सांसदों की सिहोरा से दूरी के क्रम को तोड़ न सके सांसद आशीष दुबे 

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जबलपुर/सिहोरा।चुनाव जीतने के बाद कोई विरला नेता ही होता है जो जनता से किये गए वादों को पूरा करने जनता के बीच आता जाता रहता है,हलाकि आजकल की राजनीति में चुनावी वादे और कसमें जल्दी पूरी हो जाये तो कहना ही क्या,वैसे तो इनके दो साल पूरे हो गए हैं आमजनों का कहना है की इन दो सालों में इनके द्वारा सिहोरा क्षेत्र के जनमानस की उतनी उम्मीदें पूरी नहीँ की गई जैसे कि सिहोरा को जिला बनाने, बड़े विकास कार्यों को गति देने और क्षेत्र की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने को लेकर जनता की उम्मीदें अभी भी कायम हैं।

सांसद आशीष दुबे के दो वर्ष के कार्यकाल

जबलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने जाने के बाद आशीष दुबे के कार्यकाल के दो वर्ष जून 2026 में पूर्ण हो चुके हैं। इस दौरान सिहोरा एवं आसपास के क्षेत्र में सांसद की सक्रियता को लेकर आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं बुद्धिजीवियों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पूर्व की तुलना में सिहोरा और सांसद के बीच की दूरी कुछ हद तक कम अवश्य हुई है, लेकिन क्षेत्र की विकास संबंधी अपेक्षाओं के अनुरूप कोई व्यापक और स्पष्ट विकास रोडमैप अभी तक सामने नहीं आ सका है। सिहोरा क्षेत्र लंबे समय से जिला सहित आधारभूत सुविधाओं, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की मांग करता रहा है। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि सांसद द्वारा क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक विकास दृष्टि सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत की जाएगी।
सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग यहां के नागरिकों की सबसे प्रमुख और पुरानी मांगों में शामिल रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस विषय पर सांसद की ओर से अब तक ऐसा कोई प्रभावी सार्वजनिक प्रयास या पहल दिखाई नहीं दी, जिससे यह संकेत मिले कि जिला निर्माण की मांग को लेकर कोई ठोस रणनीति बनाई जा रही है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर लोगों के मन में अभी भी अनेक प्रश्न बने हुए हैं।
हालांकि केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सिहोरा क्षेत्र को भी देश के अन्य क्षेत्रों की तरह प्राप्त हुआ है, किंतु स्थानीय लोग इसे सांसद की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखते। उनका मानना है कि सांसद के दो वर्ष के कार्यकाल में दो ट्रेनों के सिहोरा स्टेशन में ठहराव के अलावा कोई ऐसी विशेष परियोजना या उपलब्धि क्षेत्र को नहीं मिली, जिसे सिहोरा की पहचान से जोड़कर लंबे समय तक याद रखा जा सके।क्षेत्र के बुद्धिजीवियों का मत है कि सांसद को सिहोरा एवं आसपास के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, किसानों और युवाओं के साथ संवाद स्थापित कर क्षेत्र के विकास का एक समग्र रोडमैप तैयार करना चाहिए। उनका मानना है कि शेष बचे तीन वर्षों में यदि प्राथमिकताओं को निर्धारित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो सिहोरा क्षेत्र विकास की नई दिशा प्राप्त कर सकता है।

आने वाले तीन सालों में नजर 

फिलहाल सांसद के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर जहां कुछ उपलब्धियों को लेकर संतोष व्यक्त किया जा रहा है, वहीं सिहोरा को जिला बनाने, बड़े विकास कार्यों को गति देने और क्षेत्र की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने को लेकर जनता की उम्मीदें अभी भी कायम हैं। आने वाले तीन वर्षों में इन अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरा जाता है, इस पर क्षेत्र की जनता की नजर बनी रहेगी।

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