बीजेपी पार्षद बहु ने किया बुजुर्ग ससुर के मकान पर कब्जा,कलेक्टर ने सुनाया बेदखली का आदेश

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जबलपुर,कलेक्‍टर राघवेन्‍द्र सिंह ने माता-पिता और वरिष्‍ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्‍याण अधिनियम 2007 के अंतर्गत कलेक्‍टर न्‍यायालय में दायर अपील के दो अलग-अलग प्रकरण में आदेश पारित कर एक में जहां बुजुर्ग पिता की संपत्ति पर कब्‍जा करने वाले बेटे को बेदखल करने का निर्णय दिया है, वहीं दूसरे प्रकरण में भाजपा पार्षद रेणू कोरी को अपने 87 वर्षीय ससुर के मकान एक माह में खाली करने का फैसला सुनाया है। वहीँ दोनों आदेश को सकती से पालन कराने के लिए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश भी दिये हैं.माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम के तहत कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने 70 वर्षीय बुजुर्ग पिता की अपील स्वीकार करते हुए उनके 50 वर्षीय पुत्र को बेलबाग स्थित मकान व दुकान से एक माह के भीतर कब्जा खाली करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्‍होंने एसडीएम रांझी द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया गया है।मदन महल निवासी 70 वर्षीय बसंत कुमार रामचंदानी ने कलेक्‍टर न्‍यायालय में अपनी अपील में बताया था कि बेलबाग मेन रोड स्थित 1050 वर्गफुट का दो मंजिला मकान (जिसमें दुकानें भी शामिल हैं) उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी कमाई से खरीदा था। वर्ष 16 में उन्होंने अपने पुत्र सुनील कुमार रामचंदानी के पक्ष में इस संपत्ति की एक वसीयत पंजीकृत कराई थी।

*करने लगा प्रताडित*

बुजुर्ग का आरोप था कि वसीयत निष्पादित होने के बाद पुत्र द्वारा उन्हें शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा और उन्हें उनके ही घर से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद उन्‍होंने जुलाई 25 में उक्त वसीयत को विधिवत निरस्त करा दिया था। पिता के अनुसार, पुत्र संपत्ति पर कब्जा जमाए बैठा रहा और खुद के दो आलीशान मकान खेरमाई म‍ंदिर के सामने कृपाल चौक गुप्‍तेश्‍वर वार्ड में तथा मदन महल रोड महानद्दा में होने के बावजूद पिता को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया। इनमें से कृपाल चौक स्थित मकान से पुत्र को 80 हजार रूपये मासिक किराया प्राप्‍त होता है, वहीं महानद्दा स्थित बंगले में वह परिवार सहित ऐशो-आराम का जीवन व्‍यतीत कर रहा है।

*एसडीएम के आदेश के खिलाफ पहुंचे कलेक्टर न्यायलय

बुजुर्ग पिता ने पूर्व में एसडीएम रांझी के समक्ष बेदखली का आवेदन दिया था। एसडीएम न्यायालय ने 22 अप्रैल 26 को आदेश देते हुए कहा था कि यह विवाद संपत्ति को लेकर है और भरण-पोषण का मामला नहीं बनता—अतः पुत्र को केवल यह निर्देश दिया गया कि वह पिता से वाद-विवाद न करे और उन्हें शांतिपूर्वक रहने दे। मकान खाली कराने को लेकर कोई स्पष्ट आदेश न होने के कारण व्यथित पिता ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा 16 के तहत कलेक्टर न्यायालय में अपील दायर की थी।कलेक्टर एवं अपीलीय अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने दोनों पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद पारित आदेश में कहा कि वयोवृद्ध पिता को अपनी स्वअर्जित संपत्ति में जीवन के अंतिम पड़ाव में बिना किसी विवाद व शांतिपूर्वक रहने का पूरा अधिकार है। उन्‍होंने कहा कि सभ्य समाज के लिए यह अत्यंत चिंताजनक है कि एक बुजुर्ग पिता को अपने ही पुत्र से प्रताड़ना झेलनी पड़े। पुत्र सक्षम है और उसके पास रहने के अन्य साधन उपलब्ध हैं, इसलिए उसे पिता की संपत्ति से पृथक रहना चाहिए ताकि वरिष्ठ नागरिक के सम्मान और स्वास्थ्य पर कोई आंच न आए।कलेक्टर श्री सिंह ने प्रकरण में अनावेदक पुत्र सुनील कुमार रामचंदानी को आदेशित किया कि वह परिवार और सामान सहित एक माह के भीतर संपत्ति का कब्जा खाली कर पिता को सौंपे। इसके साथ ही तहसीलदार रांझी और थाना प्रभारी बेलबाग को इस आदेश का समय-सीमा के भीतर कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

भाजपा पार्षद बहु को मकान खाली करने का दिया आदेश

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम के अंतर्गत अपील के दूसरे प्रकरण में कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने 87 वर्षीय बुजुर्ग के पक्ष में निर्णय देते हुए उनकी बहू को एक महीने के भीतर विवादित मकान खाली करने का आदेश दिया है।जानकारी के अनुसार गोहलपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत त्रिमूर्ति नगर (डॉ. राममनोहर लोहिया वार्ड क्र. 29) निवासी 87 वर्षीय रूपलाल कोरी टेलीग्राफ फैक्ट्री से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी बचत से वर्ष 1986 में 2400 वर्गफुट का भूखंड खरीदकर मकान बनवाया था। उनके पांच पुत्र और तीन पुत्रियां हैं।

राजनैतिक पहुंच का उठाया फ़ायदा

श्री कोरी ने कलेक्‍टर न्‍यायालय में दायर अपील में बताया था कि उनके दिवंगत पुत्र राकेश कोरी की पत्नी श्रीमती रेनू कोरी ने मकान के कमरों व दुकान पर कब्जा कर रखा है। मकान पुराना व जर्जर होने के कारण जब उन्होंने मरम्मत का प्रयास किया, तो उसमें बाधा उत्पन्न की गई। इसके चलते वयोवृद्ध अवस्था में उन्हें मानसिक व व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।चूँकि श्रीमती रेणू कोरी बीजेपी से जुड़ी है इसलिये पार्टी का दबाव प्रशासन पर रहने के कारण न्यायसंगत कार्यवाही होने मे दिक्कतें आ रहीं हैं.बुजुर्ग श्री कोरी ने पहले अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) अधारताल के समक्ष बेदखली हेतु आवेदन किया था। एसडीएम न्यायालय ने 15 मई 26 को इसे संपत्ति व बंटवारे का पारिवारिक विवाद बताते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था!,,कलेक्‍टर न्‍यायालय में सुनवाई के दौरान अनावेदिका भाजपा नेत्री श्रीमती रेनू कोरी ने तर्क दिया कि उक्त भवन का पुनर्निर्माण उनके स्वर्गीय पति (चिकित्सक) की आय से हुआ था। पति के निधन के बाद वे और उनका बेटा इसके कानूनी उत्तराधिकारी हैं और वे एक विधवा व शारीरिक रूप से अस्वस्थ महिला हैं। प्रकरण में विस्तृत सुनवाई के बाद कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने एसडीएम अधारताल के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया। कलेक्‍टर श्री सिंह ने निर्देश दिए कि अनावेदिका श्रीमती रेनू कोरी आदेश प्राप्ति के एक माह के भीतर अपने परिवार और सामान सहित इस मकान से कब्जा समाप्त करें। एक माह का समय बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, लेकिन इस अवधि के दौरान अपीलार्थी के सम्मान, सुरक्षा या संपत्ति को प्रभावित करने वाला कोई कृत्य नहीं किया जाएगा। कलेक्‍टर श्री सिंह ने आदेश में तहसीलदार अधारताल और थाना प्रभारी गोहलपुर को समय-सीमा के भीतर इसका विधिवत पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं।

 

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