सिहोरा में झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरवान,बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहीं अधिकांश पैथोलॉजी

जबलपुर/सिहोरा:नगर सहित उपनगर में झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें धड़ल्ले से चल रहीं हैं,इतना ही नहीं अधिकांश पैथोलॉजी बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित की जा रहीं हैं,ये सब जानते हुए भी न तो प्रशासन के पास झोलाछाप डॉक्टरों की जांच कार्यवाही के लिए समय है न ही पैथोलॉजी सेंटरों की नतीजन नित नई दुकानें सिहोरा तहसील में दिनोंदिन खुलती जा रही है।वहीं सीएमएचओ संजय मिश्रा द्वारा कहा गया था कार्यवाही के लिए सिहोरा सीबीएमओ को निर्देशित किया जायेगा लेकिन एक सप्ताह होने जा रहे हैं अभी तक कार्यवाही का क तक नजर नहीँ आ रहा है।
कितनी पैथोलॉजी के पास रजिस्ट्रेशन ?
नियमों की मानें तो पैथोलॉजी संचालित करने के लिए गुमास्ता लायसेंस ,पालुसन सहित रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना अनिवार्य होता है, लेकिन सिहोरा में अधिकांश पैथोलॉजी सेंटर ऐसे ही चल रही है,इनके पास न तो गुमास्ता लायसेंस है न ही पालुसन न ही रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट,नगर के जिम्मेदार नागरिकों ने इन पैथोलॉजी सेंटरों की जल्द से जल्द जांच करते हुए कार्यवाही की मांग की है,क्योंकि ज्यादातर डॉक्टर पैथोलॉजी से मिली रिपोर्ट के आधार पर इलाज करते हैं,
कब होगी कार्यवाही ?
बताया जा रहा है की सिहोरा तहसील क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है, इतना ही नहीँ यहाँ पर कई तो बंगाल से आकर अपनी -अपनी दुकानें जमा चुके हैं जिनमे कोई ढाली तो मजूमदार है, कोई मेडीकल के अंदर ही बैठकर इलाज कर रहा है तो कोई बोर्ड में एमबीबीएस बेटे का नाम लिखकर खुद ही एलोपैथिक पद्धति से इलाज के नाम पर लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ कर रहा है,इनमे से कोई अपने आपको होम्योपैथिक बताता तो कोई आयुर्वेदिक तो कोई यूनानी पद्धति बताते हैं ,और इनके पास एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की कोई डिग्री नहीँ है, लेकिन इलाज ये एलोपैथिक पद्धति से ही करते है।हलाकि समय -समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनपर कार्यवाही तो की जाती है लेकिन लोगों का कहना है की इनका स्थाई इलाज स्वास्थ्य विभाग कब तक करेगा?
स्वास्थ्य विभाग मेहरवान
वहीँ चर्चा है की खितौला रेलवे फ़ाटक के समीप बंगाल के दो डॉक्टर अपनी -अपनी जड़ जमा चुके हैं, और नियम विरुद्ध मरीजों का अंग्रेजी दवाइयों से इलाज करते हुए इंजेक्शन और बॉटल भी लगाते है,एक तो जलंदर भंगदर बबासीर का खुलेआम बोर्ड लगाकर सर्जन बनकर इलाज कर रहा है,करे भी क्यों न क्योंकि एक बार स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन्हीं अवैध गतिविधियों के चलते इनकी क्लिनिक सील कर दी गई थी उसके तीन चार माह बाद फिर से इनकी दुकान को बहाल कर दिया गया ,जबकि ये कोई सर्जन नहीँ हैं उसके बावजूद भी ये बबासीर जलंधर भगन्दर का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं?क्योंकि इनके ऊपर स्वास्थ्य विभाग मेहरवान है,तब तो इनके पास एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की कोई डिग्री नहीँ है, उसके बावजूद इलाज ये एलोपैथिक पद्धति से ही कर रहे हैं।
इंडिया पोल खोल को आर्थिक सहायता
प्रदान करने हेतु इस QR कोड को किसी भी UPI ऐप्प से स्कैन करें। अथवा "Donate Now" पर टच/क्लिक करें।
Click Here >>
Donate Now
इंडिया पोल खोल के YouTube Channel को Subscribe करने के लिए इस YouTube आइकन पर टच/Click करें।
इंडिया पोल खोल के WhatsApp Channel को फॉलो करने के लिए इस WhatsApp आइकन पर टच/Click करें।















