सिजेरियन का सच: कब जरूरी,भारत में क्या हैं हालत ?

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नई दिल्ली:आज के दौर में बढ़ते सिजेरियन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, तो वहीँ दो दशक पहले की बात करें तो डॉक्टरों और अस्पतालों द्वारा सामान्य प्रसव का ही प्रयास किया जाता था, और ऑपरेशन (सिजेरियन) केवल बेहद आपातकालीन या जटिल परिस्थितियों में ही किए जाते थे।लेकिन आजकल जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, उच्च रक्तचाप (High BP), मधुमेह (Diabetes), और समय की सुविधा या दर्द के डर से लोग सीधे सिजेरियन का विकल्प चुन रहे हैं।जानकारों की मानें तो वहीँ नॉर्मल डिलीवरी में टांके और शरीर के ऊतकों (tissues) को पूरी तरह से ठीक होने में लगभग 4 से 6 हफ्ते लगते हैं, जबकि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद रिकवरी में अधिक समय और सावधानी की आवश्यकता होती है। आजकल हर दूसरी गर्भवती महिला का सिजेरियन हो रहा है। क्या सच में इतनी जरूरत है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)* ने इस पर साफ कहा है।

क्या कहता है WHO ?

वहीं WHO के अनुसार, सिजेरियन माँ और बच्चे की जान बचाने के लिए जरूरी है, लेकिन सिर्फ तभी जब मेडिकल कारण हो। WHO ने 1985 से ही कहा है कि किसी भी समुदाय में सिजेरियन की दर *10-15%* से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 0857 WHO की नई स्टेटमेंट कहती है की जब सिजेरियन रेट 10% तक बढ़ता है, तो माँ और बच्चे की मौतें कम होती हैं। लेकिन 10% के ऊपर जाने पर मौतें कम होने का कोई सबूत नहीं है। यानी 10% से ज्यादा सिजेरियन करने से फायदा नहीं, बल्कि नुकसान है।

*भारत में हालत क्या है?*

वहीं NFHS-5 (2019-21) के अनुसार भारत में सिजेरियन रेट 7.1% से बढ़कर *21.5%* हो गया है। तेलंगाना में तो 60.7%, तमिलनाडु में 44.9% और आंध्र प्रदेश में 42.4% तक पहुँच गया है। प्राइवेट अस्पतालों में तो 57% से बढ़कर 63% तक हो गया है।

*क्यों बढ़ रहा है?*

WHO मानता है कि कई जगह पैसों के लालच, सुविधा और डर की वजह से अनावश्यक सिजेरियन हो रहे हैं। सिजेरियन एक बड़ी सर्जरी है, इससे जटिलताएं, विकलांगता और मौत तक हो सकती है, खासकर जहाँ अच्छी सुविधा न हो।

*कब जरूरी है सिजेरियन?

– बच्चे की धड़कन कम होना (Fetal Distress)
– बच्चा उल्टा होना, या बहुत बड़ा होना
– माँ को प्री-एक्लेमप्सिया, BP, शुगर, ज्यादा ब्लीडिंग
– पिछला सिजेरियन और अब नॉर्मल में खतरा

*आप क्या करें?*

1. नॉर्मल डिलीवरी को पहली पसंद रखें
2. डॉक्टर से सिजेरियन का लिखित कारण पूछें
3. Robson Classification के बारे में पूछें – WHO इसी से जाँच की सलाह देता है
4. दूसरी राय (Second Opinion) जरूर लें

*निष्कर्ष:* WHO कहता है – किसी टारगेट को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि मरीज की जरूरत पर सिजेरियन होना चाहिए।

> *INDIA POL-KHOL की अपील: डरें नहीं, जागरूक बनें। नॉर्मल डिलीवरी संभव है।

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