बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहीं अधिकांश पैथोलॉजी,आर्युवेद और होम्योपैथिक डॉक्टर कर रहे एलोपैथी पद्धति से इलाज

जबलपुर:बारिश और मौसम के बदलाव के चलते बीमारियों का सीजन चल रहा है,इस दौर में डेंगू, मलेरिया, और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियां सबसे ज्यादा फैलती हैं। इसके अलावा दूषित पानी और भोजन से टाइफाइड, हैजा और डायरिया का खतरा भी बढ़ जाता है।तो वहीँ ज्यादातर डॉक्टर इलाज के लिए मरिजों को जांच के लिए पैथोलॉजी भेजते हैं और पैथोलॉजी की रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर मरीज का इलाज करते हैं,अब ऐसे में पैथोलॉजी की रिपोर्ट सही है तो मरीज का इलाज अच्छा होगा ।अब ऐसे में जरूरी हो जाता है की जिस पैथोलॉजी में आप जांच करवा रहे हैं वहां से रिपोर्ट सही मिले तो आपका इलाज भी सही होगा ।
पैथोलॉजी सेंटरों की जांच की मांग
आजकल हर गली मोहल्ले में आपको एक पैथोलॉजी सेंटर मिल जायेगा,साथ ही डॉक्टर का बोर्ड लगाकर बैठे लोग भी इलाज करते देखे जा सकते हैं,वैसे तो इनकी निगरानी और समय -समय पर इनकी जांच कर कार्यवाही के लिए प्रशासन का गरुण दल भी बना हुआ है, लेकिन सिहोरा तहसील में लंबे समय से गरुण दल की टीम न जाने कहाँ विश्राम कर रही है या फिर ये माना जाये कि तहसील के जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ कोई रुचि नहीँ लेना चाहते नतीजतन आज सिहोरा तहसील के सिहोरा, खितौला, मझगवां, गोसलपुर, बुढ़ागर क्षेत्र में लगभग 15-20 पैथोलॉजी लैब CMHO कार्यालय से बिना वैध पंजीयन के एवं बिना पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (MPPCB) की मंजूरी के बिना अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। जो गलत एवं अमानक जांच रिपोर्ट देकर आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं।नगर के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है की ऐसे पैथोलॉजी सेंटरों सहित झोलाछाप डॉक्टरों की जांच कर उचित कार्यवाही की जाये ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो सके ।
झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार
बताया जा रहा है की सिहोरा तहसील क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है, इतना ही नहीँ यहाँ पर कई तो बंगाल से आकर अपनी -अपनी दुकानें जमा चुके हैं,इनमे से कोई अपने आपको होम्योपैथिक बताता तो कोई आयुर्वेदिक तो कोई यूनानी पद्धति बताते हैं,लेकिन इनके पास एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की कोई डिग्री नहीँ है, उसके बाद भी ये स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से इलाज एलोपैथिक पद्धति से ही करते है।वहीँ चर्चा है की खितौला रेलवे फ़ाटक के समीप बंगाल के दो डॉक्टर अपनी -अपनी जड़ जमा चुके हैं, और नियम विरुद्ध मरीजों का अंग्रेजी दवाइयों से इलाज करते हुए इंजेक्शन और बॉटल भी लगाते है,एक तो जलंदर भंगदर बबासीर का खुलेआम बोर्ड लगाकर सर्जन बनकर इलाज कर रहे है।वहीं इस सबंध में एसडीएम सिहोरा ज्योति परस्ते से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया ।
क्या कहते हैं नियम कानून ?
भारत में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, पैथोलॉजी लैब का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है और रिपोर्ट पर किसी योग्य MD पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर के हस्ताक्षर होने चाहिए,अप्रमाणित तकनीशियन या मशीनों द्वारा की गई गलत जांच से बीमारी का इलाज भटक सकता है। बिना लाइसेंस वाली लैब खतरनाक खून और रसायनों को खुले में फेंकती हैं, जो संक्रमण फैलाते है।
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