सुपर सीडर से सीधे बोनी,मुर्रई के किसानों ने पेश की पर्यावरण संरक्षण की मिसाल

जबलपुर, जिले में जहाँ एक ओर 1.9 लाख हेक्टेयर विशाल गेहूँ रकबा जिले की कृषि संपन्नता का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर नरवाई जलाने की घटनाएं जिले के पर्यावरण को प्रभावित भी करती है। ऐसी स्थिति में जिले के विकासखण्ड पाटन के ग्राम मुर्रई का मॉडल पूरे समाधान की राह दिखाता है। कृषि अधिकारियों के अनुसार ग्राम मुर्रई के लगभग सभी किसान पिछले करीब तीन वर्षों से नरवाई न जलाकर सुपर सीडर से सीधे बोआई कर रहे हैं।अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी क्षेत्र निरीक्षण के दौरान आज ग्राम मुरई पहुंची, जहां कृषक आदित्य पटेल गेहूं फसल के बाद नरवाई जलाए बिना ही सुपर सीडर से उड़द फसल की बोनी कर रहे थे।कृषक आदित्य पटेल ने बताया कि वे विगत तीन वर्षों से गेहूं फसल के बाद नरवाई में आग लगाने की बजाय सुपर सीडर से बोनी कर रहे हैं। इससे खेत की जुताई का खर्च कम हो रहा है और सीधे बुआई संभव हो पा रही है। नरवाई को न जलाने से फसल कटाई के बाद बचे अवशेष खाद के रूप में मिट्टी को पोषण प्रदान करते हैं और नमी सरंक्षण में सहायक होने के बीजों का अंकुरण बेहतर होता है।
सुपर सीडर से और पुरानी पद्धति में मुख्य अंतर
सुपर सीडर से और पुरानी पद्धति से बोआई में मुख्य अंतर बताते हुये आदित्य ने कहा कि सुपर सीडर से बोआई में समय की बचत होती है। जबकि, नरवाई जलाने के बाद खेत तैयार करने में दस दिन लगते हैं। पुरानी पद्धति से केवल खेत की जुताई पर खर्च तीन हजार रुपये से चार हजार रुपये प्रति एकड़ आता है। वहीं, सुपर सीडर से मात्र 1 हजार 200 रुपये से 1 हजार 500 रुपये प्रति एकड़ में खेत की जुताई से लेकर बोआई तक का काम पूरा हो जाता है।पुरानी पद्धति में खाद अलग से डालनी पड़ती है, जबकि सुपर सीडर से बीज और खाद एक साथ सही गहराई पर गिरते हैं। पुरानी पद्धति में बीजों का अंकुरण 70 से 80 प्रतिशत और सुपर सीडर स बीजों का अंकुरण 90 से 95 होता है। इसके साथ ही आदित्य ने बताया कि उनके गांव में 14 सुपर सीडर, 12 स्ट्रॉ रीपर एवं 6 हार्वेस्टर जैसे यंत्र है, जो किसानों विभागीय योजनाओं के तहत अनुदान पर प्राप्त हुए। इनके फलस्वरूप गांव के अन्य किसान भी नरवाई प्रबंधन हेतु सुपर सीडर का उपयोग कर पर्यावरण का संरक्षण तो कर ही रहे है साथ ही लागत में कमी होने दे अधिक आय की और बढ़ रहे है।किसानों से परिचर्चा के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग की योजनाओं के तहत अनुदान पर कृषि यंत्र के लिए आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषक एमपी ऑनलाइन के माध्यम से विभागीय पोर्टल www.farmer.mpdage.org.in आवेदन कर सकते हैं।निरीक्षण के अंत में डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने इस बात पर जोर दिया कि मुर्रई ग्राम उन्नत कृषि-उन्नत किसान का एक आदर्श उदाहरण है। उन्होंने अन्य गांवों के किसानों से भी अपील की कि वे कृषि अभियांत्रिकी विभाग की योजनाओं का लाभ उठाएं और खेती को आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल बनाएं। निरीक्षण एवं परिचर्चा के दौरान किसान देवेंद्र पटेल, अविनाश पटेल, जयपाल सिंह,आशुतोष पटेल, उमेश सिंह, सत्यम पटेल, पवन पटेल, शुभम पटेल एवंसौरभ पटेल उपस्थित थे।
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