अदालत में सुनवाई नहीं,जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप,सरकार की चुप्पी,क्या आसाराम बापू की मौत का इंतजार कर रहा है पूरा सिस्टम?

जोधपुर | विशेष रिपोर्ट |87 वर्षीय हिन्दू संत आसाराम बापू के स्वास्थ्य, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल अब बेहद गंभीर हो चुके हैं। एक तरफ उनके उपचार के लिए आरोग्यम् अस्पताल ले जाने की मांग अदालत में लंबित है, दूसरी तरफ जोधपुर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और न्यायिक निर्देशों के अनुपालन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच समय बीतता जा रहा है, लेकिन आसाराम बापू के उपचार की मांग पर सुनवाई नहीं हो पा रही।आखिर न्याय, चिकित्सा और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच एक बुजुर्ग कैदी कब तक इंतजार करता रहेगा?
अदालत में दो बार अर्जेंट मेंशनिंग, फिर भी सुनवाई नहीं!
संत श्री आशारामजी आश्रम, अहमदाबाद की ओर से 6 नवंबर 2026 को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, आरोग्यम् अस्पताल में उपचार की मांग वाली अर्जी उस दिन अदालत में सूचीबद्ध थी।याचिकाकर्ता पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो बार अर्जेंट मेंशनिंग भी की, लेकिन मामले का नंबर नहीं आने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।7 नवंबर से अदालत की छुट्टियां शुरू होने के मद्देनजर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) गठित कर तत्काल सुनवाई कराने की अर्जी भी प्रस्तुत की गई थी। लेकिन यह मांग भी स्वीकार नहीं की गई।सवाल यह है कि जब मामला 87 वर्षीय व्यक्ति के स्वास्थ्य और चिकित्सा उपचार से जुड़ा है, तो तत्काल सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा सके?
जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह पर गंभीर सवाल, न्यायिक आदेशों का पालन कौन करवाएगा?
जोधपुर जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह की कार्यप्रणाली भी लगातार सवालों के घेरे में है।आसाराम बापू के पक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि जेल प्रशासन चिकित्सा सुविधाओं और 24 घंटे प्रशिक्षित मेडिकल केयरटेकर की व्यवस्था से संबंधित न्यायिक निर्देशों का समुचित पालन नहीं कर रहा।यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं होगा, बल्कि न्यायिक आदेशों के अनुपालन से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा।क्या जेल अधीक्षक न्यायिक आदेशों से ऊपर हैं? यदि अदालत के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?ऐसे में सवाल उठना लाजमी हो जाता है की क्या न्यायिक देरी जेल प्रशासन को मनमानी का अवसर दे रही है?यह पूरा घटनाक्रम एक गंभीर चिंता पैदा करता है।की एक तरफ उपचार की मांग पर सुनवाई लंबित है, दूसरी तरफ जेल प्रशासन पर चिकित्सा व्यवस्था और न्यायिक निर्देशों के अनुपालन को लेकर आरोप लग रहे हैं।समर्थकों को आशंका है कि लगातार देरी और चिकित्सा संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होने से आसाराम बापू के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।ऐसे में अदालत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इन शिकायतों की तत्काल समीक्षा करनी चाहिए।
मोदी सरकार और भजनलाल सरकार आखिर कब जवाब देंगी?
जेल में बंद व्यक्ति की सुरक्षा और उचित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करना संबंधित जेल प्रशासन और राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।इस मामले में राजस्थान की भजनलाल सरकार से सवाल है कि जेल प्रशासन के विरुद्ध उठ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच कब होगी?केंद्र की मोदी सरकार से भी सवाल है कि जेलों में बंद बुजुर्ग कैदियों के स्वास्थ्य और मानवीय अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रभावी निगरानी व्यवस्था है?
क्या सरकारें किसी गंभीर घटना के बाद ही सक्रिय होंगी?
यदि आसाराम बापू को कुछ हुआ तो जवाबदेही किसकी होगी? यह सवाल आज ही पूछा जाना जरूरी है।यदि भविष्य में आसाराम बापू की मृत्यु जेल में होती है, तो उनकी चिकित्सा व्यवस्था, उपचार में हुई संभावित देरी, जेल प्रशासन के निर्णयों, न्यायिक निर्देशों के अनुपालन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।यदि चिकित्सा लापरवाही या प्रशासनिक चूक सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। ऐसी मृत्यु के मामले में कस्टोडियल डेथ से जुड़े कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
समर्थकों की प्रमुख मांगें
1. आसाराम बापू को तत्काल उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुरूप उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
2. आरोग्यम् अस्पताल में उपचार की मांग पर शीघ्र न्यायिक सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
3. 24 घंटे प्रशिक्षित मेडिकल केयरटेकर से संबंधित न्यायिक निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा हो।
4. जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
5. जेल में आसाराम बापू की चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए।
अब और तारीखें नहीं, जवाबदेही चाहिए
न्यायपालिका का काम केवल सुनवाई की तारीख देना नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंच को प्रभावी बनाना भी है। जेल प्रशासन का दायित्व केवल कैदी को बंद रखना नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा और उचित चिकित्सा सुनिश्चित करना भी है। सरकार की जिम्मेदारी केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी है।87 वर्षीय आसाराम बापू की जिंदगी को प्रशासनिक उदासीनता और प्रक्रियागत देरी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।अगर कोई अनहोनी होती है, तो सवाल केवल एक जेल अधिकारी से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से पूछे जाएंगे।आसाराम बापू को समय पर उपचार चाहिए, न्यायिक आदेशों का पालन चाहिए और उनकी सुरक्षा की ठोस गारंटी चाहिए।
स्रोत: संत श्री आशारामजी आश्रम, अहमदाबाद की आधिकारिक सूचना, 6 नवंबर 2026।
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