बहोरीबंद क्षेत्र के 183 गांव में नर्मदा जल पहुंचाने बिछाई जा रही 1200 किमी लंबी पाइप लाइन

बहोरीबंद/स्लीमनाबाद : बहोरीबंद–रीठी विधानसभा क्षेत्र के 165 गांवों सहित कुल 183 गांव के 1 लाख 15 हजार एकड़ कृषि भूमि तक नर्मदा नदी का पानी पहुंचाने के लिए खेतों में भूमिगत पाइपलाइन बिछाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।करीब 1432 करोड़ रुपये की लागत के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में करीब 1200 किलोमीटर लंबाई पाइप लाइन बिछाई जा रही है। जिससे बहोरीबंद रीठी विधानसभा क्षेत्र के 165 गांव सहित कुल 183 गांव लाभान्वित होंगे। बीते आठ महीनों से लगभग हर गांव में खेतों की खुदाई कर पाइप डाले जा रहे हैं, जिससे वर्षों से पानी की आस लगाए किसानों के चेहरों पर अब संतोष और उम्मीद की मुस्कान दिखाई देने लगी है।क्षेत्र की दशकों पुरानी पानी की समस्या को दूर करने के लिए विधायक प्रणय पांडेय के भागीरथी प्रयास कारगर साबित हुए हैं। लिहाजा शासन से इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिली और धरातल पर उतारने का काम शुरू हुआ जो किसानों के लिए वरदान साबित होगा। प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा निर्माण एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से बहोरीबंद तहसील के 95 गांव, स्लीमनाबाद के 48 गांव, रीठी के 27 गांव, मुड़वारा के 2 गांव तथा मझोली तहसील के 16 गांव के लाखों किसान सीधे लाभान्वित होंगे।
पाइपलाइन से हर गांव,हर खेत तक पहुंचेगा पानी
नर्मदा दाई तट नहर से सलैया फाटक के समीप से पानी लिफ्ट कर कूड़न जलाशय में पहुंचाया जाएगा। जिसके लिए 3 मीटर व्यास की पाइप लाइन बिछाई जा रही है। कूड़न जलाशय से ओवरहेड टैंकों के माध्यम से गांव-गांव और खेत-खेत तक जल आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए कुल 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। मुख्य पाइपलाइन का व्यास 3 मीटर, जबकि खेतों डाली जा रही पाइपलाइन का व्यास 63 मिमी है। अब तक करीब 350 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और इसके माध्यम से शाखा नहरें भी खेतों के नीचे विस्तारित की जाएंगी।
भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं
इस परियोजना की खास बात यह है कि किसानों को भूमि अधिग्रहण की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा। खेतों के 3 फिट नीचे भूमिगत पाइप लाइन डाली जा रही है, जिससे खेती प्रभावित नहीं होगी। इसके साथ ही प्रत्येक 20 हेक्टेयर क्षेत्र में एक पंप हाउस स्थापित किया जाएगा।कूड़न जलाशय से आगे इमलिया पहाड़, सिहुडी- बाकल, केवलारी निपानिया और पहरुआ पहाड़ पर ओवरहेड टैंकों का निर्माण किया जाएगा। यहां से ढाई हेक्टेयर पर एक कनेक्शन के आधार पर खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा।
सिंचाई के साथ पेयजल संकट भी होगा दूर
माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन परियोजना से केवल कृषि सिंचाई ही नहीं, बल्कि पेयजल संकट भी दूर होगा। नर्मदा जल पहुंचते ही गांवों में उसी स्तर पर पीने के पानी की भी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे पठारी क्षेत्र सहित अन्य गांवों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि परियोजना को सितंबर 2029 तक पूर्ण किया जाना है, लेकिन जिस तेजी से काम चल रहा है, उससे इसके समय से पहले पूर्ण होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कलेक्टर ने की समीक्षा
कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की विस्तृत समीक्षा कर कार्य में तेजी लाने और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि करीब 1432.77 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2029 तक पूर्ण होने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। परियोजना के तहत जल स्रोत से 17.35 क्यूमेक पानी का उद्वहन किया जाएगा, जिसके संचालन के लिए 25.15 मेगावाट विद्युत क्षमता का उपयोग किया जाएगा। आधुनिक तकनीक और व्यापक जल प्रबंधन पर आधारित यह योजना आने वाले वर्षों में क्षेत्र की कृषि व्यवस्था की दिशा और दशा दोनों बदलने का सामर्थ्य रखती हैं!कटनी जिले में सर्वाधिक लाभ बहोरीबंद तहसील को मिलेगा, जहां 95 गांवों की 22 हजार 103 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसके अलावा स्लीमनाबाद के 48 गांवों की 15 हजार 303 हेक्टेयर, रीठी के 22 गांवों की 6 हजार 314 हेक्टेयर तथा कटनी तहसील के 2 गांवों की 613 हेक्टेयर भूमि को भी सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना के पूर्ण होने के बाद क्षेत्र की खेती पूरी तरह बदल जाएगी। जिन खेतों में अभी तक केवल एक फसल ली जाती थी, वहां किसान अब वर्ष में दो से तीन फसलें लेने में सक्षम होंगे। खरीफ और रबी दोनों मौसमों में सिंचाई उपलब्ध होने से उत्पादन बढ़ेगा और मौसम की अनिश्चितताओं का असर कम होगा।
नकदी फसलों और बागवानी को मिलेगा बढ़ावा
पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के बाद किसान गेहूं, धान और चना जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियां, दलहन, तिलहन और अन्य नकदी फसलों की खेती की ओर भी आगे बढ़ सकेंगे। इससे कृषि का स्वरूप बदलेगा और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, वहीं कृषि आधारित उद्योगों और प्रसंस्करण इकाइयों के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी आने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन परियोजना आने वाले वर्षों में कटनी और जबलपुर के कृषि इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी और क्षेत्र को जल-संपन्न तथा कृषि समृद्ध बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
इनका कहना है- प्रणय पांडेय विधायक
बहोरीबंद रीठी क्षेत्र के दशकों पुरानी मांग पूर्ण हुई है ।प्रदेश सरकार की स्वीकृति के साथ ही कार्य गुणवत्ता और तेजी से कराया जा रहा है। पाइप लाइन विस्तार का कार्य चल रहा है।उम्मीद है कि निर्धारित समय से पूर्व यह परियोजना पूर्ण हो जाएगी।जिसकी सतत मॉनिटरिंग हो रही है।जिससे किसानों के खेतों में नर्मदा का जल पहुंचाने का सपना जल्द साकार हो।
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