इनपर स्वास्थ विभाग की मेहरबानी कब तक ?

जबलपुर:सिहोरा तहसील क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है, इतना ही नहीँ यहाँ पर कई तो बंगाल से आकर अपनी -अपनी दुकानें जमा चुके हैं जिनमे कोई ढाली तो मजूमदार है, कोई मेडीकल के अंदर ही बैठकर इलाज कर रहा है तो कोई बोर्ड में एमबीबीएस बेटे का नाम लिखकर खुद ही एलोपैथिक पद्धति से इलाज के नाम पर लोगों के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ कर रहा है,इनमे से कोई अपने आपको होम्योपैथिक बताता तो कोई आयुर्वेदिक तो कोई यूनानी पद्धति बताते हैं ,और इनके पास एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की कोई डिग्री नहीँ है, लेकिन इलाज ये एलोपैथिक पद्धति से ही करते है।हलाकि समय -समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनपर कार्यवाही तो की जाती है लेकिन लोगों का कहना है की इनका स्थाई इलाज स्वास्थ्य विभाग कब तक करेगा?
स्वास्थ्य विभाग मेहरवान
वहीँ चर्चा है की खितौला रेलवे फ़ाटक के समीप बंगाल के दो डॉक्टर अपनी -अपनी जड़ जमा चुके हैं, और नियम विरुद्ध मरीजों का अंग्रेजी दवाइयों से इलाज करते हुए इंजेक्शन और बॉटल भी लगाते है,एक तो जलंदर भंगदर बबासीर का खुलेआम बोर्ड लगाकर सर्जन बनकर इलाज कर रहा है,करे भी क्यों न क्योंकि एक बार स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन्हीं अवैध गतिविधियों के चलते इनकी क्लिनिक सील कर दी गई थी उसके तीन चार माह बाद फिर से इनकी दुकान को बहाल कर दिया गया ,जबकि ये कोई सर्जन नहीँ हैं उसके बावजूद भी ये बबासीर जलंधर भगन्दर का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं?क्योंकि इनके ऊपर स्वास्थ्य विभाग मेहरवान है,तब तो इनके पास एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने की कोई डिग्री नहीँ है, उसके बावजूद इलाज ये एलोपैथिक पद्धति से ही कर रहे हैं।वहीं इस सबन्ध में हमारे द्वारा जब सिहोरा सीबीएमओ से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीँ हो सका।
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