कम लागत, कम पानी और कई गुना ज्यादा मुनाफे ने बदली किसान की तकदीर

जबलपुर,जिले की पाटन तहसील के ग्राम मादा निवासी प्रगतिशील किसान कैलाश यादव ने अपनी मेहनत, नवाचार और आधुनिक सोच से खेती को लाभ का सौदा बना दिया है। पारंपरिक फसलों की बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के कारण कैलाश यादव ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में चिया सीड जैसी हाई-वैल्यू नगदी फसल की खेती अपनाई और आज वे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।कभी गेहूं, धान और चने की खेती करने वाले कैलाश यादव को लगातार बढ़ती खाद, पानी और मजदूरी की लागत के कारण अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। ऐसे समय में उन्होंने कुछ नया करने का निर्णय लिया। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने सीमित भूमि पर चिया सीड की खेती शुरू की, जिसने उनकी आर्थिक स्थिति बदल दी।
कम पानी में शानदार उत्पादन :-
कैलाश यादव बताते हैं कि चिया सीड की खेती में बेहद कम पानी की आवश्यकता होती है। जहां पारंपरिक फसलों में 4 से 5 बार सिंचाई करनी पड़ती है, वहीं चिया की फसल केवल 1 से 2 सिंचाई में तैयार हो जाती है। इतना ही नहीं, इस फसल में कीट एवं रोगों का खतरा भी कम रहता है, जिससे महंगे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च बच जाता है। पारंपरिक खेती की तुलना में चिया सीड की खेती में लागत काफी कम और मुनाफा कई गुना अधिक है। कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आवारा पशुओं से भी राहत :-
पाटन की अनुविभागीय अधिकारी कृषि डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने बताया कि चिया सीड की खेती की एक विशेषता यह भी है कि इसके पौधों को आवारा पशु नुकसान नहीं पहुंचाते। इससे किसानों को फसल की रखवाली और सुरक्षा पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता।
बाजार में बढ़ी मांग, किसानों को मिला बेहतर दाम :-
लगभग 110 से 120 दिनों में तैयार होने वाली इस फसल की बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है। स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों के बीच चिया सीड को “सुपरफूड” के रूप में पसंद किया जा रहा है। गुणवत्ता के आधार पर चिया सीड को बाजार में 15 हजार से 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक का मूल्य प्राप्त हो रहा है। कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिलने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने कैलाश यादव :-
कैलाश यादव की सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी अब चिया सीड की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों, नगदी फसलों और कम लागत वाली खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके। किसान पारंपरिक खेती के साथ नई और बाजार आधारित फसलों को अपनाएं, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
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