खेती को सुरक्षित और लाभकारी बनाए रखना है तो प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा- विधायक प्रणय पांडेय

सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद : कीटनाशकों एवं रसायनों के अत्यधिक प्रयोग के कारण खेतों में पाए जाने वाले मित्र कीट एवं पक्षियों की संख्या तेजी से घट रही है, पहले खेतों में बड़ी संख्या में पक्षी दिखाई देते थे, जो अब विलुप्त होने की कगार पर हैं। रासायनिक खेती का दुष्प्रभाव केवल पर्यावरण पर ही नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। लगातार बढ़ते कीटनाशक एवं खरपतवारनाशी के उपयोग से भूमि की उर्वरता कम होने तथा भविष्य में जमीन के बंजर होने का खतरा बढ़ रहा है, इस आशय की बात कृषि कल्याण वर्ष के तहत कृषि विभाग द्वारा बहोरीबंद मै आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में कही।विधायक प्रणय पांडेय ने किसानो से कहा प्राकृतिक खेती, जैविक उपायों एवं परंपरागत कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए क्योकि रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से खेती की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तथा मिट्टी की उर्वरक क्षमता लगातार कम होती जा रही है, उन्होने कहा आधुनिक खेती में रसायनों और दवाइयों पर अत्यधिक निर्भरता ने कृषि को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने किसानों से जीवामृत एवं अन्य प्राकृतिक उपायों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा यदि खेती को सुरक्षित और लाभकारी बनाए रखना है तो प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा।उन्होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “चलो खेत की ओर” आह्वान का उल्लेख करते हुए खेती को बचाने और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया।साथ ही भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक टंडन सोनी द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किए जाने की बात भी कही। उन्होने कहा सरकार किसानों की आय बढ़ाने एवं बेहतर उत्पादन के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन टिकाऊ खेती के लिए प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर पर्यावरण अनुकूल कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।कृषि विभाग की ओर से एसएडीओ अमर सिंह एमा द्वारा प्राकृतिक खेती की तकनीकों, जैविक आदानों के उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्द्तियो पर मार्गदर्शन दिया गया!कार्यशाला के तहत किसानों को कोदो -कुदकी का बीज वितरण किया गया!
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