नौकरी नहीं मिली तो शुरू किया कारोबार,अब 6-7 युवाओं को दे रहे रोजगार

जबलपुर:एक ऐसा युवा जो कभी नोकरी की तलाश में दर -दर की ठोकरें खा रहा था आज खुद दूसरे युवाओं को रोजगार दे रहा है,कोरोना काल में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद गढ़ा गौतम जी की मढ़िया निवासी पंकज ठाकुर ने नौकरी की तलाश में काफी प्रयास किए। वे कई जगह गए, लेकिन नौकरी नहीं मिली। उस समय सरकारी नौकरियों के अवसर भी सीमित थे। लगातार प्रयास के बावजूद रोजगार नहीं मिलने से पंकज काफी निराश हो गए थे। इसी दौरान उन्हें उद्यमिता प्रशिक्षण से जुड़ने का मौका मिला और यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।हम बात कर रहे है जबलपुर के पंकज की जिसने चार साल पहले 2021 में उद्यमिता विकास केंद्र में एंटरप्रेन्योर के लिए आयोजित रेसिडेंशियल ट्रेनिंग में 45 दिन का प्रशिक्षण लिया। इस ट्रेनिंग में उनके साथ बालाघाट, मंडला सहित अन्य स्थानों के युवा भी शामिल थे। प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञों ने युवाओं को स्वरोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। नाबार्ड, मत्स्य पालन विभाग, आईटीआई सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और विशेषज्ञ प्रशिक्षण देने पहुंचे।प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को बताया गया कि वे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में किस तरह अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। साथ ही सरकार की विभिन्न योजनाओं, लोन और अनुदान की जानकारी भी दी गई। कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट ने भी व्यवसाय शुरू करने और उसे संचालित करने से जुड़ी जानकारी दी।यही प्रशिक्षण पंकज के लिए कारोबार की राह दिखाने वाला साबित हुआ। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 25 लाख रूपये का लोन लिया। उन्हें केनरा बैंक की गढ़ा शाखा से लोन स्वीकृत हुआ। पंकज बताते हैं कि यह उनका पहला कारोबार है। इस राशि और अपनी उपलब्ध पूंजी के सहारे उन्होंने एमपीआईडीसी से औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट लिया और उस पर फैक्ट्री तैयार कराई।पंकज ने अपनी यूनिट का नाम स्वस्तिक कोरुगेटेड रखा। फैक्ट्री में मशीनें लगाईं और कार्टन बॉक्स का निर्माण शुरू किया। करीब चार साल से वे इस व्यवसाय को चला रहे हैं। शुरुआत में कारोबार को खड़ा करना आसान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे बाजार तैयार हुआ और अब जबलपुर के साथ आसपास के जिलों में भी उनके उत्पाद की सप्लाई हो रही है।पंकज का कहना है कि उनकी फैक्ट्री ऐसे औद्योगिक क्षेत्र में है, जहां आसपास कई तरह की निर्माण इकाइयां संचालित होती हैं। किसी फैक्ट्री में बिस्किट बनते हैं तो कहीं फिनाइल, पेंट सहित दूसरे उत्पाद तैयार होते हैं। इन सभी उत्पादों की पैकिंग के लिए कार्टन बॉक्स की जरूरत होती है। इसलिए उनके उत्पाद के लिए स्थानीय बाजार में ही मांग उपलब्ध हो जाती है।स्वस्तिक कोरुगेटेड के कार्टन बॉक्स की बिक्री जबलपुर के अलावा सतना, मैहर और नरसिंहपुर सहित अन्य स्थानों पर भी हो रही है। कच्चा माल नागपुर और सतना से मंगाया जाता है। प्लांट में वर्तमान में करीब 6 से 7 युवा काम कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर आसपास के गांवों के युवा हैं। पंकज का कहना है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देना भी उनके व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कर्मचारियों का भुगतान नियमित रूप से शनिवार को किया जाता है।कारोबार को शुरू हुए करीब चार साल हो चुके हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में उनकी यूनिट का टर्नओवर करीब 25 लाख रूपये रहा। पंकज मानते हैं कि वे अभी इस क्षेत्र में नए हैं और कारोबार को और विस्तार देने की संभावनाएं हैं। नौकरी की तलाश से शुरू हुआ उनका सफर अब खुद का व्यवसाय खड़ा करने और दूसरे युवाओं को रोजगार देने तक पहुंच चुका है।
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