न्यायाधीशगण के लिए 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ
जबलपुर:भारतीय न्यायिक व्यवस्था में विवादों एवं प्रकरणों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण में मध्यस्थता के बढ़ते महत्व एवं उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए समय-समय पर न्यायिक अधिकारियों हेतु मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर एवं मुख्य संरक्षक मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा की प्रेरणा एवं प्रशासनिक न्यायाधिपति तथा कार्यपालक अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा 21 फरवरी को स्पोर्टस क्लब, जबलपुर में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए न्यायिक अधिकारियों हेतु मीडिएशन कंसीलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम शुभारंभ किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। इस अवसर पर प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर श्री कृष्णमूर्ति मिश्र ने कहा कि मध्यस्थता विवादों के निपटारे की एक अत्यंत लोकप्रिय एवं प्रभावी विधा है। मध्यस्थता प्रशिक्षण न्यायिक अधिकारियों को विवादों के समाधान हेतु एक विशेष दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिससे वे जटिल मामलों का भी सौहार्दपूर्ण तरीके से निराकरण कर सकते हैं।सुश्री सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर ने उपस्थित प्रशिक्षार्थी न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार मध्यस्थता प्रशिक्षण के उपरांत प्रशिक्षित व्यक्ति एक नए दृष्टिकोण के साथ कार्य करता है। ऐसा व्यक्ति विवाद समाधान में विशेषज्ञता प्राप्त कर लेता है, जिससे पक्षकारों को सुमधुर संबंधों के साथ न्याय प्राप्त होता है तथा प्रकरण का अंतिम रूप से निराकरण हो जाता है।सीनियर मीडिएशन ट्रेनर सुश्री अनुजा सक्सेना ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि कुछ क्षमताएँ प्रशिक्षण एवं शिक्षा से सीखी जा सकती हैं, जबकि कुछ जन्मजात होती हैं। मध्यस्थता एक कौशल-आधारित विधा है, जिसमें निरंतर अभ्यास से महारत प्राप्त की जा सकती है।एमसीपीसी ट्रेनर सुश्री सुमन शर्मा ने उपस्थित न्यायिक अधिकारियों से कहा कि आज से आगामी चार दिनों तक मध्यस्थता प्रक्रिया की बारीकियों को सीखा जाएगा, जो जीवन पर्यंत उनके कार्य में उपयोगी सिद्ध होंगी।कार्यक्रम का संचालन करते हुए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर श्रीमती शक्ति वर्मा ने कहा कि मध्यस्थता समय की आवश्यकता है। शीघ्र, सस्ता एवं सुलभ न्याय प्रदान करने में मध्यस्थता एक प्रभावी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में सर्वाधिक लोकप्रिय विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है।इस अवसर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के अतिरिक्त सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव, उप सचिव श्री अनिरुद्ध जैन तथा राज्य व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
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