नेशनल लोक अदालत,आपसी समझौते से फिर जुड़े दाम्पत्य रिश्ते

जबलपुर,जिला न्यायालय जबलपुर में 12 सितम्बर को आयोजित नेशनल लोक अदालत में आपसी समझाइश, संवाद और पारिवारिक सहयोग के माध्यम से वैवाहिक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करते हुए अलग रह रहे दो दंपत्तियों ने पुनः साथ रहने का निर्णय लिया।

इस अवसर पर बिखरे हुए रिश्ते फिर से जुड़ने से दोनों परिवारों में खुशी का वातावरण रहा।नेशनल लोक अदालत में एमजेसीआर में आवेदिका श्रीमती धंतीबाई, पति जितेन्द्र, निवासी जिला जबलपुर द्वारा अपने वैवाहिक विवाद के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। प्रकरण में अनावेदक के रूप में उनके पति जितेन्द्र उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश श्रीमती रेणू खेस द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। आपसी संवाद और पारिवारिक सहयोग से पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेद दूर हुए।चर्चा के दौरान दोनों ने पुराने विवादों को भुलाकर पुनः साथ रहने की इच्छा व्यक्त की। पति ने अपनी पत्नी धंतीबाई को सम्मानपूर्वक अपने साथ वैवाहिक गृह ले जाने की सहमति दी, वहीं आवेदिका ने भी अपनी स्वेच्छा से पति के साथ दाम्पत्य जीवन पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया।आपसी सहमति और विश्वास के साथ हुए इस समझौते से दोनों परिवारों में खुशी का वातावरण निर्मित हुआ।

पक्षकारों ने भविष्य में प्रेम, सम्मान और सौहार्द के साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया। इस प्रकार आपसी राजीनामे और समझौते के आधार पर प्रकरण का सौहार्दपूर्ण निराकरण किया गया।इसी प्रकार आज 12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत में एक अन्य वैवाहिक विवाद का भी सुखद समाधान हुआ। जिला न्यायालय जबलपुर में पिछले लगभग 6 वर्ष से अलग रह रहे पति सोहन एवं पत्नी प्रीति ने आपसी मनमुटाव भुलाकर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवाद के कारण दोनों के दाम्पत्य जीवन में गतिरोध उत्पन्न हो गया था, लेकिन न्यायालय द्वारा दी गई समझाइश, पारिवारिक सहयोग और आपसी संवाद के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के बीच पुनः विश्वास एवं स्नेह का वातावरण निर्मित हुआ।इसके उपरांत पति-पत्नी ने न्यायालय कक्ष में एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर साथ रहने, एक-दूसरे का सम्मान करने तथा सुख-दुःख में साथ निभाने का संकल्प लिया। इस भावुक और सुखद क्षण के साक्षी न्यायाधीश श्रीमती दीपा पॉल, दोनों पक्षों के परिजन, अधिवक्तागण एवं न्यायालयीन स्टाफ रहे। पति-पत्नी के पुनर्मिलन से न्यायालय परिसर में उपस्थित सभी लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे और नेशनल लोक अदालत का उद्देश्य आपसी समझौते एवं सौहार्द के माध्यम से विवादों का समाधान सार्थक होता दिखाई दिया।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में नेशनल लोक अदालत में 10,264 प्रकरणों का निराकरण
‘‘न्याय सबके लिए’’ की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्र के मार्गदर्शन में शनिवार 12 सितंबर को जिला न्यायालय जबलपुर, तहसील न्यायालय सिहोरा एवं पाटन तथा कुटुम्ब न्यायालय एवं श्रम न्यायालय जबलपुर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के अनुसार नेशनल लोक अदालत में कुल 10,264 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 65 करोड़ 67 लाख 64 हजार 222 रुपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया। प्रकरणों के निराकरण के लिए कुल 77 खंडपीठों का गठन किया गया था। लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित 3,480 प्रकरणों एवं 6,784 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया।लोक अदालत में आपराधिक शमनीय प्रकृति के 494 प्रकरण, धारा 138 एन.आई. एक्ट के 316 प्रकरण, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा के 1,173 प्रकरण, सिविल मामलों के 44 प्रकरण, विवाह संबंधी 98 प्रकरण, विद्युत अधिनियम के अंतर्गत 160 प्रकरण तथा अन्य प्रकृति के 61 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया।नेशनल लोक अदालत में धारा 138 एन.आई. एक्ट के प्रकरणों में कुल 6 करोड़ 54 लाख 38 हजार 736 रुपये की समझौता राशि के निर्णय किए गए। मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा के प्रकरणों में 43 करोड़ 69 लाख 39 हजार 519 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई। विद्युत न्यायालयों में लंबित 160 प्रकरणों में 28 लाख 39 हजार 19 रुपये की राशि की वसूली हुई। इसी प्रकार ट्रैफिक चालान के 767 प्रकरणों में 1 लाख 98 हजार 800 रुपये की राशि वसूल की गई। बैंक संबंधी मामलों में बैंक रिकवरी के 296 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों के निराकरण के पश्चात 20,807 रुपये की समझौता राशि लोक अदालत में प्राप्त हुई।नेशनल लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य समझौते के माध्यम से पक्षकारों के मामलों का निराकरण करना था, जिससे आमजन को सुलभ, शीघ्र एवं निःशुल्क न्याय प्राप्त हो सके।
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