अक्षय तृतीया पर वितरित होगा पलाश का शीतल शरबत और सत्साहित्य




राजेश मदान बैतूल। वैशाख शुक्ल तृतीया की महिमा मत्स्य, स्कंद, भविष्य, नारद पुराणों व महाभारत आदि ग्रंथों में है। इस दिन किये गये पुण्यकर्म अक्षय (जिसका क्षय न हो) व अनंत फल दायी होते हैं, अतः इसे ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं। श्री योग वेदांत सेवा समिति के संरक्षक राजेश मदान ने बताया कि भविष्य पुराण के अनुसार यह सर्व सौभाग्यप्रद युगादि तिथि यानी सतयुग व त्रेता युग की प्रारम्भ तिथि है।इस दिन किसी भी मांगलिक कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती यानी पूरा दिन शुभ मुहूर्त होता है और इस दिन जो भी जप, तप, व्रत, दान आदि सत्कर्म किया जाता है उसका पुण्य फल अक्षय हो जाता है। अतः इस दिन प्रयत्न पूर्वक दान आदि सत्कर्म करना ही चाहिए। इस दिन सुपात्र को पानी के घड़े, पंखे, खाँड़ के लड्डू, जूते- चप्पल, छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गौ, वस्त्र आदि का दान अक्षय पुण्यदायी है।
इस दिन पितृ-तर्पण करना भी अक्षय फलदायी है।
अन्न, जल के दान की भी विशेष महिमा है इसी को ध्यान रखते हुए पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की सत्प्रेरणा से श्री योग वेदांत सेवा समिति बैतूल द्वारा आज बुधवार प्रातः 11 बजे से देर शाम तक गंज में काश्मीर क्लॉथ स्टोर्स के सामने स्थित काश्मीर चौक पर धूप में तपते हजारों लोगों को पलाश के फूलों से बने शीतल शरबत और पूज्य बापूजी के सत्साहित्य का वितरण किया जावेगा। श्री मदान ने बताया कि पलाश के फूलों से बना शरबत शारीरिक तपन को दूर कर गर्मी सहन करने की शक्ति भी प्रदान करता है और पूज्य बापूजी की अमृतवाणी से निर्मित सत्साहित्य मानसिक तपन और तनाव को शांत कर आध्यात्मिक उन्नति कराता है। अतः सभी सेवाभावी साधकों व धर्मप्रेमी जनता से आग्रह है कि इस अक्षय पुण्यदायी तिथि में शीतल शरबत और सत्साहित्य का अवश्य लाभ लेवें।















































