85 वर्षीया वृद्धा ने परीक्षा देकर पेश की मिसाल

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जबलपुर/सिहोरा:कहते हैं की पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती  रविवार के दिन आयोजित ‘उल्लास’ परीक्षा में एक 85 वर्षीया वृद्धा शिमला बाई ने अदम्य उत्साह के साथ परीक्षा देते हुए आजकल के उन बच्चों के लिए एक मिशाल पेश की है जिनका मन पढाई में नहीं लगता।

रविवार कोई हुई परीक्षा ​

प्राप्त जानकारी के मुताबिक केंद्र एवं प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘नवभारत साक्षरता मिशन’ के अंतर्गत रविवार को विकासखंड सिहोरा के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर मूल्यांकन परीक्षा का सफल आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के उन वयस्कों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जो किसी कारणवश पूर्व में साक्षर नहीं हो सके थे। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा पिछले एक सप्ताह से जारी युद्ध स्तर की तैयारियों का परिणाम परीक्षा केंद्रों पर उमड़ी परीक्षार्थियों की भीड़ के रूप में देखने को मिला।

डिजिटल पंजीकरण और व्यापक सर्वे से मिली सफलता

​साक्षरता मिशन के निर्देशों के अनुपालन में शिक्षकों और ‘अक्षर साथियों’ ने बीते एक सप्ताह से क्षेत्र में सघन सर्वे अभियान चलाया था। इस दौरान घर-घर जाकर निरक्षरों की पहचान की गई और सरकार के ‘उल्लास’ ऐप पर उनका विधिवत पंजीकरण सुनिश्चित किया गया। विभाग की सक्रियता और शिक्षकों की मेहनत के चलते बड़ी संख्या में पंजीकृत नव-साक्षरों ने इस परीक्षा में भाग लेकर साक्षरता की ओर अपने कदम बढ़ाए।

माता-पिता के साथ स्कूल पहुँचे नौनिहाल

शासकीय प्राथमिक शाला लखराम में एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जहाँ नन्हे बच्चे अपने माता-पिता को साक्षर बनाने का संकल्प लेकर उन्हें परीक्षा केंद्र तक छोड़ने आए। परीक्षा केंद्र पर नव-साक्षरों के बीच खासा उत्साह देखा गया। इस अवसर पर शाला प्रभारी तहमीना बानो अंसारी एवं नवभारत साक्षरता प्रभारी योगेन्द्र मिश्रा ने उपस्थित रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और परीक्षार्थियों का मनोबल बढ़ाया।

​85 वर्षीया शिमला बाई बनीं प्रेरणा का केंद्र

इस परीक्षा के दौरान सबसे आकर्षक केंद्र 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला शिमला बाई रहीं। शारदा प्रसाद गड़ारी की पत्नी शिमला बाई ने अदम्य उत्साह के साथ परीक्षा दी। उनकी जीवटता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षा देते समय भी उन्हें अपने घरेलू उत्तरदायित्वों का पूरा ध्यान था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “जल्दी-जल्दी परीक्षा देनी है, घर में बहुत काम है और मवेशियों को पानी भी पिलाना है।” उनकी इस प्रेरणादायी भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

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