उपार्जन केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण करने किसी भी समय,कहीं भी उतर सकता है मुख्यमंत्री डॉ. यादव का हेलीकॉप्टर

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जबलपुर,मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में जारी गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आने वाले दिनों में प्रदेश के किसी भी जिले के उपार्जन केंद्रों का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर किसी भी समय और कहीं भी उतर सकता है, ताकि व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत का जायजा लिया जा सके। इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों से सीधा संवाद करना और यह सुनिश्चित करना है कि शासन-प्रशासन द्वारा निर्धारित सभी सुविधाएं किसानों को सुलभता से मिल रही हैं या नहीं।किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष उपार्जन केंद्रों पर व्यापक प्रबंध किए हैं। किसानों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए केंद्रों पर पीने के पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान और अन्य जन सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्था की गई है। उपार्जन प्रक्रिया को और अधिक लचीला बनाते हुए अब किसानों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी केंद्र पर जाकर अपनी उपज बेच सकते हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।तौल प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सरकार ने प्रत्येक केंद्र पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी है, जिसे आवश्यकतानुसार जिले स्तर पर और भी बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, उपार्जन केंद्रों की कार्यक्षमता में भी बड़ा इजाफा किया गया है। स्लॉट बुकिंग की प्रतिदिन की क्षमता को 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है, जिसे विशेष परिस्थितियों में 3000 क्विंटल तक ले जाने के अधिकार जिला प्रशासन को दिए गए हैं। किसानों की सुविधा के लिए अब प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग और खरीदी का कार्य निरंतर जारी रहेगा।किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए सरकार 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का विशेष बोनस दे रही है, जिससे अब कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। गुणवत्ता मानकों में भी किसानों को बड़ी राहत दी गई है; चमक विहीन गेहूं की सीमा अब 50 प्रतिशत तक मान्य होगी, जबकि सुकड़े दानों की सीमा 6 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है।उपार्जन केंद्रों पर बारदाने, हम्माल, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी तकनीकी सुविधाओं के साथ-साथ उपज की सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसे उपकरण भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए गए हैं। इन योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी पोस्टरों और बैनरों के माध्यम से हर केंद्र पर पहुंचाई जा रही है ताकि किसान अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और बिना किसी परेशानी के अपनी फसल बेच सकें।

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