धर्म धरा और संस्कृति का विस्तार करें बटवारा नहीं-मुनि सुधा सागर जी




बहोरीबंद – एक रोग एक समान हो तो दवा भी एक होगी!
आज इतने प्रतिपक्षी और विरोधी लोग होने लगे हैं कि डॉक्टर को भी अनेक तरह की दवाई मिलाकर इलाज करना पड़ रहा है!तभी व्यक्ति ठीक होता है,ठीक ऐसा ही हमारे जीवन में घटित होता है!श्रम में दर्शन सम्यक ज्ञान सम्यक चारित्र यदि प्रथक प्रथक करके जानेंगे तो मोक्ष का मार्ग अपूर्ण ही रहेगा! तीनों की एकरूपता श्रृद्धांध ज्ञान और चरित्र ही मोक्ष का सही स्वरूप है!जैसे रोगी को खिचड़ी दी जाती है फिर भी वह हितकर है!वही दाल चावल पृथक -पृथक कर दिया जाता है तो अहित की श्रेणी में आता है!ऐसा ही श्रद्धान ज्ञान चरित्र की पवित्र त्रिवेणी को अपना विषय बनाएं उक्ताशय के सारगर्भित उद्गार चमत्कारोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र बहोरीबंद मे मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किये!
आगे उन्होंने कहा कि रामराज की सीमाओं के बिस्तार पर कहा कि अयोध्या के विस्तार के लिए मथुरा राज्य छोटे भाई को बैठाया जो अयोध्या राज्य का विस्तार ही था वहां तक रामराज्य ही कहलाता!
यह दुर्योधन की दृष्टि में भिन्न एवं प्रथक है, आज देश में भारत देश अखंड भारत से खंड-खंड हो चुका है!
हमारा भू-भाग असीम था देश को टुकड़ों- टुकड़ों में भारत के आर्यखंड की कल्पना संभव है! यह प्रथक करण की स्थिति ठीक नहीं है हमारी संस्कृति धर्मधारा का विस्तार होना चाहिए बटवारा नहीं!कार्यक्रम के प्रथम चरण में बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया के निर्देशन मे मंदिर जी मे पूजन विधान,अभिषेक एवं सामूहिक शांति धारा का आयोजन बड़ी संख्या में उपस्थित धर्म प्रेमी जनों की उपस्थिति में संपन्न किया गया!
इस दौरान उत्तम चंद जैन, प्रमोद जैन, अनुराग जैन, विनय जैन, मनोज जैन, डा के एल जैन, सुरेन्द्र सिंघई, मनोज मोदी, गोपीचंद जैन, दिनेश जैन,रमेश जैन, प्रशांत जैन,संजय मोदी,नीरज जैन,नरेन्द्र सिंघई, अजय अहिंसा,संतोष जैन,भोलू जैन सहित बड़ी संख्या में सकल जैन की उपस्थिति रही!















































