बहोरीबंद के 9 जनशिक्षा केंद्रों मै लग रहा शिविर

बहोरीबंद/स्लीमनाबाद: बहोरीबंद विकासखंड अंतर्गत शाला त्यागी बच्चों को मुख्य धारा मै लाने हेतु एवं अपार आईडी खाता अपडेशन आदि के कार्य को शत प्रतिशत करने के लिए विकासखंड के 9 जन शिक्षा केंद्रों मै शिविर चल रहे है!
बुधवार को जन शिक्षा केंद्र स्लीमनाबाद मै शिविर आयोजित किया गया!जहाँ समस्त शाला प्रभारियो की उपस्थिति मे व्यक्तिगत जानकारी लेकर कार्य कराया गया!जिसमें 29 बच्चो की मेपिग,18 डुप्लीकेट आई डी,22 बच्चे परिवार सहित अन्यत्र जगहो मे पलायन कर चुके है!बीआरसी प्रशांत मिश्रा ने बताया किचाइल्ड ट्रैकिंग ऐप के माध्यम से ऑन स्पॉट एडमिशन हेतु चिन्हित छात्रों का विद्यालय में प्रवेश दिलाने, शत प्रतिशत छात्रों की अपार आई डी बनाने, यू डाइस के कार्य पूर्ण करने, फेल गणवेश खातों का सत्यापन सहित पोर्टल संबंधी अन्य कार्यों को पूर्ण कराने जन शिक्षा केंद्रों मै शिविर का आयोजन किया जा रहा है!क्योंकि अपार आईडी न बन पाने का मुख्य कारण बच्चों और उनके अभिभावकों के दस्तावेजों में एकरूपता का अभाव है। कहीं आधार कार्ड में नाम या जन्मतिथि की त्रुटि है, तो कहीं समग्र आईडी, जन प्रमाण पत्र या अंकसूची में भिन्नता दर्ज है। दस्तावेजों में नाम, पिता-माता का नाम अथवा वर्तनी अलग-अलग होने के कारण ऑनलाइन फीडिंग के दौरान दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं, जिससे न केवल विद्यार्थियों के काम अटक रहे हैं!
इस समस्या के समाधान के लिए बहोरीबंद के सभी 9 जन शिक्षा केंद्रों शिविर लगाए जा रहे है!ताकि बच्चों के आधार कार्ड एवं अभिभावकों के दस्तावेजों में सुधार किया जा सके। दस्तावेज दुरुस्त होने के बाद ही अपार आईडी तैयार हो पाएगी।
अपार आईडी है जरूरी
अपार आईडी भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक विशिष्ट डिजिटल शैक्षणिक पहचान संख्या है। यह हर विद्यार्थी के लिए एक स्थायी अकादमिक खाता होता है, जिसमें उसकी पढ़ाई से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है। अपार आइडी से स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक का पूरा अकादमिक रिकॉर्ड एक ही आईडी में सुरक्षित, डिजिटल लॉकर की तरह सभी शैक्षणिक दस्तावेज सुरक्षित रहते हैं, ट्रांसफर या आगे की पढ़ाई में दस्तावेज जमा करने की झंझट कम, शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने में सहायक, छात्रवृत्ति, योजनाओं और उच्च शिक्षा में प्रवेश के समय आसानी। अपार आईडी विद्यार्थियों के भविष्य के लिए बेहद अहम है। ऐसे में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि वे बच्चों के सभी दस्तावेजों में नाम व विवरण की एकरूपता सुनिश्चित करें, ताकि जिले का लक्ष्य पूरा हो सके और विद्यार्थी डिजिटल शिक्षा व्यवस्था का पूरा लाभ उठा सकें।
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