भूला–टिकरिया में खनन माफिया की दबंगई, जांच रोकने जेसीबी से खुदवा दी रास्ते में गहरी नाली

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सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद :स्लीमनाबाद तहसील के भूला–टिकरिया क्षेत्र में अवैध बॉक्साइट उत्खनन करने वाले खनन माफिया अब पूरी तरह बेखौफ नजर आ रहे हैं। जीपीएस लोकेशन युक्त प्रमाण सामने आने और लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने से माफियाओं के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि अब उन्होंने प्रशासनिक जांच को रोकने के लिए रास्ते में जेसीबी से गहरी नाली खुदवा दी है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खनन क्षेत्र तक पहुंचने वाले मुख्य रास्ते को जानबूझकर काट दिया गया है, ताकि कोई भी अधिकारी या जांच दल सीधे वाहन से अवैध खनन स्थल तक न पहुंच सके। इस नाली के कारण चार पहिया वाहन आगे नहीं जा पाते, जिससे जांच में देरी हो और खनन माफिया को समय मिल सके।

सूचना मिलते ही हट जाते हैं मजदूर और वाहन

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया को जैसे ही किसी अधिकारी के आने की भनक लगती है, मुखबिरों के जरिए तुरंत सूचना दे दी जाती है। इसके बाद रात में खनन में लगे मजदूर, ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें मौके से हटा ली जाती हैं। रास्ते में खुदवाई गई नाली इस पूरी योजना का अहम हिस्सा बताई जा रही है।

रात में 3–4 ट्रैक्टर और जेसीबी से हो रहा खनन

मिली जानकारी के मुताबिक प्रतिदिन रात के समय 3 से 4 ट्रैक्टर और एक जेसीबी मशीन मौके पर पहुंचाई जाती है। देर रात से सुबह लगभग 5 बजे तक लगातार बॉक्साइट का उत्खनन किया जाता है। सुबह होते ही मशीनें और वाहन हटा लिए जाते हैं, जिससे दिन में स्थल शांत नजर आता है।

खनिज व राजस्व विभाग के अधिकारी बने मूकदर्शक

बताया जा रहा है कि शिकायत के साथ प्रस्तुत जीपीएस लोकेशन युक्त तस्वीरों से खनन स्थल की सटीक पहचान संभव है, इसके बावजूद राजस्व, पुलिस एवं खनिज विभाग के अधिकारी अब तक मौके पर जाकर जांच करने से कतरा रहे हैं। इसी प्रशासनिक निष्क्रियता का लाभ उठाकर खनन माफिया अब खुलेआम रास्ते तक काटने की हिम्मत दिखा रहा है।शिकायत में अजय गौतम नामक व्यक्ति का नाम भी अवैध खनन से जुड़ा बताया गया है, लेकिन न तो उससे पूछताछ की गई है और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही तय की गई है। इससे यह आशंका और गहरी हो रही है कि कहीं न कहीं खनन माफिया को संरक्षण प्राप्त है।शासन को लाखों का नुकसान, पर्यावरण पर गंभीर असर ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध खनन शासकीय भूमि पर किया जा रहा है, जिससे शासन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण को गंभीर क्षति, किसानों की जमीनों को नुकसान और ग्रामीण सड़कों की हालत भारी वाहनों के कारण बद से बदतर होती जा रही है।

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