कटनी की उमरियापान बनी देश की पहली नगर परिषद,सभी वार्डों के नाम होंगे परमवीर चक्र विजेताओं के नाम
जबलपुर :प्रदेश के कटनी जिले की ढ़ीमरखेड़ा तहसील में नवगठित नगर परिषद उमरियापान देश की संभवत: ऐसी पहली नगर परिषद बन गई है, जिसके सभी 15 वार्डों के नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गये हैं। मध्यप्रदेश के असाधारण राजपत्र में 31 दिसंबर 2025 को विधिवत तौर पर वार्डों के विस्तार क्षेत्र और नामकरण की अधिसूचना का प्रकाशन हो गया है।कटनी जिले के कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा राजपत्र में प्रकाशित कराई गई अधिसूचना में सभी 15 वार्डों के नाम भारत के अमर शहीदों परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गये हैं। यह अनोखी पहल अमर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को स्थायी श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ आने वाली पीढि़यों में राष्ट्रभक्ति और वीरता की भावना जागृत करने का जीवंत प्रयास है। इस नामकरण के बाद उमरियापान की सड़कें, गलियां और वार्ड शहीदों के सर्वोच्च बलिदान की शौर्य गाथाओं के प्रतीक बन गये हैं।
नवगठित उमरियापान नगर परिषद के वार्डों के नाम
मेजर पीरू सिंह के नाम पर नगर परिषद उमरियापान के *वार्ड क्रमांक 1* का नाम रखा गया है। पीरू सिंह शेखावत 6 राजपूताना राईफल्स में कंपनी हवलदार मेजर थे। जुलाई 1948 में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के टिथवाल सेक्टर में भयानक हमला किया। इस दौरान पीरू सिंह की टुकड़ी के ज्यादातर जवान घायल हो गये थे या शहीद हो गये थे। लेकिन पीरू सिंह ने अकेले ही मशीन गन से हमला कर पोस्ट पर कब्जा कर लिया और इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट को खाली कराया, लेकिन इस दौरान वे शहीद हो गये।मेजर धन सिंह थापा के नाम पर *वार्ड क्रमांक 2* का नाम रखा गया है। अगस्त 1949 में भारतीय सेना के 8वीं गोरखा राइफल्स में कमीशन अधिकारी के रूप में शामिल मेजर धन सिंह थापा परमवीर चक्र से सम्मानित हुये थे। मेजर थापा ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान लद्दाख में चीन की सेना का सामना किया था।मेजर होशियार सिंह के नाम पर *वार्ड क्रमांक 3* का नाम रखा गया है। मेजर होशियार सिंह का 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बड़ा योगदान है। पाकिस्तानी सेना 1971 में जब सकरगढ़ सेक्टर पर कब्जा कर बैठी थी, तब सीधी लड़ाई में होशियार सिंह ने पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। पाकिस्तानी सेना को अपने साथियों की लाशें छोड़कर भागने को मजबूर होना पड़ा। मेजर होशियार सिंह को परमवीर चक्र का पुरस्कार उनके जीवित रहते ही प्रदान किया।नवगठित नगर परिषद के *वार्ड क्रमांक 4* का नाम कैप्टन विक्रम बत्रा के नाम पर रखा गया है। करगिल युद्ध के दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा ने दो महत्वपूर्ण चोटियों को पाकिस्तानियों के कब्जे से छुड़ाया था। 1 जून 1999 को उनकी टुकड़ी को करगिल युद्ध में भेजा गया। विक्रम बत्रा ने जान की परवाह न करते हुये लेफ्टिनेंट अनुज नैय्यर के साथ कई पाकिस्तानियों को मौत के घाट उतारा। कारगिल युद्ध के दौरान उनका कोड नाम शेरशाह था। कारगिल युद्ध में शहीद हुये विक्रम बत्रा को मरोणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया।उमरियापान नगर परिषद के *वार्ड क्रमांक 5* का नाम शहीद सेकण्ड लेफ्टिनेंट अरूण खेत्रपाल के नाम पर रखा गया है। श्री खेत्रपाल भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाते हुये वीरगति को प्राप्त हुये। उनके शौर्य और बलिदान को देखते हुये उन्हें मरणापरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के नाम पर नगर परिषद के *वार्ड क्रमांक 6* का नामकरण किया गया है। ये चौथी कुमाऊँ रेजीमेंन्ट की डेल्टा कंपनी के अधिकारी थे। इन्होंने 1947 में पाकिस्तानी घुसपैठिये कबाइलियों के विरूद्ध अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया और मुंहतोड़ जवाब दिया और एक मोर्टार के विस्फोट में शहीद हुये थे, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान के मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया। मेजर शर्मा देश के पहले परमवीर चक्र विजेता बने। शहीद मेजर शैतान सिंह के नाम पर *वार्ड क्रमांक 7* का नाम रखा गया है। मेजर शैतान सिंह ने भारत-चीन के 1962 के युद्ध में करीब 17 हजार फीट की ऊँचाई पर हाड़ कपा देने वाली ठंड और बर्फीली हवाओं के बीच कुमाऊँ रेजीमेंट की 13वीं बटालियन के सैनिकों की अगुवाई करते हुये चीनी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिये और उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया।सूबेदार जोगिंदर सिंह के नाम पर नवगठित नगर परिषद के *वार्ड क्रमांक 8* का नामकरण किया गया है। उन्होंने 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान अदम्य साहस दिखाते हुये चीनी सैनिकों पर भीषण हमला किया। इस बीच सूबेदार जोगिंदर सिंह को गोली लगी लेकिन उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुये चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ा दिये। सर्वोच्च बलिदान देनें और सैनिकों को युद्ध के दौरान प्रेरित करने और अंत तक लड़ने के लिये भारत सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया।कैप्टन मनोज कुमार पांडे के नाम पर *वार्ड क्रमांक 9* का नामकरण किया गया है। कैप्टन मनोज कुमार पांडे ने कारगिल युद्ध में 3 जुलाई 1999 को भारत मां की रक्षा करते हुये 24 साल की उम्र में सर्वोच्च बलिदान देकर इतिहास में अमर हो गये।परमवीर चक्र से से सम्मानित मेजर रामस्वामी परमेश्वरम के नाम पर पर *वार्ड क्रमांक 10* का नाम रखा गया है। वे वीरता की अद्भुत मिसाल कायम करते हुये 25 नवंबर 1987 को शांति अभियान के दौरान श्रीलंका में शहीद हुये थे। सीने में गोली लगी होने के बाद भी उन्होंने 6 उग्रवादियों को ढेर कर दिया था। उनके इस साहसपूर्ण कार्य के लिये उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा गया।सेकेंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे के नाम पर *वार्ड क्रमांक 11* का नाम रखा गया है। उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के कबाइलियों के हमले में वीर से परमवीर हो गये। उन्होंले लगातार 3 दिन तक बिना खाये-पिये पाकिस्तानी फौजियों से डटकर मुकाबला किया। उनके इस योगदान पर उन्हें जीवित रहते ही परमवीर चक्र से नवाजा गया। शहीद अब्दुल हमीद के नाम पर *वार्ड क्रमांक 12* का नाम रखा गया है। शहीद अब्दुल हमीद ने 1965 के भारत पाकिस्तान की लड़ाई में खेमकरन सेक्टर में पाकिस्तान के 7 पैटर्न टैंकों के परखच्चे उड़ा दिये। इसी दौरान वे दुश्मनों से लड़ते हुये शहीद हो गये। लेकिन उन्होंने शहीद होने से पहले दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिये। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया।शहीद अल्बर्ट एक्का 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में जख्मी होने के बावजूद दुश्मन की सेना की छक्के छुड़ा दिये और हैण्ड ग्रेनेड से पाकिस्तानी बंकर उड़ा दिये और अंतत: शहीद हो गये। श्री एक्का को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। इनके नाम पार *वार्ड क्रमांक 13* का नामकरण किया गया।कैप्टन गुरबचन सिंह सालारिया के नाम पर *वार्ड क्रमांक 14* का नामकरण किया गया है। उन्होंने सन 1961 में कांगों में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान अद्भुत वीरता का प्रदर्शन किया था।लांस नायक करम सिंह के नाम पर *वार्ड क्रमांक 15* का नाम रखा गया है। उन्हें 1947-1948 के भारत पाकिस्तान युद्ध में तिथवाल सेक्टर में अदम्य वीरता के लिये उन्हें परमवीर चक्र प्रदान किया गया।
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