जबलपुर कलेक्टर ने लांच किया निपुण रोडमैप

जबलपुर,शासकीय शिक्षा महाविद्यालय (पी.एस.एम.) के सभागार में ‘निपुण जबलपुर रोडमैप 2026’ का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह एवं विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक गहलोत थे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्वलन से हुई।कलेक्टर श्री सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि निपुण का सीधा अर्थ प्राथमिक स्तर के बच्चों में पढ़ने, लिखने और गणितीय क्षमता का एक बेसिक न्यूनतम स्तर विकसित करना है। उन्होंने कहा कि आगामी 4 से 5 महीनों का समय प्राथमिक स्तर के बच्चों में सीखने की क्षमता विकसित करने के लिए पर्याप्त है। इसके लिए जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में स्कूलों की सख्त मॉनिटरिंग और शिक्षकों के गुणवत्ता स्तर में सुधार का एक ठोस मैकेनिज्म तैयार किया जाए, ताकि आगामी फरवरी-मार्च के सर्वे तक जिले में क्रांतिकारी परिणाम हासिल किए जा सकें।
जिला पंचायत सीईओ श्री गहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि प्राथमिक शिक्षा ही बच्चे के भविष्य की मजबूत नींव होती है। जिले के वास्तविक शैक्षणिक डेटा को स्पष्ट करने के लिए 7 से 14 सितंबर तक एक सप्ताह का विशेष बेसलाइन सर्वे चलाया जाएगा। इसमें पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘क्रॉस सीएससी’ व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत एक क्षेत्र के जनशिक्षक दूसरे क्षेत्र में जाकर कक्षा दूसरी के हर बच्चे का निष्पक्ष असेसमेंट करेंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक व अन्य विभागों के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को भी सुपरविजन का जिम्मा सौंपा गया है।संयुक्त संचालक सोनी ने कहा कि भारत सरकार और मध्य प्रदेश शासन की एफएलएन (मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान) योजना के तहत कक्षा 1 से 3 के बच्चों की समझ विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों और जनशिक्षकों से अपील की कि वे इस असेसमेंट को प्री-बोर्ड या बेसलाइन टेस्ट की तरह पूरी निष्पक्षता से करें, क्योंकि जब तक स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आएगी, तब तक सुधारात्मक कदम उठाना संभव नहीं होगा।
रोडमैप की विस्तृत जानकारी देते हुए ‘निपुण’ टीम के प्रतिनिधि विवेक तिवारी ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि यदि कोई छात्र 75% से अधिक अंक लाता है तो वह ‘निपुण विद्यार्थी’ कहलाता है। जिस कक्षा के 80% बच्चे निपुण हों वह ‘निपुण कक्षा’ और जिस शाला की सभी कक्षाओं के 80% बच्चे यह स्तर प्राप्त कर लें, वह ‘निपुण शाला’ कहलाती है। वर्तमान में जबलपुर के लगभग 1500 विद्यालयों में से करीब 200 शालाएं ही निपुण स्तर पर हैं। इस रोडमैप के तहत पहले वर्ष 600 शालाओं, दूसरे वर्ष 1000 शालाओं और तत्पश्चात 1300 से अधिक शालाओं को निपुण बनाकर पूरे जिले को ‘निपुण जिला’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विद्यालयों का श्रेणीकरण, त्रैमासिक अकादमिक कार्य योजना, क्वार्टरली लर्निंग रिपोर्ट द्वारा समीक्षा तथा मेंटर्स के क्षमता वर्धन जैसे चार प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा।इस अवसर पर अतिथियों ने एक सिंगल क्लिक के माध्यम से निपुण रोडमैप का डिजिटल शुभारंभ किया। इस दौरान शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक घनश्याम सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे तथा जिला परियोजना समन्वयक योगेश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अभियान को सफल बनाने के लिए शपथ भी ली गई।
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