धान की फसल पर रोगों का प्रकोप,गुणवत्ता हो रही प्रभावित




सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद- खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान में बीमारी लगने से किसान परेशान है। धान की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।जिससे किसानों को नुकसान होने की संभावना है।बहोरीबंद विकासखण्ड क्षेत्र के पठार अंचल मै वर्तमान मै किसानों की ख़डी फसल सूख रही है या फिर पत्ते पीले पड़ रहे है!जिससे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है!खासतौर पर वर्तमान मै धान की फसल मै अचानक ब्लास्ट ब्लाइट व भुनगी रोग का संक्रमण देखने को मिल रहा है!पठार अंचल के ग्राम चनपुरा, छुरिया, बॉसन, पिपरिया आदि ग्रामो से धान की फसल पर रोग की शिकायते मिल रही है!।इन बीमारियों से किसानों को काफी नुकसान होने की संभावना है। अधिकांश किसान इसके बचाव के लिए प्रयास भी कर रहे हैं। कीटनाशक दवाओं का उपयोग भी कर रहे हैं। लेकिन कुछेक स्थानों में यह समस्या सबसे अधिक बनी हुई है। धान की फसल में बीमारी लगने से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।
उत्पादन होगा प्रभावित
किसानों का कहना है कि धान की फसल में बीमारी लगने से गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जिससे उत्पादन भी प्रभावित होगा। इससे किसानों को काफी नुकसान होगा। हालांकि, किसान इसके रोकथाम के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
कृषक द्वारका चौधरी, बल्ली सोनकर,संतु भूमियाँ,रामस्वरूप पटेल,राजाराम पटेल, ने बताया कि धान के पौधों में जमीन से ही ऊपर पौधा भी पीले हो रहे हैं एवं पौधे के मध्य में इल्ली भी देखी जा रही है जिसके कारण पौधे पीले एवं पेड़ पूरी तरह से सूख रहे हैं!
फसल को कीटो व बीमारियों से बचाकर किसान लें सकते है बेहतर उत्पादन
ब्लास्ट ब्लाइट रोग वीपीएच एवं इल्ली भुनगी आदि रोग का धान की फसल मे प्रारंभिक प्रवेश शुरू हो गया है जिसका समय रहते उपचार जरूरी है वरिष्ट कृषि विस्तार अधिकारी आर के चतुर्वेदी ने बताया कि ब्लास्ट व्लाइट रोग के निदान हेतु सर्वप्रथम खेत का पानी निकाल दें एवं 10 किलो जिंक 10 किलो सल्फेट प्रति एकड डालें रोग ठीक होने तक यूरिया का उपयोग न करें इससे बीमारी बढती है इसके अतिरिक्त फसल मे ट्राईसाइकलोजेल 75 प्रतिशत स्टेट्रो साइक्लीन 10 ग्राम पायोमेट्राजिन 200 एमएल 150 लीटर पानी मे प्रति एकड पम्प द्वारा डालकर धान को तर कर देवे जिससे इस रोग से छुटकारा मिल सकता है! किसान बाजार से दवाये खरीदने पर पक्के बिल लाकर एडीओ या विभाग को प्रेषित करें जिससे निश्चित रूप से 50 प्रतिशत छूट शासन द्वारा कृषक के खाते मे दी जावेगी!















































