डेढ़ माह बीते, प्रशासन गुरुजी को नहीं भेज पाया स्कूल




सुग्रीव यादव स्लीमनाबाद : जिले में सबसे बड़ा पद कलेक्टर का होता है। अगर कलेक्टर कोई फरमान जारी कर दें और उस फरमान पर अमल न हो ऐसा आम तौर पर होता नहीं, मगर कटनी के एक गुरुजी ने कलेक्टर के फरमान को भी ठेंगा दिखा दिया। गुरु जी को स्कूल जाने से इतना डर लगता है कि वे लगभग डेढ़ माह पहले कलेक्टर द्वारा दिए आदेश के खिलाफ जाकर पूरी तरह मनमानी करते हुए देखे जा सकते हैं। कलेक्टर के आदेश के खिलाफ खुद को बीमार बताते हुए मेडिकल लीव लेकर गुरुजी अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं। गुरुजी स्कूल जाएं या न जाएं मगर कलेक्ट्रेट परिसर में विचरण करते एवं भोपाल के चक्कर लगाते राजनीति चमकाने के प्रयास में सक्रिय रहते हैं। वैसे तो गुरुजी द्वारा किए जा रहे प्रत्येक कार्यों को स्वयं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अपनी आंखों से खुद ही देखते और सुनते हैं, लेकिन उसके बाद भी बीते दिनों एक लिखित शिकायत कलेक्ट्रेट कार्यालय में गुरुजी की मनमानियों को लेकर की गई है।कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत करते हुए शिक्षक नवनीत चतुर्वेदी ने कहा की राकेश दुबे माध्यमिक शिक्षक बी. ए.सी. जनपद शिक्षा केन्द्र कटनी द्वारा चिकित्सा अवकाश लेकर भोपाल एवं कटनी में राजनैतिक गतिविधि संचालित करते हुए जिला प्रशासन का सोशल मीडिया में व्यंगात्मक मखौल उड़ाया जा रहा है। शिकायती पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि राकेश दुबे विगत लगभग 12-13 वर्षों से निरंतर जन शिक्षक तथा बी. ए. सी. के पद पर प्रतिनियुक्ति में संलग्न रहा है। 14 जुलाई 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी कटनी द्वारा गठित जांच कमेटी के प्रतिवेदन अनुसार कलेक्टर के अनुमोदन से जिला परियोजना समन्वयक कटनी द्वारा इसकी प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए इसकी सेवाएं मूल विभाग स्कूल शिक्षा विभाग को सौंपते हुए जनपद शिक्षा केन्द्र कटनी से एकतरफा कार्यमुक्त किया जा चुका है। राकेश दुबे की प्रतिनियुक्ति के पश्चात इसके द्वारा चिकित्सा अवकाश का आवेदन प्रस्तुत किया गया है। चिकित्सा अवकाश में रहते हुए कलेक्टर द्वारा अनुमोदित जारी आदेश के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में अपील दायर की जो कि खारिज कर दी गई, पुनः परीक्षण की अपील भी खारिज कर दी गई है। राकेश दुबे द्वारा चिकित्सा अवकाश में रहते हुए दिनांक 03 अगस्त 2025 को तुलसीनगर भोपाल में आयोजित शासकीय शिक्षक संगठन की बैठक में उपस्थिति रही। सोशल मीडिया में प्रकाशित तस्वीरें इसका प्रमाण है। शासन के अवकाश संबंधी सामान्य प्रशासन के नियमानुसार चिकित्सा अवकाशधारी शिक्षक, कर्मचारी चिकित्सा अवकाश पर ऐसे सार्वजानिक रुप से स्वस्थ होकर उपस्थित होने अवकाश धारी के चिकित्सीय प्रमाण पत्र की जाँच कराई जानी चाहिए। पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग करते हुए कहा कि इस तरह से कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखाने वाले कर्मचारी के ऊपर कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।















































