आदिनाथ भगवान की प्रतिमा से जल धारा हुई प्रवाहित, चमत्कार को देखने उमड़ा जनसैलाब

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(सुग्रीव यादव ):
स्लीमनाबाद – स्लीमनाबाद नगर स्थित जैन मंदिर मे सोमवार की रात 8 बजे आस्था का अद्भुत करिश्मा देखने को मिला!
मंदिर मे विराजित भगवान नेमीनाथ की प्रतिमा से जल धारा प्रवाहित हुई!जल धारा प्रवाहित होने का यह चमत्कार जैन समाज के बालको ने देखा जो रात्रि मे पाठशाला मे अध्ययन कार्य के लिए गये!जल धारा प्रवाहित होने का यह दृश्य देख जैन समाज के लोगों को बतलाया!समाज दो -चार लोग जब मंदिर पहुंचें ओर भगवान नेमीनाथ की प्रतिमा से जल की धारा प्रवाहित होने का एकाएक दृश्य देखा तों सभी अंचभित हो गये ओर भगवान के इस चमत्कार को देखने नतमस्तक हो गये!
दृश्य देखने के बात सामाजिक ग्रुपो मे इस चमत्कारी दृश्य की फोटो शेयर की गई है व फोन के माध्यम से जानकारियां साझा की!

 

देखते ही देखते ही बड़ी संख्या कई गावों से जैन समाज के लोग पहुंच गये साथ अन्य समाज के लोगों को भी जब यह जानकारी लगी तों वो भी यह दृश्य देखने पहुंचें!जिसने भी इस चमत्कारी दृश्य को देखा सभी भगवान नेमीनाथ को प्रमाण किया!सकल जैन समाज के लोगों ने बतलाया कि यह भगवान नेमीनाथ का ही चमत्कार है जो प्रतिमा से जल धारा प्रवाहित हुई!जल धारा प्रवाहित दृश्य देख आस्था के इस चमत्कारी दृश्य के सैकड़ो लोग साक्षी बने!स्लीमनाबाद सकल जैन समाज के अध्यक्ष श्रेयांश जैन, सतीशचंद्र जैन,पप्पू जैन, मयूर जैन, मयंक जैन, आकेश जैन संदीप जैन, बबला जैन ने बतलाया कि नेमीनाथ भगवान जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर थे। उनका जन्म शौरीपुर (द्वारका) में हुआ था। वे यदुवंशी राजा समुद्रविजय और रानी शिवादेवी के पुत्र थे। नेमिनाथ भगवान का विवाह जूनागढ़ के राजा उग्रसेन की पुत्री राजुल से तय हुआ था, लेकिन उन्होंने सांसारिक सुखों से विरक्त होकर विवाह नहीं किया और दीक्षा ले ली।नेमिनाथ भगवान ने गिरनार पर्वत पर एक महीने का योग निरोध करके आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को मोक्ष प्राप्त किया।उनका प्रतीक शंख है। उनकी ऊंचाई 10 धनुष (30 मीटर) थी। उन्हें ‘नेमिकुमार’ और ‘नेमिनाथ जिनेन्द्र’ के नाम से भी जाना जाता है। नेमिनाथ भगवान का जीवन हमें सिखाता है कि सांसारिक सुखों से ऊपर उठकर, हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए और आत्म-साक्षात्कार की ओर बढ़ना चाहिये!

 


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