नेशनल लोक अदालत में 870 प्रकरणों का निराकरण, 2.31 करोड़ से अधिक के समझौते

सिहोरा: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार नेशनल लोक अदालत का आयोजन व्यवहार न्यायालय सिहोरा मे किया गया। माननीय संतोष कुमार कोल जिला न्यायाधीश (तृतीय) सिहोरा के द्वारा मां सरस्वती वंदना कर लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। जिसमें श्री श्याम सुदंर झा जिला न्यायाधीश (प्रथम),श्री अजय उइके न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,श्रीमती खालिदा तनवीर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, ,श्रीमती हिमांशी ठाकुर भारद्वाज न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,श्री विशाल रिछारिया न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,सुश्री दीपशिखा दांगी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एवं अधिवक्ता संघ सिहोरा के अध्यक्ष रविदीप सिंह बैस एवं अधिवक्ता संघ की समस्त कार्यकारणी सदस्य उपस्थित रहे।न्यायालयों में लंबित पारिवारिक विवाद,मोटरयान दुर्घटना दावा,चैक अनादरण एवं विभिन्न राजीनामा योग्य आपराधिक व दीवानी प्रकरण आपसी समझौते व सुलह के आधार पर निराकृत हुए, लोक अदालत में बैंकों की ऋण वसूली, विद्युत एवं दूरभाष बिल बकाया एवं नगर पालिका के संपत्ति व जल कर से संबंधित मुकदमा पूर्व प्रकरणों का निराकरण भी उभय पक्षों की सहमति से हुआ।सिहोरा व्यवहार न्यायालय में आयोजित लोक अदालत में न्यायालय में लंबित लिटिगेशन के 1,016 प्रकरण समझौते के आधार पर निराकरण के लिए रखे गए, जिनमें से 165 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन प्रकरणों में ₹1 करोड़ 45 लाख 98 हजार 220 रुपए की राशि का अवार्ड/समझौता हुआ। इसी प्रकार प्री-लिटिगेशन के 4,016 प्रकरण निराकरण के लिए रखे गए, जिनमें से 705 प्रकरणों का निराकरण करते हुए ₹85 लाख 22 हजार 98 रुपए की राशि का अवार्ड/समझौता किया गया। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 5,032 प्रकरणों में से 870 प्रकरणों का निराकरण हुआ तथा ₹2 करोड़ 31 लाख 20 हजार 318 रुपए की कुल समझौता राशि रही। लोक अदालत की कार्यवाही के लिए न्यायिक अधिकारियों की खंडपीठों का गठन किया गया था। वहीं राष्ट्रीय लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए मध्यप्रदेश विद्युत मंडल द्वारा तैयार प्रचार-प्रसार वाहन को न्यायाधीश श्री संतोष कुमार कोल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वाहन के माध्यम से आमजन को लोक अदालत में प्रकरणों के समझौते, विद्युत संबंधी मामलों के निराकरण तथा लोक अदालत से मिलने वाले लाभों के संबंध में जागरूक किया गया। |लोक अदालत में आपसी सहमति से मामलों के निराकरण को लेकर पक्षकारों में भी उत्साह देखने को मिला। समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान होने से पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया,समय और खर्च से राहत मिली, वहीं न्यायालय में लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की दिशा में भी लोक अदालत महत्वपूर्ण साबित हुई।
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