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जेलर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मानने का आरोप,संत आसाराम बापू के केयरटेकर से कहा ‘दोबारा आदेश लेकर आओ

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जोधपुर:सोशल मीडिया में संत आसाराम बापू के भक्तोँ द्वारा लगातार जोधपुर जेल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए कहा जा रहा है की जोधपुर सेंट्रल जेल से सामने आ रही जानकारियां बेहद चिंताजनक हैं, लगभग 86 वर्षीय आसाराम बापू, जो हृदय संबंधी बीमारी सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें जेल के भीतर किन परिस्थितियों में रखा जा रहा है? सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी 24 घंटे प्रशिक्षित केयरटेकर की सहायता की अनुमति दी है, तो जेल प्रशासन इस व्यवस्था को लागू करने में बाधा क्यों डाल रहा है? हलाकि इस मामले में अभी तक जोधपुर जेल के जेलर की प्रतिक्रिया अभी तक नहीँ आई।

डॉ. सचित भोला ने बताई जेल के भीतर की स्थिति

डॉ. सचित भोला (Dr. Sachit Bhola), आसाराम बापू के निजी चिकित्सक हैं। वे हाल ही में नियमित मेडिकल चेकअप के सिलसिले में जोधपुर सेंट्रल जेल में उनसे मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के दौरान आसाराम बापू ने उन्हें जेल के भीतर अपनी वर्तमान परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की जानकारी दी। उन्हीं के माध्यम से ये जानकारियां सामने आई हैं।

जेल के भीतर आसाराम बापू की कथित दुर्दशा

डॉ. सचित भोला को बताई गई जानकारी के अनुसार:

1. 18 कैदियों के साथ बैरक: आसाराम बापू को 18 अन्य कैदियों के साथ एक ही बैरक में रखा गया है।

2. शौचालय की बदहाल स्थिति: दूसरे कैदियों द्वारा इस्तेमाल करने के बाद शौचालय की सफाई नहीं की जाती। उन्हें स्वयं पानी डालकर सफाई करनी पड़ती है।

3. दुर्गंध और घुटन: बंद बैरक में गर्मी, पसीने और दुर्गंध के कारण सांस लेने में परेशानी हो रही है। प्राणायाम तक नहीं कर पा रहे हैं।

4. नींद की कमी: पिछले दो दिनों से ठीक से नींद नहीं आने की शिकायत है।

5. गर्म पानी उपलब्ध नहीं: स्नान के लिए केवल ठंडा पानी उपलब्ध होने की शिकायत है। गर्म पानी नहीं मिलने के कारण वे स्नान नहीं कर पा रहे हैं।

6. सेवा के लिए कोई समर्पित सेवक नहीं: उनकी देखभाल और सहायता के लिए कोई समर्पित सेवक भी साथ नहीं है।

सबसे गंभीर सवाल: हृदय रोगी को ठंडा पानी क्यों दिया जा रहा है?

आसाराम बापू हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं। उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए स्नान के लिए पानी का तापमान उनकी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होना चाहिए।लेकिन यदि उनकी जरूरत के बावजूद गर्म पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, तो यह गंभीर लापरवाही का विषय है।क्या ठंडा पानी उपलब्ध कराने के पीछे जानबूझकर उन्हें परेशान करने या उनके स्वास्थ्य को जोखिम में डालने की मंशा है?क्या प्रशासन किसी बड़ी चिकित्सकीय आपातस्थिति का इंतजार कर रहा है?क्या किसी अनहोनी के बाद ही जेल प्रशासन जागेगा?यह जांच का विषय है कि गर्म पानी की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही। किसी बुजुर्ग हृदय रोगी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की अनदेखी को सामान्य प्रशासनिक मामला समझकर नहीं टाला जा सकता।

 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद केयरटेकर को प्रवेश क्यों नहीं?

6 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू को अपनी पसंद के प्रशिक्षित केयरटेकर की 24 घंटे सहायता लेने की अनुमति दी थी।AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट में भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चौबीसों घंटे देखभाल की आवश्यकता बताई गई थी।लेकिन अब सामने आई जानकारी के अनुसार, केयरटेकर को जेल में प्रवेश देने के बजाय कथित रूप से कहा जा रहा है:

‘दोबारा आदेश लेकर आओ!’

सवाल जेलर प्रमोद सिंह से है की जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश मौजूद है, तो दोबारा आदेश लाने की मांग किस आधार पर की जा रही है?क्या जेल प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को अपनी सुविधानुसार लागू करेगा?क्या एक बुजुर्ग और बीमार कैदी को अपने अधिकारों के लिए बार-बार न्यायालय के दरवाजे पर भेजा जाएगा? यदि केयरटेकर को रोका जा रहा है, तो उसका लिखित आदेश और कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

जेलर प्रमोद सिंह का पिछला कार्यकाल भी सवालों के घेरे में!

आसाराम बापू के मामले में वर्तमान शिकायतों के बीच जेलर प्रमोद सिंह के पिछले कार्यकाल से जुड़े विवादों की समीक्षा भी जरूरी है।

1. जयपुर जेल से दो कैदी फरार, प्रमोद सिंह APO!

सितंबर 2025 में जयपुर सेंट्रल जेल से दो कैदी फरार हो गए थे।

उस समय जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह थे। इस बड़ी सुरक्षा चूक के बाद उन्हें APO (Awaiting Posting Orders) पर भेजा गया था।सवाल है कि हाई-सिक्योरिटी जेल से दो कैदी आखिर फरार कैसे हुए?

जेल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी?

इस घटना की विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष निकले और किसकी जवाबदेही तय हुई?

संदर्भ: Times of India की सितंबर 2025 की रिपोर्ट।

2. जोधपुर जेल में चरस और 21 मोबाइल बरामद होने का मामला!

16 मई 2017 को जोधपुर सेंट्रल जेल में तलाशी के दौरान एक पैकेट से 21 मोबाइल फोन और लगभग 20 ग्राम चरस बरामद होने की खबर प्रकाशित हुई थी।

इस घटना ने देश की हाई-सिक्योरिटी जेलों में शामिल जोधपुर जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

इसके बाद भी अलग-अलग वर्षों में जेल से मोबाइल और प्रतिबंधित सामान मिलने की घटनाएं सामने आती रहीं।

यहां सवाल है कि जेल की सुरक्षा व्यवस्था में बार-बार सेंध कैसे लगती रही? इन घटनाओं की प्रशासनिक जिम्मेदारी किसने ली?

संदर्भ: अमर उजाला और The New Indian Express, 16 मई 2017।

3. जोधपुर जेल में IPS हेमंत कलाल के औचक निरीक्षण का विवाद!

मार्च 2025 में प्रशिक्षु IPS अधिकारी हेमंत कलाल का मामला भी काफी चर्चा में रहा।

30 जनवरी 2025 को वे अपनी टीम और मजिस्ट्रेट के साथ जोधपुर सेंट्रल जेल में औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य द्वार पर उन्हें लगभग 20 मिनट इंतजार कराया गया और जेल अधीक्षक की अनुपस्थिति का हवाला देकर प्रवेश नहीं दिया गया।

इसके बाद 21 फरवरी को दोबारा तलाशी के दौरान एक बैरक में मटकी के अंदर छिपाकर रखे गए दो मोबाइल बरामद हुए।

इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।

महत्वपूर्ण: इस निरीक्षण विवाद में उस समय के जेल अधीक्षक का नाम अलग रिपोर्टों में प्रदीप लखावत बताया गया है। इसे प्रमोद सिंह की व्यक्तिगत घटना बताना सही नहीं होगा। लेकिन यह जोधपुर जेल की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण मामला है।

जेल अधीक्षक की जिम्मेदारी आखिर क्या है?

जेल अधीक्षक जेल की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था का प्रमुख होता है।उसके कार्यकाल में कैदी फरार हों, जेल में प्रतिबंधित सामान पहुंचे या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हो, तो उससे जवाब मांगना बिल्कुल उचित है।यह जरूरी नहीं कि हर घटना में अधीक्षक की व्यक्तिगत मिलीभगत साबित हो, लेकिन उसके कार्यकाल में हुई गंभीर चूकों की जांच और जवाबदेही से उसे अलग नहीं रखा जा सकता।इसीलिए प्रमोद सिंह के जयपुर और जोधपुर कार्यकाल से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।

जेलर प्रमोद सिंह से सीधे सवाल!

1. जयपुर जेल से दो कैदियों के फरार होने की घटना में आपकी प्रशासनिक जिम्मेदारी क्या तय हुई?
2. आपके कार्यकाल में जेल सुरक्षा की कमियों पर क्या कार्रवाई हुई?
3. सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बावजूद आसाराम बापू के प्रशिक्षित केयरटेकर को प्रवेश देने में बाधा क्यों आ रही है?
4. हृदय रोगी आसाराम बापू को उनकी चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार गर्म पानी क्यों उपलब्ध नहीं कराया जा रहा?
5. क्या उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की नियमित निगरानी हो रही है?
6. क्या केयरटेकर को रोकने के संबंध में कोई लिखित आदेश जारी किया गया है?

राजस्थान सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे!

संत आसाराम बापू के भक्तों ने राजस्थान सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है की

1. जेलर प्रमोद सिंह के कार्यकाल से जुड़े सुरक्षा विवादों की उच्चस्तरीय समीक्षा हो।
2. जयपुर जेल से कैदियों के फरार होने की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
3. जोधपुर जेल में प्रतिबंधित सामान मिलने की घटनाओं की जांच और जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए।
4. सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के अनुसार 24 घंटे प्रशिक्षित केयरटेकर की सहायता सुनिश्चित की जाए।
5. आसाराम बापू की स्वतंत्र मेडिकल जांच कराई जाए।
6. चिकित्सकीय सलाह के अनुसार गर्म पानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
7. जेल में उनकी सुरक्षा, स्वच्छता और रहने की परिस्थितियों का स्वतंत्र निरीक्षण हो।

आखिर जेल के भीतर आसाराम बापू की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

जेल में बंद व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित हो सकती है, लेकिन उसके जीवन, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा के अधिकार समाप्त नहीं होते।सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है।जेलर प्रमोद सिंह जवाब दें! राजस्थान सरकार जवाब दे! जेल महानिदेशक तत्काल संज्ञान लें!किसी भी बुजुर्ग कैदी को आवश्यक चिकित्सा सहायता से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यदि जानबूझकर किसी अधिकारी द्वारा चिकित्सा सुविधाओं में बाधा डाली जा रही है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।आसाराम बापू के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करो!

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