पत्नी की कुर्सी पर पति का कब्जा,रुबाब अध्यक्ष और सरपंची के क्या यही है महिला सशक्तिकरण ?




जबलपुर :जिले की कई ऐसी पंचायते और कुछ जनपद पंचायत है जहां पर नाम के लिए तो महिला सरपँच और महिला जनपद अध्यक्ष हैं लेकिन उनकी कुर्सी के बगल में बैठकर उनके पतियों द्वारा सरपंची और अध्यक्ष के पद को चलाया जा रहा है, ऐसे में सवाल उठना लाजमी हो जाता है की सरकार द्वारा जो महिलाओं को अधिकार दिए गए थे और जनता ने जिन्हें चुना है उन महिलाओं की जगह उनके पतियों का कब्जा क्यों ?इतना ही नहीं कुछ ऐसी भी पंचायते है जहां पर सरपँच तो कोई और हैं और सरपंची गांव के दबंग चला रहे है।हलाकि इस बात से स्थानीय प्रशासन अनजान नहीं उसके बाद भी अनजान बनने का नाटक करता है।
अफसरों और कर्मचारियों पर झाड़ते है रुबाब
इतना ही नहीँ जो भी महिला जनप्रतिनिधियों की जगह बैठकर पंचायत या जनपद चला रहे हैं वो सब कहीँ न कहीं सत्ता पक्ष से जुड़े है, साथ ही सरकारी कार्यालय में बैठकर अधिकारी कर्मचारियों पर ऐसा रुबाब झाड़ते है जैसे कि ये ही सरपँच या अध्यक्ष हो।
क्या है महिला सशक्तिकरण ?
महिला सशक्तिकरण में महिलाओं में आत्म-सम्मान की भावना को बढ़ावा देना, उनके अपने निर्णय लेने की क्षमता और अपने एवं दूसरों के लिए सामाजिक परिवर्तन को प्रभावित करने का उनका अधिकार शामिल है, साथ ही महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और राजनीति जैसे क्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करना शामिल है.
जनपद और पंचायतों के नाम और पतियों के नाम अंगली खबर में ….















































