरह की राहत दी है।हर मामला अलग है, लेकिन न्याय की कसौटी साफ और समान दिखाई देनी चाहिए।आसाराम बापू के मामले में भी सवाल यही है: क्या उनकी उम्र, बीमारी और परिवार की गंभीर परिस्थिति को देखते हुए उन्हें कम से कम इलाज और अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए मानवीय आधार पर सीमित राहत मिलनी चाहिए? समर्थको का कहना है की इस सवाल का अंतिम जवाब अदालत देगी। लेकिन सवाल पूछना बंद नहीं होना चाहिए।

 

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