जबलपुर में टी-सीरीज टैंकों के 472 करोड़ की ओव्हरहॉल परियोजना का रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने किया भूमिपूजन


जबलपुर,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया अब भारत को मैन्युफैक्चरिंग पावर, टेक्नोलॉजी पार्टनर और विश्वसनीय डिफेंस पार्टनर के रूप में देख रही है। यह बात रक्षा मंत्री सिंह ने गुरुवार को आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड की इकाई व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में टी-सीरीज टैंक ओवरहाल परियोजना के भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए कही। भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जबलपुर देश की रक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला शहर है गन कैरेज फैक्ट्री सहित जबलपुर की रक्षा उत्पादन इकाइयों ने लंबे समय से देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समारोह में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, लोकसभा सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अशोक रोहाणी, विधायक डॉ अभिलाष पाण्डेय, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, लेफ्टिनेंड जनरल अमरदीप सिंह, रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार, रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव (भूमि प्रणाली) डॉ. गरिमा भगत, एवीएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सत्यव्रत मुखर्जी, एवीएनएल के निदेशक/वित्त राजीव कुमार शर्मा, एवीएनएल के निदेशक/मानव संसाधन एस.एम. सालवे तथा प्रवीण कुमार, मुख्य महाप्रबंधक व्हीएफजे उपस्थित थे।

सेना को जरूरत के अनुसार समय टैंक उपलब्ध कराने में मिलेगी मदद
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में 472 करोड़ रुपए की लागत से टी-72 और टी-90 टैंकों के ओवरहॉल के लिए स्ट्रैटेजिक फैसिलिटी का निर्माण करने से हर साल 80 अतिरिक्त टैंकों की ओवरहॉलिंग क्षमता विकसित होगी। हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री अवाडी की 150 टैंकों की क्षमता के साथ जबलपुर की 80 टैंकों की क्षमता जुड़ने के बाद देश में हर साल 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग की जा सकेगी। इससे सेना को जरूरत के अनुसार समय पर टैंक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और ऑपरेशनल रेडीनेस मजबूत होगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परियोजना सामान्य प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, औद्योगिक सामर्थ्य और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है। परियोजना से जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं, तकनीकी वर्कफोर्स और छोटे उद्यमियों को इसका लाभ मिलेगा।

युद्ध का स्वरूप जरूर बदला,टैंक आज भी जरूरी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज युद्ध का चरित्र तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, मिसाइल, प्रिसीजन गाइडेड वेपन्स, सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर वारफेयर आधुनिक युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या टैंकों की जरूरत खत्म हो गई है? कुछ विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं, लेकिन उनका मानना इससे अलग है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में किसी एक प्लेटफॉर्म की नहीं, बल्कि संयुक्त क्षमता की जरूरत है। टैंक, इन्फैंट्री, आर्टिलरी, ड्रोन, एयर पावर, सर्विलांस और प्रिसीजन वेपन्स मिलकर इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सिस्टम बनाते हैं। टैंक की मोबिलिटी, प्रोटेक्शन और फायर पावर का संयोजन आज भी उसकी बड़ी ताकत है। इसलिए टैंक को खत्म करने की बजाय उसे आधुनिक सेंसर और नई तकनीक से लैस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें यह तय नहीं करना है कि टैंक चाहिए या ड्रोन। हमारे सैनिकों के पास टैंक भी हों और ड्रोन भी, साथ ही दोनों के बीच बेहतर समन्वय हो।
जबलपुर को डिफेंस टेक्नोलॉजी का प्रमुख हब बनाने का प्रयास
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि जबलपुर की पहचान पहले से ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और सैन्य उत्पादन के कारण रही है। अब इस पहचान को नए स्तर पर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि जबलपुर डिफेंस टेक्नोलॉजी, मेंटेनेंस, मॉडर्नाइजेशन और मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख हब बने। श्री सिंह ने कहा कि 472 करोड़ रुपए की परियोजना से स्थानीय प्रतिभाओं और तकनीकी कार्यबल को अवसर मिलेगा। भारतीय युवाओं में कौशल की कमी नहीं है।आवश्यकता उन्हें अवसर, तकनीक और सही इकोसिस्टम उपलब्ध कराने की है। इन तीनों के मिलने पर युवा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
चार-पांच साल में सेना को दिए 4,400 टैंक
रक्षा मंत्री ने कहा कि टी-72 और टी-90 टैंक भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और सीमाओं पर आयरन वॉल की तरह खड़े हैं। पिछले चार -पांच वर्षों में हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री ने भारतीय सेना को करीब 4,400 टैंकों की आपूर्ति की है। उन्होंने एवीएनएल और इसके कर्मचारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी ।श्री सिंह ने कहा कि लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में संचालन के कारण टैंकों को समय-समय पर रिपेयर और ओवरहॉलिंग की जरूरत होती है। वर्तमान में सेना को हर साल करीब 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग की आवश्यकता है, जबकि अवाडी में 150 टैंकों की क्षमता है। 80 टैंकों का यह गैप राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण था, जिसे जबलपुर में नई क्षमता विकसित कर दूर किया जा रहा है।
एवीएनएल के पास 25 साल से अधिक का अनुभव
रक्षा मंत्री ने कहा कि आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) देश के रक्षा औद्योगिक ढांचे का महत्वपूर्ण स्तंभ है। एवीएनएल के पास टी-72 और टी-90 टैंकों की ओवरहॉलिंग का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।उन्होंने विश्वास जताया कि संस्थान गुणवत्ता, उत्पादकता, नवाचार और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस के नए मानक स्थापित करेगा।
रक्षा उत्पादन 46 हजार करोड़ से बढ़कर 1.80 लाख करोड़
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी तरह रक्षा निर्यात करीब 1 हजार करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपए पहुंच गया है।उन्होंने कहा कि वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है और यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा। दुनिया अब भारत को मैन्युफैक्चरिंग पावर, टेक्नोलॉजी पार्टनर और विश्वसनीय डिफेंस पार्टनर के रूप में देख रही है।
विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक, सूचना, साइबर डोमेन और सप्लाई चेन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए भारत अपने सैनिकों को महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रखना चाहता।उन्होंने कहा कि देश में ही हथियारों का निर्माण, उनकी रिपेयर और मेंटेनेंस, आधुनिक तकनीक से अपग्रेडेशन तथा नई क्षमताओं का विकास किया जाएगा। जबलपुर की यह परियोजना इसी आत्मनिर्भरता की मजबूत कड़ी है।
मध्यप्रदेश को डिफेंस-एयरोस्पेस हब बनाने की दिशा में काम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025, इन्वेस्ट एमपी 3.0 और उद्योग अनुकूल नीतियों के कारण प्रदेश निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 373 हेक्टेयर भूमि पर रक्षा विनिर्माण की संभावनाएं और 16,960 करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्तावित निवेश प्रदेश की महत्वाकांक्षी सोच को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश को देश का प्रमुख डिफेंस एवं एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की मजबूत नींव रखी जा रही है। उन्होंने परियोजना में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्यप्रदेश सरकार की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
जबलपुर में रक्षा क्षेत्र के पौने पांच सौ करोड़ के प्रोजेक्ट से रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टैंकों के ओव्हरहॉल परियोजना के भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जबलपुर देश की रक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला शहर है।जबलपुर की रक्षा उत्पादन इकाइयों ने लंबे समय से देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब रक्षा क्षेत्र में नए निवेश और आधुनिक तकनीक के साथ इन उद्योगों को नई ऊर्जा मिल रही है।मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं।रक्षा मंत्री का व्यवहार सरल है, लेकिन देश की सुरक्षा को लेकर उनका संकल्प वज्र के समान कठोर है।डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर में रक्षा क्षेत्र से जुड़े करीब पौने पांच सौ करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट की शुरुआत मध्यप्रदेश के लिए बड़ी सौगात है इससे रक्षा उत्पादन को नई गति मिलने के साथ प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जबलपुर की रक्षा उत्पादन इकाइयों को नए दौर की चुनौतियों के अनुरूप आधुनिक बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन कौरेज फैक्ट्री सहित रक्षा क्षेत्र की विभिन्न फैक्ट्रियों ने देश की सुरक्षा में अपनी अलग पहचान बनाई है।पुराने समय में यहां से बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरण और वाहन तैयार किए जाते रहे हैं। अब इन औद्योगिक इकाइयों को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय की रक्षा चुनौतियों का सामना करने की क्षमता और मजबूत होगी।
भोपाल में भी रक्षा क्षेत्र में मिली बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा मंत्री के माध्यम से मध्यप्रदेश को लगातार रक्षा क्षेत्र में नई सौगातें मिल रही हैं।भोपाल में बीईएमएल के माध्यम से महत्वपूर्ण परियोजना मिली है। प्रदेश में वंदे भारत सहित विभिन्न प्रकार के कोचों के निर्माण की दिशा में भी काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में निवेश से मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
निवेश से बढ़ रहे रोजगार के अवसर
डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश की आर्थिक समृद्धि को गति देना है। उन्होंने कहा कि हाल ही में मालनपुर में लगभग 450 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली गोदरेज फैक्ट्री का लोकार्पण किया गया है और अब रक्षा क्षेत्र में पौने पांच सौ करोड़ रुपये की परियोजना की सौगात मिली है। इससे प्रदेश में निवेश की नई संभावनाएं बढ़ रही हैं।
हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शिक्षा, चिकित्सा, अधोसंरचना और निवेश सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।प्रदेश से 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात होना इस प्रगति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भविष्य के विकसित भारत के निर्माण में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है।मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का मध्यप्रदेश को लगातार सहयोग और नई परियोजनाओं की सौगात देने के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में प्रदेश की भूमिका और मजबूत होगी। समारोह के प्रारंभ में केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधिवत पूजा-अर्चना कर टी-सीरीज टैंकों के ओव्हरहॉल परियोजना का शिलान्यास किया। भूमिपूजन समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत व वंदे मातरम के गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टी-सीरीज टैंकों के ओव्हरहॉल प्रोजेक्ट का थ्री-डी डिसप्ले, टी-सीरीज टैंकों तथा व्हीकल फैक्ट्री के रक्षा उत्पादों का अवलोकन भी किया।
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