जलविहीन होती जा रही जीवनदायिनी,हिरन नदी के जल की फिर टूटी धार

जबलपुर/सिहोरा:कुंडम से होकर सिहोरा के रास्ते मझोली की तरफ जाने वाली हिरन नदी के पानी पर लाखों लोग सहित असंख्य जलीय जीव,पशु पक्षी,जंगली जीव सभी जीवनदायिनी हिरन नदी के जल पर निर्भर हैं,जानकारों की मानें तो हिरन नदी के जलस्तर पर संकट की बजह रेत का अवैध उत्खनन और भीषण गर्मी है,इन दोनों की बजह से आज फिर एक बार फिर जीवनदायिनी हिरन नदी जलविहीन होकर गढ्ढो में तब्दील होती जा रही है।तो वहीं जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है की जल्द से जल्द हिरन नदी में पानी छोड़ा जाये।
फिर टूटी पानी की धार
आपको बता दें की भीषण गर्मी के दस्तक देते ही अंचल की जीवन रेखा कही जाने वाली हिरन नदी एक बार फिर संकट के घेरे में है। अप्रैल माह के पहले सप्ताह में ही नदी की जलधार पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे तटीय क्षेत्रों में जलसंकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। मार्च के दूसरे सप्ताह में बरगी बांध से पानी छोड़े जाने पर जो राहत मिली थी, वह अब चिंता में बदल चुकी है। नदी के कई हिस्से अब रेगिस्तान की तरह नजर आने लगे हैं।
नहर का पानी बंद होते ही गहराया संकट
पिछले पाँच दिनों से बरगी दायीं तट मुख्य नहर से पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई है। इसका सीधा असर हिरन नदी के प्रवाह पर पड़ा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि नदी की निरंतर धार टूट चुकी है और कई स्थानों पर केवल छोटे-छोटे पोखर ही शेष बचे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जल्द ही नहर से पानी नहीं छोड़ा गया, तो मई-जून में स्थिति और भी भयावह हो जाएगी।
रेत माफिया का प्रहार और गिरता भूजल स्तर
हिरन नदी के असमय सूखने का एक बड़ा कारण बेतहाशा रेत उत्खनन को माना जा रहा है। रेत माफिया द्वारा नदी के सीने को छलनी किए जाने से जल संग्रहण क्षमता और नदी का वेग, दोनों ही प्रभावित हुए हैं। यही कारण है कि जो जलसंकट मई के अंत में आता था, वह अब अप्रैल की शुरुआत में ही ग्रामीण क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले चुका है। नदी सूखने से आसपास के ग्रामों का भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है।
इन गाँवों में होने लगी पानी की समस्या
जलस्तर गिरने से दर्जनों गाँवों में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्रामों में पेयजल और निस्तार की समस्या जटिल हो गई है।खिन्नी, कैथरा, चन्नौटा और मल्हना,कूड़ा, कंजई, घाटसिमरिया और मोहतरा,ताला, देवरी और शहजपुरा सहित कई गाँवों में सरकारी हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है, जिसके कारण ग्रामीण अब खेतों में लगे निजी बोरवेलों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
अस्थाई स्टॉपडेम की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल संकट को देखते हुए हिरन नदी पर तत्काल अस्थाई स्टॉपडेम बनाए जाएं ताकि उपलब्ध जल को सहेजा जा सके। साथ ही, बरगी दायीं तट नहर से अविलंब पानी छोड़ने की गुहार लगाई गई है ताकि गर्मी की तपिश बढ़ने से पहले अंचल के निवासियों को इस भारी मुसीबत से राहत मिल सके।
”क्षेत्रीय नागरिकों रजनीश पटेल, वासुदेव मिश्रा, घनश्याम पटेल,उत्तम तिवारी, रामेश्वर चौरसिया, उमेश असाटी, ओमप्रकाश चौरसिया आदि ने कहा है कि हिरन नदी केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि इस अंचल की आत्मा है। इसके सूखने का मतलब है पशु-पक्षियों से लेकर आम जनमानस तक का जीवन संकट में पड़ना।”
इंडिया पोल खोल को आर्थिक सहायता
प्रदान करने हेतु इस QR कोड को किसी भी UPI ऐप्प से स्कैन करें। अथवा "Donate Now" पर टच/क्लिक करें।
Click Here >>
Donate Now
इंडिया पोल खोल के YouTube Channel को Subscribe करने के लिए इस YouTube आइकन पर टच/Click करें।
इंडिया पोल खोल के WhatsApp Channel को फॉलो करने के लिए इस WhatsApp आइकन पर टच/Click करें।















