जब विश्वमोहिनी पर रीझे देवर्षि नारद,रामलीला के दूसरे दिन मंच पर जीवंत हुई भगवान विष्णु की लीला

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राजेश मदान बैतूल। विश्वमोहिनी के रूप पर मोहित देवर्षि नारद, स्वयंवर में विवाह की अभिलाषा और फिर भगवान विष्णु की अद्भुत माया… रामलीला के मंच पर जब यह पौराणिक कथा साकार हुई तो दर्शक प्रसंग के हर मोड़ के साथ जुड़ते चले गए। नारद के मोह से लेकर उनके अहंकार और भगवान विष्णु की लीला तक के दृश्यों ने रामलीला मैदान में ऐसा समां बांधा कि 69वें रामलीला व दशहरा उत्सव की दूसरी शाम आकर्षण का केंद्र बन गई। रीवा के प्रसिद्ध श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकारों ने अभिनय के जरिए कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

विश्वमोहिनी के रूप ने बढ़ाया प्रसंग का आकर्षण

रामलीला मैदान में रविवार, 11 अक्टूबर को रात्रि 9 बजे से नारद मोह और विश्वमोहिनी स्वयंवर का मंचन शुरू हुआ। कथा में देवर्षि नारद की तपस्या, उनके मन में उत्पन्न अभिमान और विश्वमोहिनी के स्वयंवर से जुड़े घटनाक्रम को दिखाया गया। विश्वमोहिनी के रूप पर मोहित होकर नारद का उनसे विवाह करने की इच्छा रखना कथा का प्रमुख मोड़ रहा। कलाकारों ने भाव-भंगिमाओं और संवादों के माध्यम से इस प्रसंग को मंच पर उतारा। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ती गई।

भगवान विष्णु की माया ने बदली कथा की दिशा

नारद मोह प्रसंग में भगवान विष्णु की लीला ने कथा को नया मोड़ दिया। अपने रूप और तपस्या पर अभिमान करने वाले नारद स्वयंवर में विश्वमोहिनी को पाने की इच्छा रखते हैं। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु की माया के चलते नारद को हरि यानी वानर रूप प्राप्त होता है। स्वयंवर में घटित घटनाओं और नारद के मोहभंग से जुड़े दृश्यों का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि अहंकार व्यक्ति की विवेक-बुद्धि को प्रभावित कर सकता है और अभिमान के कारण व्यक्ति परिस्थितियों को सही ढंग से नहीं समझ पाता। भगवान विष्णु की लीला के जरिए कथा में इसी भाव को प्रस्तुत किया गया।

अभिनय और संवादों से जीवंत हुए पौराणिक प्रसंग

रीवा के श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकारों ने नारद मोह और विश्वमोहिनी स्वयंवर के दृश्यों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया। पौराणिक कथा के उतार-चढ़ाव, पात्रों की भाव-भंगिमाओं और संवादों ने मंचन को प्रभावी बनाया। रामलीला की खासियत यही रही कि धार्मिक कथा के साथ मनोरंजन और संदेश का भी समावेश दिखाई दिया। इस तरह के मंचन से दर्शकों को पौराणिक प्रसंगों को करीब से समझने और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

12 दिवसीय आयोजन में आगे भी होंगे धार्मिक प्रसंग

69वें रामलीला व दशहरा उत्सव का आयोजन श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति, बैतूल द्वारा किया जा रहा है। यह 12 दिवसीय आयोजन पंजाब युवा सेवा समिति एवं श्री कृष्ण पंजाबी महिला कीर्तन मंडल, बैतूल के सहयोग से संचालित हो रहा है। आयोजन का उद्देश्य रामलीला और पौराणिक कथाओं के मंचन के माध्यम से धार्मिक आस्था तथा सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाना है।

रामलीला में आज

तीसरे दिन, 12 अक्टूबर सोमवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का पावन मंचन किया जाएगा। रीवा के प्रसिद्ध श्री गणेश रामलीला मंडल, मऊगंज के कलाकारों द्वारा रात्रि 9 बजे से प्रभु के अवतरण की आनंददायी कथा प्रस्तुत की जाएगी।

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