मुख्यमंत्री से मिलने के बाद सिहोरा वासियों ने बस स्टैंड से अलग किया टेंट

जबलपुर:सिहोरा जिला बनाने की मांग पर अड़े आंदोलन कारियों द्वारा आज सिहोरा के पुराने बस स्टैंड से टेंट अलग कर लिया गया इसके साथ ही अन्न जल त्याग कर बैठे प्रमोद साहू द्वारा भी अनशन खत्म कर दिया गया है,

पत्रकार वार्ता के दौरान नोकझोंक
जिला आन्दोलन समिति द्वारा धरना स्थल पर आज दोपहर को प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी इसी दौरान मुख्यमंत्री से न मिलाने पर कांग्रेस नेता अमोल चौरसिया और राजेश चौबे और जिला आंदोलन समिति के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई ,कांग्रेस नेता अमोल और राजेश का कहना था की हम सुरु से ही आंदोलन में शामिल थे इतना ही नहीँ पूर्व में हुए जिला आंदोलन के दौरान आमोल चोरसिया ने लाठियां भी खाई थीं, लेकिन जब मुख्यमंत्री से मिलने की बात आई तो इनका नाम मुख्यमंत्री से मिलने वालों की लिस्ट से अलग कर दिया गया,अब ऐसे में जिला आंदोलन सर्वदलीय कैसे हुआ ?आखिर क्या डर था और किसके कहने पर मुख्यमंत्री से मिलने वालों की लिस्ट से दो नाम अलग किये गए ?सवाल सही भी था इसी बीच जिला आंदोलन समिति ने बस स्टैंड में चल रहे धरना प्रदर्शन को समाप्त करते हुए सिहोरा जिला आंदोलन को नई दिशा का नाम बताया।
आंदोलन ने लिया अब नया स्वरूप
जिला आंदोलन समिति का कहना है की मुख्यमंत्री से हाल ही में हुई वार्ता के बाद सिहोरा जिला आंदोलन ने अब नया स्वरूप ले लिया है। लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन अब केवल प्रत्यक्ष धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।समिति ने बताया कि अब आंदोलन के तहत सिहोरा को जिला बनाए जाने में शामिल होने वाले सभी संभावित क्षेत्रों और पंचायतों से समर्थन पत्र एकत्र किए जाएंगे। इन समर्थन पत्रों को जिला एवं संभाग प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग को सौंपा जाएगा, ताकि सिहोरा जिले के दावे को तथ्यात्मक और जनसमर्थन के आधार पर मजबूत किया जा सके।इसके साथ ही आंदोलन को निरंतर बनाए रखने के लिए प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को एक अनिवार्य बैठक एवं रैली आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। समिति का कहना है कि इस नियमित आयोजन के माध्यम से सरकार पर लगातार दबाव बनाया जाएगा और जनभावनाओं को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखा जाएगा।
इधर, आंदोलन के प्रमुख चेहरे और अनशनकारी प्रमोद साहू ने एक कन्या के हाथों आहार ग्रहण कर अनशन का स्वरूप बदला। इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव पर डाले गए एक मनोवैज्ञानिक दबाव और सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सरकार तक आंदोलनकारियों की भावना और संवेदनशीलता पहुंचे।लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने सिहोरा में आयोजित पत्रकार वार्ता में आंदोलन के इस नए स्वरूप की औपचारिक जानकारी दी। समिति ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और जनआधारित रहेगा तथा सिहोरा को जिला बनाए जाने तक यह संघर्ष विभिन्न रूपों में जारी रहेगा।
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