मझगवां में जो हुआ वो वायरल हो गया,क्या यही सब हो रहा है सरकार?ग्राम कोटवारों के अलग जलबे




What happened in Majhgawan has gone viral, is this the condition of government employees:
(पवन यादव) देशभक्ति जनसेवा का संकल्प लेकर लोग पुलिस में भर्ती होते हैं साथ ही अन्य विभागों में भी लोग ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाने का संकल्प लेकर सरकारी नोकरी में पदस्थ होते हैं, सरकार उन्हें जनता की सुरक्षा और आमजन को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी के बदले वेतन देती है, ताकि अमन चैन शांति बनी रहे और सरकारी योजनाओं का लाभ गरीब से गरीब तक पहुँच सके,लेकिन क्या सरकारी वेतन लेकर अधिकारी कर्मचारी ईमानदारी से अपना काम कर रहे हैं ?हम बात आज एक विभाग की नहीँ बल्कि सभी सरकारी विभागों की कर रहें हैं।
मझगवां में जो हुआ वायरल हो गया
रविवार 11 मई की रात जबलपुर जिले के मझगवां में टी आई और पुलिस स्टाप की दबंगई का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है,वीडियो में साफ देखा जा सकता है जनता की रक्षा करने वाले जनता के रक्षक किस कदर आमजन के प्रति सम्मान करते हैं,और हमारी पुलिस इतनी सक्रिय है की यदि एक आम व्यक्ति की गाड़ी सड़क पर खड़ी मिल जाये तो किस कदर भरी जनता के बीच उस व्यक्ति पर हाथापाई और उसे घसीटकर जबरजस्ती थाना ले जाने में कोई कोर कसर नहीँ छोड़ती ,फिर उन्हें पति को छुड़ाती महिला और रोता बच्चा भी दिखाई नहीं देता यहां तक कि उस दौरान पुलिस के सामने ही जनता का विरोध भी नहीँ दिखाई पड़ता है,यदि इसी तरह का रवैया पुलिस अपराध और अपराधियों के प्रति दिखाये तो क्षेत्र से अपराध खत्म होने में देर नहीं लगेगी,मझगवां की घटना तो वायरल हो गई नहीं तो क्या था, इस बात की समीक्षा मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव को एक बार जरूर करनी चाहिए ।
क्या सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने कोई ठोस कदम उठाएगी ?
भ्रष्टाचार का नाम सुनते ही लोगों के जहन में एक ही बात आती है रुपयों के मांग की बात सही भी है,यदि आज के दौर में आप अपना लीगल काम भी बिना रुपये दिये करवा लो तो आपने मानलो यज्ञ कर लिया हो लेकिन यज्ञ भी ऐसा जिसमे एक सप्ताह नहीं बल्कि 6-6 महीने भी लग सकते हैं, उसके लिए भी आपको निडरता चाहिए सरकारी कर्मचारियों की सरकारी हेल्पलाइन में ही शिकायत करनी पड़ेगी तब कहीँ जाकर काम होने की कुछ हद तक उम्मीद रहेगी,नहीं तो आपकी शिकायत अधिकारी ही कटवा देंगे ।और लोग इस उम्मीद में भटकते रहते हैं की उन्हें न्याय मिलेगा ।
शिकायत कर्ता के जेब मे नजर
आज के समय मे आप किसी भी काम को करवाने सरकारी दफ्तर जाओ तो जरूरी नहीं है की आपका काम बिना चढ़ोत्तरी के आसानी से सम्पन्न हो जाये,हालात यह होती जा रही है आपको अपना काम करवाने के लिए नेता की मेहरबानी हो या फिर आपके जेब में रुपये हो या फिर दोनों नहीं है तो सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते -लगाते आपकी चप्पलें घिस जायेंगी लेकिन आपको न्याय नही मिल पायेगा ।
ग्राम कोटवारों के जलबे
कुछ यही हालात ग्रामो के भी हैं,वहीं यदि हम ग्रामों की बात करें तो ग्रामों में कोटवारों को जनता तक सरकारी कार्यों की जानकारी पहुँचाने और प्रशासन और जनता के बीच कड़ी बनने की एवज में लगभग 7 एकड़ जमीन और हर माह वेतन के रूप में नगद राशि दी जाती है लेकिन क्या सभी कोटवार ईमानदारी से काम करते हैं,जनता परेसान रहे तो रहे गांव में अपना रोब दिखाते फिरते हैं ? या फिर पुलिस -प्रशासन औऱ अन्य विभाग की आवाभगत करके कोटवार अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगे रहते हैं ,इस बात की भी जमीनी हकीकत सरकार को देखनी चाहिए ।और स्वार्थी कोटवारों को पद से हटाकर उनको दी गईँ सरकारी सुविधाएं छीनते हुए किसी योग्य व्यक्ति को ग्राम कोटवार का पद देना चाहिए।अब देखना होगा कि पूरे प्रदेश में सुशासन स्थापित करने का संकल्प करने वाली सरकार कब तक जमीनी हकीकत तक पहुँचती है।















































