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दीन दयाल रसोई योजना का कौन है दीनानाथ ?

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सिहोरा :गरीबों के लिए सरकार द्वारा बनाई गई दीन दयाल रसोई योजना देखरेख के अभाव में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है,आलम यह है की सिहोरा नगर में दीन दयाल रसोई योजना मनमर्जी से संचालित हो रही है, ऐसे में सवाल उठता है की इस रसोई योजना की देखरेख कौन कर रहा हैं ?कौंन है इसका सरंक्षक है ? या फिर दीन दयाल रसोई योजना का कौन है दीनानाथ ?

यह है मामला 

पांच रुपये में भरपेट भोजन देने की सरकार की मंशा निगरानी के अभाव में केवल पोर्टल पर अपडेट हो रही है।जिसके चलते दीन दयाल रसोई योजना का संचालन अब केवल दिखावा बनकर रह गई है। गरीबों को न तो पर्याप्त भोजन मिल रहा है, न ही भोजन की गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है। भोपाल से संचालित इस योजना में रोटी, सब्जी और चावल तक सीमित मेन्यू गरीबों का पेट भरने में असमर्थ है। संचालक के फर्जी दावों और फर्जी लाभार्थियों की संख्या दर्ज कर सरकार को धोखा देने की खबरें सामने आई हैं। जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। प्रशासन के नुमाइंदों के गैर जिम्मेदार बयान तथा लापरवाही और संचालक की अनियमितताओं ने गरीबों के लिए बनी इस योजना को मजाक बना दिया है।

अनेक अनियमितता जिम्मेदार बेखवर

वर्तमान में योजना का संचालन कर रही संस्था ने अपने ढंग से नियमों को बदल दिया है, जिससे गरीबों को ना तो भरपेट भोजन मिल रहा है और ना ही भोजन की गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है। रसोई में ना तो मीनू के अनुसार खाना बन रहा है, और सिर्फ रोटी, सब्जी और चावल से काम चलाया जा रहा है। गरीबों का कहना है कि दो रोटी और हाफ प्लेट चावल में पेट नहीं भरता। इस योजना का संचालन भोपाल से किया जा रहा है, जो दावा करता है कि उन्होने अब तक 57731 गरीबों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराया है,वहीं नये वर्क आर्डर जनवरी 2026 से 10 फरवरी तक मात्र 40 दिन जिनमें अवकाश के दिवस भी शामिल है 3717 लोगों को भोजन उपलव्ध कराया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रसोई की खाली पड़ी कुर्सीया चीख चीख कर बोल रही है की गुणवत्ताहीन भोजन के कारण लाभर्थीयो की संख्या दहाई का आकंड़ा भी पार नहीं करती।इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना का संचालन किस प्रकार हो रहा है। लंबे समय से इस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। नगरपालिका और संचालक के अनुसार, दीन दयाल रसोई में रोजाना 150 से 200 लाभार्थी भोजन कर रहे हैं, जबकि सूत्रों की माने तो यहां पर घटिया भोजन की वजह से लगभग 20 से 25 लोग ही भोजन ले रहे हैं। इसके बावजूद संचालक के संचालक फर्जी नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करके लाभार्थियों की संख्या बढ़ा रहे हैं। इस प्रकार फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। पहले भी इस तरह की धांधली सामने आ चुकी है, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

सार्वजनिक स्थल की जगह वाचनालय में संचालित

योजना को क्रियान्वित करने म.प्र.शाशन की मंशा थी की दुरदराज ग्रामो से आने वाले दिहाड़ी मजदुर गरीबो को स्वच्छ स्थान पर भरपेट भोजन पानी प्राप्त हो सके।लेकिन संचालक एंव स्थानीय प्रशाशन की मिली भगत से बस स्टेंड रेल्वे स्टेशन सिविल अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थल को छोड़कर नगरपालिका के वाचनालय भवन में संचालित किया जा रहा है ताकी भारी संख्या में लाभर्थीयो की संख्या में घालमेल किया जा सके।

यह है योजना का उद्देश्य

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत प्रदेश सरकार द्वारा प्रति व्यक्ति को पांच रुपये में भरपेट भोजन सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक साफ-सुथरी जगह पर बैठाकर खिलाना है। भोजन करने से पहले लाभार्थियों से पांच रुपये और मोबाइल नंबर लिया जाता है, जिसे रोजाना पोर्टल पर अपडेट किया जाता है। इसके बदले में शासन समूह को प्रति व्यक्ति 125 ग्राम गेहूं, 100 ग्राम चावल और दस रुपये देता है। यह योजना गरीबों की भलाई के लिए शुरू की गई थी, लेकिन वर्तमान में इसे केवल कमाई का जरिया बना दिया गया है। प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके और दीन दयाल रसोई योजना अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सके।

इनका कहना है,
भवन का कार्य चल रहा है कार्य पुर्ण होते ही दीन दयाल रसोई स्थांतरित की जायेगी।
जय श्री चौहान
मुख्य नगर पालिका अधिकारी सिहोरा

इनका कहना है ,योजना भोपाल से संचालित है संचालक जो जानकारी अपलोड करते है हम केवल वो बता सकते हैं कार्यालय में ओर भी काम है रोज चेक नहीं किया जा सकता,
कल्पना दिक्षीत आजिविका मिशन

 

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