साल नया अवैध शराब के अड्डे पुराने,एमआरपी से ज्यादा कीमत में बिक रही शराब ,गांव- गांव नशे का फलता- फूलता अवैध कारोबार




पवन यादव
वर्ष 2024 के खत्म होने के बाद अंग्रेजी नया साल 2025 सुरु हो गया है,लेकिन अभी भी अवैध शराब के पुराने अड्डे गुलजार है,ठेकेदार ने गांव -गांव शराब बेचने के लिए एजेंट बैठा रखे हैं जिससे गांव के मासूम बच्चे शराब के नशे की लत में पड़कर अंदर से खोखला होते जा रहे हैं।शराब के कारण गांव में भी विवाद झगड़े आम होते जा रहे हैं।पेकारी के रूप में गांव -गांव में आसानी से मिलने वाली शराब के कारण गांव से भी अब सुख शांति खत्म होती जा रही है।शाम होते -होते सिहोरा के गौरी तिराहा में स्तिथ सब्जी मंडी ओपन अहाता में तब्दील हो जाती है तो वहीं मझोली वायपास में स्तिथ शराब दुकान के बगल से ही ओपन अहाता में शराबी जाम छलकाते नजर आते हैं,अब यही आंधी गांव की तरफ भी चली गई है ।
साल नया अड्डे पुराने कार्यवाही के नाम पर रश्म अदायगी
ठेकेदार द्वारा गांव -गांव बिक़वाई जाने पेकारी अभी भी जारी है,साल नया है लेकिन अवैध शराब के अड्डे अभी भी पुराने चल रहे हैं, वैसे तो सरकार आबकारी विभाग को वेतन इसी बात की देती है की शराब से सबंधित मामले जैसे की एमआरपी रेट से ज्यादा या फिर बिकने वाली अवैध शराब पर कार्यवाही करते हुए जहरीली शराब के साथ किसी भी प्रकार की अवैध शराब के खिलाफ कार्यवाही कर शराब के अवैध कारोबार पर रोक लगाते हुए अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाये।इन सबकी जिम्मेदारी आबकारी विभाग को दी गई है,इतना ही इस अवैघ कारोबार पर नकेल कसने की जबाबदारी पुलिस के पास भी है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं ,जिसका जीता जागता उदाहरण सिहोरा अंग्रेजी शराब दुकान सहित धनगवा ,खलरी में शराब के एमआरपी रेट से ज्यादा प्रत्येक पाव में 10 से 20 रुपये लिए जाने का मामला और लालपुरा ,गोरहा ,गंजताल ,डुंडी ,मजोली ,मडई ,छपरा ,दिनारी खम्हरिया सहित अन्य ऐसे गांव है जहाँ पर ठेकेदार ने पैकारी के रूप में अवैघ शराब बेचने के लिये एजेंट बैठा रखे हैं।
ठेकेदार पर मेहरबान क्यों है विभाग ?
अब ऐसे में लोगों के दिलोदिमाग में एक ही सवाल है की देशी के जिस पाव पर एमआरपी रेट अधिकतम 70 रुपये अंकित है वो 100 रुपये में दुकान से और पेकारी के एजेंट 110 रुपये में क्यों बेंच रहे है, कुछ यही हाल अंग्रेजी शराब के पाव के भी है,सूत्रों की मानें तो सिर्फ वाटल में ही ठेकेदार छूट दे रहे हैं,अब ऐसे में यदि आपको शराब के दामों में कुछ हद तक रियायत चाहिए तो वाटल लो या फिर पाव में एमआरपी से ज्यादा 10 से 20 रुपये दो हलाकि इस बात की जानकारी जिम्मेदारों को है लेकिन जिम्मेदार जानकार भी अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं।अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकारी नियमो का पालन ही नहीँ करवाना था तो सरकार ने नियम ही क्यों बनाये ?















































