जबलपुर के नए सीएमएचओ को कार्यवाही के लिए शिकायत का इंतजार

जबलपुर:जिले के ग्रामीण क्षेत्र सिहोरा में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल फैला हुआ है,इतना ही नहीं लोगों का कहना है की कई पैथोलॉजी बिना रजिस्ट्रेशन के नियम विरुद्ध चल रहीं हैं, तो वहीँ क्षेत्र में यह भी चर्चा है की एक ऐसी फिजियोथेरेपी है जो एक ही रजिस्ट्रेशन से दो जगह चल रही है,इन सभी को लेकर जबलपुर के जब नए सीएमएचओ डॉक्टर नवीन कोठारी से दूरभाष में बात की गई तो उन्होंने साफ तौर पर कहा की आप लिखित शिकायत दे दो हम जांच करवा लेते हैं।
स्वास्थ विभाग को शिकायत का इंतजार
सिहोरा में नगर सहित उपनगर में झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें धड़ल्ले से चल रहीं हैं,नाम न बताने की शर्त पर लोगों ने बताया की अधिकांश पैथोलॉजी बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित की जा रहीं हैं,
कितनी पैथोलॉजी के पास रजिस्ट्रेशन ?
नियमों की मानें तो पैथोलॉजी संचालित करने के लिए गुमास्ता लायसेंस ,पालुसन सहित रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होता है, लेकिन सिहोरा में अधिकांश पैथोलॉजी सेंटर ऐसे ही चल रही है,इनके पास न तो गुमास्ता लायसेंस है न ही पालुसन न ही रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट,नगर के जिम्मेदार नागरिकों ने इन पैथोलॉजी सेंटरों की जल्द से जल्द जांच करते हुए कार्यवाही की मांग की है,क्योंकि ज्यादातर डॉक्टर पैथोलॉजी से मिली रिपोर्ट के आधार पर इलाज करते हैं,
झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़
बताया जा रहा है की सिहोरा तहसील क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है, इतना ही नहीँ यहाँ पर कई तो बंगाल से आकर अपनी -अपनी दुकानें जमा चुके हैं जिनमे कोई ढाली तो मजूमदार है,इनमे से कोई अपने आपको होम्योपैथिक बताता तो कोई आयुर्वेदिक तो कोई यूनानी पद्धति बताते हैं ,लेकिन इनके पास एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की कोई डिग्री नहीँ है, लेकिन इलाज ये एलोपैथिक पद्धति से ही करते है।
स्वास्थ्य विभाग मेहरवान
वहीँ चर्चा है की खितौला रेलवे फ़ाटक के समीप बंगाल के दो डॉक्टर अपनी -अपनी जड़ जमा चुके हैं, और नियम विरुद्ध मरीजों का अंग्रेजी दवाइयों से इलाज करते हुए इंजेक्शन और बॉटल भी लगाते है,एक तो जलंदर भंगदर बबासीर का खुलेआम बोर्ड लगाकर सर्जन बनकर इलाज कर रहा है,करे भी क्यों न क्योंकि एक बार स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन्हीं अवैध गतिविधियों के चलते इनकी क्लिनिक सील कर दी गई थी उसके तीन चार माह बाद फिर से इनकी दुकान को बहाल कर दिया गया ,जबकि ये कोई सर्जन नहीँ हैं उसके बावजूद भी ये बबासीर जलंधर भगन्दर का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं?क्योंकि इनके ऊपर स्वास्थ्य विभाग मेहरवान है,तब तो इनके पास एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की कोई डिग्री नहीँ है, उसके बावजूद इलाज ये एलोपैथिक पद्धति से ही कर रहे हैं।
इनका कहना है, इस बारे में आप लिखित में कंप्लेंट आप दे दीजिए उसके आधार पर सीबीएमओ से जांच करवा ली जाएगी
सी एम एच ओ जबलपुर नवीन कोठारी
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