कटनी में अब “स्कैन करो और सीखो” बनेगा सरकारी स्कूलों की नई पहचान

जबलपुर,सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अब केवल ब्लैकबोर्ड और किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। जबलपुर संभाग के कटनी जिले ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा अभिनव और दूरदर्शी प्रयोग शुरू किया है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन सकता है।इस क्यूआर कोड आधारित डिजिटल शिक्षा के प्रणेता एवं सूत्रधार कलेक्टर कटनी श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) कटनी द्वारा कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए क्यूआर कोड आधारित “स्मार्ट स्टडी सिस्टम” विकसित किया गया है। इस अनूठी पहल के साथ कटनी मध्यप्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां सरकारी स्कूलों में “स्कैन एंड लर्न” मॉडल को संगठित रूप से लागू किया जा रहा है। यह केवल तकनीक का प्रयोग नहीं, बल्कि शिक्षा को आसान, रोचक, आधुनिक और हर बच्चे तक समान रूप से पहुंचाने का एक बड़ा अभियान है।
अब हर चैप्टर बनेगा डिजिटल क्लास रूम :-
नई व्यवस्था के तहत हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के प्रत्येक अध्याय के लिए विशेष क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं। जैसे ही विद्यार्थी स्मार्ट बोर्ड या मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करेंगे, उनके सामने संबंधित अध्याय का वीडियो लेक्चर, सरल व्याख्या और डिजिटल अध्ययन सामग्री खुल जाएगी। यानी अब पढ़ाई केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चे देखकर, सुनकर और समझकर सीख सकेंगे।
ग्रामीण बच्चों के लिए स्थानीय भाषा में तैयार हुए विशेष वीडियो :-
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि जिन अध्यायों के गुणवत्तापूर्ण वीडियो उपलब्ध नहीं थे, उनके लिए डाइट कटनी के विशेषज्ञ शिक्षकों ने स्वयं वीडियो तैयार किए। इन वीडियो को स्थानीय भाषा शैली, सरल उदाहरणों और सहज प्रस्तुति के साथ बनाया गया है, ताकि ग्रामीण और सामान्य पृष्ठभूमि के विद्यार्थी भी कठिन विषयों को आसानी से समझ सकें। यह पहल शिक्षा को “बच्चों की भाषा” में पहुंचाने का सफल प्रयास मानी जा रही है।
अब बंद नहीं रहेंगे स्कूलों के स्मार्ट बोर्ड :-
जिले के 45 शासकीय विद्यालयों और 9 छात्रावासों में लगे 99 स्मार्ट बोर्ड लंबे समय से कंटेंट और प्रशिक्षण के अभाव में प्रभावी उपयोग से वंचित थे। कलेक्टर श्री तिवारी के संज्ञान में यह मामला आने के बाद उनकी सार्थक पहल ने इन निष्क्रिय संसाधनों में नई जान फूंक दी है। अब यही स्मार्ट बोर्ड विद्यार्थियों के लिए डिजिटल ज्ञान का सशक्त माध्यम बनेंगे और सरकारी स्कूलों में वास्तविक “स्मार्ट क्लासरूम” की शुरुआत करेंगे।
शिक्षक न हों तब भी जारी रहेगी पढ़ाई :-
इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि, जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है या किसी कारणवश शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं, वहां भी पढ़ाई नहीं रुकेगी। विद्यार्थी स्वयं क्यूआर कोड स्कैन कर डिजिटल कक्षाएं संचालित कर सकेंगे।यह पहल आत्मनिर्भर अध्ययन और “सेल्फ लर्निंग” संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
मोबाइल अब मनोरंजन नहीं, बनेगा ज्ञान का साथी :-
इस डिजिटल मॉडल का उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों को मोबाइल के सकारात्मक उपयोग के लिए प्रेरित करना भी है। यदि अभिभावक इस पहल से जुड़ते हैं, तो घर-घर में सीखने का वातावरण विकसित होगा और मोबाइल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि ज्ञान और भविष्य निर्माण का साधन बनेगा।
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और नवाचार का शानदार उदाहरण :-
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के नेतृत्व में शुरू हुई यह पहल यह साबित कर रही है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति, तकनीक और नवाचार एक साथ आएं, तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था में भी ऐतिहासिक बदलाव संभव है।कटनी का यह मॉडल आने वाले समय में डिजिटल शिक्षा की नई पहचान बन सकता है, जहां हर बच्चा कहेगा “स्कैन करो… सीखो… और आगे बढ़ो!”कलेक्टर के निर्देश पर इस अभिनव पहल को सफलतापूर्वक लागू करने में राज्य शिक्षा केंद्र के ओआईसी विनोद द्विवेदी, जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरी तथा जिला परियोजना समन्वयक पी एन तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इंडिया पोल खोल को आर्थिक सहायता
प्रदान करने हेतु इस QR कोड को किसी भी UPI ऐप्प से स्कैन करें। अथवा "Donate Now" पर टच/क्लिक करें।
Click Here >>
Donate Now
इंडिया पोल खोल के YouTube Channel को Subscribe करने के लिए इस YouTube आइकन पर टच/Click करें।
इंडिया पोल खोल के WhatsApp Channel को फॉलो करने के लिए इस WhatsApp आइकन पर टच/Click करें।















