मंडी बनी मुद्दत का अड्डा,कब रुकेगा किसानों का शोषण

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जबलपुर /सिहोरा:एक तरफ सरकार किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाकर खेती को लाभ का धंधा बनाने का दिव्य स्वप्न देख रही है वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक लचर व्यवस्था के चलते आए दिन किसान शोषण का शिकार हो रहे है। ऐसा ही एक मामला सिहोरा कृषि उपज मंडी का प्रकाश में आया है।जहां अनाज व्यापारी द्वारा एक किसान से खरीदी उपज के नकद भुगतान के एवज में 700 रुपए कमीशन काट लिया पीड़ित किसान ने अपने साथ हुई ज्यादती की शिकायत मंडी प्रशासन से की गई तो आनन फानन में व्यापारी ने काटी गई राशि का भुगतान कर दिया। मंडी से जुड़े लोगों का कहना है कि काटी गई रकम वापस मिलने पर किसान द्वारा अपनी शिकायत वापस लेने के कारण व्यापारी पर कार्यवाही नहीं होती जिसके चलते किसान बार-बार शोषण का शिकार हो रहा है।
*क्या है मामला*
पीड़ित किसान चंद्रमनी निवासी सनकुई तहसील ढीमरखेड़ा ने बताया कि वह 33 क्विंटल गेहूं शुक्रवार को कृषि उपज मंडी सिहोरा में बेचने लाया था नीलामी बोली में अनाज व्यापारी से 2263 रुपए प्रति क्विंटल बेचने का सौदा तय हुआ बेची उपज की तौल के बाद वह मंडी के भुगतान कक्षा में भुगतान लेने पहुंचा बेची उपज का कुल भुगतान 74352 रुपए बना क्रेता अनाज व्यापारी फर्म ने किसान को नकद भुगतान के एवज में 700 रुपए कमीशन काटकर शेष बची रकम को किसान को थमा दिया खून पसीने की मेहनत से उगाई उपज के दाम में 700 रुपए की कटौती होने से इस बात की शिकायत मंडी प्रशासन को कर दी।
इनका कहना है,
मंडी प्रशासन किसानों की कृषि उपज का शत प्रतिशत भुगतान करने संकल्पित है यदि 5 दोनों के अंदर पूर्ण भुगतान नहीं होता है तो व्यापारी के लाइसेंस निलंबन पर विचार किया जाता है।
सविता धुर्वे
मंडी सचिव
कृषि उपज मंडी सिहोरा

 


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