रैलियों के शोर से हर वर्ग परेसान,भाजपा और कांग्रेस दोनों के शक्ति प्रदर्शन से त्रस्त हुई जनता

गोपाल गुमाश्ता*जबलपुर,मध्य प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की रैलियों और लाउडस्पीकरों के शोरगुल से आम जनता के साथ-साथ स्कूली बच्चे भी खासे परेशान नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में बच्चों और स्थानीय लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है, जहाँ वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वहीँ शहर के अति व्यस्ततम बाजारों मे व्यापरियों ने भी अपना गुस्सा इजहार किया. चूंकि रैली ने पूरा बाजार को एक प्रकार से अपने शक्ति प्रदर्शन के चलते चोक कर दिया था.
*रैलियों के विरोध में आगे आए बच्चे
चुनाव आयोग के मुखिया ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे देश भर मे प्रदर्शन को लेकर लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ विषय को लेकर जबलपुर मे भी हुए एक आयोजन मे
हाल ही में सामने आए एक वीडियो में कॉलेज तथा स्कूली बच्चों को जबरिया रैलियों के दौरान होने वाले अत्यधिक शोर गुल ने हलाकान कर दिया है .दोनो दल एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप के चलते ही जनता को जबरन मे परेशान कर रहे है.रैलियों मे काले सिर वाली mundiyon की भीड़ बढ़ाने के लिए बच्चों पर किसी न किसी प्रकार से दबाब डालकर लाया जाता है. इसके अलावा बच्चों ने डेली निकलने वाली किसी न किसी दल की रैली के सन्दर्भ मे कहा कि परीक्षाओं और पढ़ाई के समय लगातार बजने वाले लाउडस्पीकर और रैलियों की वजह से वे एकाग्र होकर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। बच्चों ने दोनों राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण रखें।
सत्ता और विपक्ष दोनों से त्रस्त दिखी जनता
केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि आम जनता में भी रैलियों के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम,, दैनिक दिनचर्या एवं शहर के व्यस्ततम मार्गों और बाजारी क्षेत्र से गुजरने वाली रैलियों को धमाचौकड़ी से होने वाली विभिन्न प्रकार की बाधा को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रहीं है.. स्थानीय निवासियों और त्योहार के समय मार्केट मे. खरीदारी करने निकले हज़ारों लोगों ने कांग्रेस बीजेपी दोनों के प्रदर्शन के खिलाफ. मुखर होकर अपना विरोध दर्ज कराया. लोगों का कहना है कि किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि राजनीतिक कार्यक्रमों के इस तरीके से पूरा आम जीवन प्रभावित हो रहा है।
*जनता का संदेश*
“मुद्दों की बात हो, परेशानी की नहीं”जनता का मानना है कि नेताओं को रैलियों के इस पारंपरिक और शोर-शराबे वाले तरीके को छोड़कर आम लोगों की सहूलियत का ध्यान रखना चाहिए। अपने पक्ष मे प्रचार ऐसा होना चाहिए जिससे न तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो और न ही आम नागरिक को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़े।
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